IEA Electricity Mid-Year Update 2026: अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की ‘इलेक्ट्रिसिटी मिड-ईयर अपडेट 2026’ रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योगों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, एयर कंडीशनिंग (कूलिंग), इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) और डेटा सेंटरों (Data Centres) की बढ़ती खपत के कारण बिजली की वैश्विक मांग में यह तेजी दर्ज की जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक बिजली खपत वर्ष 2025 के 28,600 टेरावाट-घंटे (TWh) से बढ़कर वर्ष 2027 तक 30,700 TWh तक पहुंच जायेगी.ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव : कोयले को पछाड़ेगी रिन्यूएबल एनर्जीयह रिपोर्ट वैश्विक ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ की ओर इशारा करती है.2026 में सबसे बड़ा स्रोत : वर्ष 2025 में कोयले के लगभग बराबर पहुंचने के बाद, वर्ष 2026 में नवीकरणीय ऊर्जा कोयले को पछाड़कर बिजली उत्पादन का दुनिया का सबसे बड़ा स्रोत बन जायेगी.उत्पादन शेयर : वर्ष 2026 में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में 8 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि होगी, जिससे वैश्विक बिजली उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी वर्ष 2025 के 33 फीसदी से बढ़कर वर्ष 2027 तक 37 फीसदी हो जायेगी.सोलर पीवी का रिकॉर्ड प्रदर्शन : वर्ष 2026 में सौर ऊर्जा (Solar PV) में लगभग 600 TWh का इजाफा होगा. इसके साथ ही सौर ऊर्जा, विंड पावर को पीछे छोड़कर पनबिजली (Hydropower) के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी सोर्स बन जायेगा.ये भी पढ़ें: भारत ने रचा इतिहास : रिन्यूएबल एनर्जी का उत्पादन पहली बार 100 गीगावाट के पार, बिजली सप्लाई में रिकॉर्ड 42.79% हिस्सेदारीभारत, चीन और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की स्थितिदुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में बिजली की खपत तेजी से बढ़ने का अनुमान जताया गया है.भारत (India): वर्ष 2025 में मौसम संबंधी सुस्ती के बाद, वर्ष 2026 में भारत की बिजली मांग 7 प्रतिशत की रफ्तार से बाउंस बैक करेगी.चीन (China): विनिर्माण गतिविधियों (Manufacturing) और ईवी चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के विस्तार से चीन की मांग में वृद्धि 2026 में 5.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है.अमेरिका और यूरोपीय संघ : उन्नत अर्थव्यवस्थाओं में मांग में वृद्धि लगभग 2 प्रतिशत के स्तर पर स्थिर और मजबूत बनी हुई है.प्रभावित देश : पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे एलएनजी (LNG) आयात पर निर्भर और मूल्य-संवेदनशील एशियाई देशों में ईंधन की उच्च कीमतों के कारण खपत प्रभावित हुई है.ये भी पढ़ें: ग्लोबल वार्मिंग का यूरोपीय ट्रेलर भारत के लिए 3 मोर्चे पर तबाही के संकेत, कोलकाता में हीट इंडेक्स का जानलेवा जालमध्य पूर्व संकट, होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक प्रभावहोर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से तरल प्राकृतिक गैस (LNG) के प्रवाह में आयी रुकावटों ने वैश्विक बिजली बाजारों की परीक्षा ली है.गैस और बिजली की कीमतों में उछाल : एशिया और यूरोप में प्राकृतिक गैस की कीमतें वर्ष 2022-23 के ऊर्जा संकट के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गयीं. वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में यूरोपीय संघ और जापान में हाजिर (Spot) बिजली की कीमतें 30 फीसदी से अधिक बढ़ गयीं, इसके विपरीत, भारत में थोक कीमतों में 10 प्रतिशत से कम की वृद्धि हुई, जबकि अमेरिका में कीमतें काफी हद तक स्थिर रहीं.कोयले की ओर अस्थायी झुकाव : गैस की कीमतों में उछाल के कारण कई एशियाई और यूरोपीय देशों में प्राकृतिक गैस की बजाय कोयले से बिजली बनाने (Fuel Switching) का रुझान देखा गया.कार्बन उत्सर्जन पर असर : बिजली क्षेत्र से होने वाला कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन वर्ष 2026 में लगभग 1 प्रतिशत बढ़ेगा, लेकिन नवीकरणीय और परमाणु ऊर्जा में वृद्धि के कारण वर्ष 2027 में इसके स्थिर (Flattening) होने की उम्मीद है.ये भी पढ़ें: क्यों खत्म हुआ 45 फीसदी ‘क्लाइमेट फाइनेंस’ का लक्ष्य! भारत पर क्या होगा इसका असर?भविष्य की चुनौतियां : एल नीनो और ग्रिड फ्लेक्सिबिलिटीरिपोर्ट में आगाह किया गया है कि मौसम संबंधी परिवर्तन पूर्वानुमानों को प्रभावित कर सकते हैं. यदि वर्ष 2026 में एल नीनो (El Niño) का प्रभाव बढ़ता है, तो कूलिंग जरूरतों के कारण बिजली की मांग और बढ़ सकती है, जबकि हाइड्रो और विंड पावर जनरेशन प्रभावित हो सकता है. इसके अलावा, जैसे-जैसे रिन्यूएबल एनर्जी का विस्तार हो रहा है, कुछ बाजारों में निगेटिव स्पॉट प्राइसिंग (Negative Wholesale Prices) बढ़ रही हैं. IEA का मानना है कि इसके लिए ग्रिड में बैटरी स्टोरेज (Battery Storage) और डिमांड रिस्पांस जैसी लचीली (Flexible) प्रणालियों को बढ़ाना बेहद जरूरी है.ये भी पढ़ें: यूरोप पर ‘हीट डोम’ का कहर : खतरे में 32.7 करोड़ आबादी और 1484.66 लाख करोड़ की संपत्ति, जर्मनी-पोलैंड में 45 डिग्री तापमान का अलर्ट