होटल के बिस्तर पर सिर्फ सफेद चादर ही क्यों बिछाई जाती है? ज्यादातर लोग नहीं जानते इसकी असली वजह
होटल के बिस्तर पर हमेशा सफेद चादर ही क्यों बिछी हुई होती है? Ai image
Do You Know: क्या आपने कभी सोचा था कि होटल के कमरे में बिछी एक साधारण सी सफेद चादर के पीछे इतनी बड़ी सोच छिपी हो सकती है? यह सिर्फ एक रंग नहीं, बल्कि मेहमानों के मन में भरोसा जगाने, उन्हें सुकून का एहसास दिलाने और होटल के एक्सपीरियंस को खास बनाने का एक बेहद समझदारी भरा तरीका है.
Do You Know: क्या आपके दिमाग में यह सवाल कभी आया है कि जब भी आप किसी छोटे-बड़े या फिर फाइव स्टार होटल के कमरे में जाते हैं, तो वहां के बिस्तर पर हमेशा ही एक चमचमाती हुई सफेद चादर क्यों बिछी होती है? चाहे दीवार का रंग कैसा भी हो या फिर उस पर डिजाइन कैसे भी बने हुए हों, बिस्तर पर एक सफेद चादर का होना फिक्स होता है. अगर आपको यह एक इत्तेफाक लगता है, तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. दरअसल, इसके पीछे एक बहुत ही डीप साइकोलॉजी और होटल इंडस्ट्री का बड़ा बिजनेस माइंड काम करता है. आज इस आर्टिकल में हम आपको बहुत ही आसान शब्दों में समझाने वाले हैं कि आखिर होटलों के कमरे में सिर्फ सफेद रंग की चादर ही क्यों बिछाई जाती है. चलिए, जानते हैं विस्तार से.
होता है सुकून और शांति का अहसास
जब हम किसी होटल में जाते हैं, तो या तो वेकेशन मूड में होते हैं या फिर ऑफिस के काम और ट्रैवलिंग से बुरी तरह थक चुके होते हैं. लेकिन, जैसे ही हम कमरे का दरवाजा खोलते हैं और सामने बिस्तर पर एकदम साफ, चमचमाती सफेद चादर दिखती है, तो आधी थकान वहीं दूर हो जाती है. सफेद रंग का हमारे दिमाग से सीधा कनेक्शन होता है, क्योंकि यह हमारे दिमाग को शांति और सुकून से भरा एहसास देता है. उस साफ चादर को देखकर अंदर से एक पॉजिटिव फीलिंग आती है कि, “चलो, सही जगह आ गए, अब आराम से सो सकते हैं.” यह सफेद रंग हमारे स्ट्रेस को कम करता है और हमें एक सुरक्षित और रिलैक्सिंग माहौल का अहसास कराता है.
सफाई और हाइजीन का सबूत
सफेद एक ऐसा रंग है जिस पर छोटा सा दाग या धूल का कण भी तुरंत छिप नहीं सकता. रंगीन या डिजाइन वाली चादरों में गंदगी आसानी से छिप जाती है, जिससे मेहमानों के मन में शक पैदा हो सकता है कि चादर बदली गई है या नहीं. लेकिन सफेद चादर को देखकर मेहमानों को पूरा भरोसा हो जाता है कि बिस्तर एकदम साफ और फ्रेश है. होटल वाले सफेद चादर बिछाकर एक तरह से मेहमानों को यह भरोसा दिलाते हैं कि वे साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखते हैं.
होटल स्टाफ के लिए धोने में आसानी
बता दें होटल के कमरों की चादरें हर दिन बदली और अच्छे से धोई जाती हैं. जरा सोचिए, अगर हर कमरे में अलग-अलग रंग की चादरें होंगी, तो उन्हें धोते समय रंग छूटने का डर रहेगा, जबकि सफेद चादरों के साथ यह झंझट बिलकुल भी नहीं होता. होटल स्टाफ एक साथ सैकड़ों सफेद चादरों को गर्म पानी और ब्लीच में डालकर काफी आसानी से धो सकता है. ब्लीच की वजह से चादरों के बैक्टीरिया भी मर जाते हैं और उनकी चमक भी फीकी नहीं पड़ती. इसकी जगह यह चादर हर धुलाई के बाद और ज्यादा सफेद और चमकदार लगने लगती है.
लग्जरी और वीआईपी लुक पाने में मददगार
होटल इंडस्ट्री में साल 1999 के आसपास एक बड़ा बदलाव देखने को मिला था. वेस्टिन होटल नाम की एक फेमस चेन ने रिसर्च के बाद अपने कमरों में पूरी तरह से सफेद बेड और चादरों का इस्तेमाल शुरू किया. उनका मानना था कि सफेद बिस्तर देखने में बहुत ही लग्जरी लगता है. जब बिस्तर पूरी तरह से सफेद होता है, तो कमरे का पूरा लुक बदल जाता है और वह ठहरने वाले को ज्यादा महंगा और वीआईपी फील देता है. तब से लेकर आज तक यह एक तरह से ग्लोबल ट्रेंड बन चुका है.
कमरे को बड़ा दिखाना
यह बात तो हम सभी जानते हैं कि सफेद रंग लाइट को बहुत ही अच्छे से रिफ्लेक्ट करता है. इस वजह से जब कमरे की लाइट या खिड़की से आने वाली धूप सफेद चादर पर पड़ती है, तो पूरा कमरा खिला-खिला और चमकदार नजर आने लगता है. इस वजह से छोटा सा होटल का कमरा भी देखने में काफी बड़ा और खुला-खुला महसूस होता है.
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By Saurabh Poddar
सौरभ पोद्दार एक लाइफस्टाइल जर्नलिस्ट हैं और पिछले 4 सालों से डिजिटल मीडिया में एक्टिव हैं. उन्होंने रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया है. फिलहाल, सौरभ 'प्रभात खबर' के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बतौर कंटेंट राइटर काम कर रहे हैं. सौरभ को उन विषयों पर लिखना सबसे ज्यादा पसंद है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं. उनके आर्टिकल्स में आपको हेल्थ, फिटनेस, स्किन-हेयर केयर, पेरेंटिंग, हेल्दी रेसिपीज, घरेलू नुस्खे, रिलेशनशिप और वास्तु शास्त्र जैसी उपयोगी जानकारियां मिलेंगी. फिटनेस और अच्छी सेहत सौरभ की निजी जिंदगी का भी अहम हिस्सा हैं. वे जिन विषयों पर लिखते हैं, उन्हें अपनी रूटीन में फॉलो भी करते हैं. उनका मानना है कि जब आप किसी चीज को खुद एक्सपीरियंस करते हैं, तभी दूसरों तक सही और प्रैक्टिकल जानकारी पहुंचा सकते हैं. उनकी हमेशा यही कोशिश रहती है कि वे ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर बिल्कुल आसान और आम बोलचाल की भाषा में लिखें, ताकि हर पाठक उसे आसानी से समझ सके. यही वजह है कि उनके लिखे आर्टिकल्स काफी एंगेजिंग और एसईओ फ्रेंडली होते हैं.
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