खाड़ी देशों में नागरिकों से ज्यादा विदेशी, जानिए क्यों बसे हैं 90 लाख भारतीय ?

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 10 Mar 2026 6:18 PM

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खाड़ी देश सऊदी अरब

Gulf Cooperation Council : छह गल्फ कंट्री के संगठन को जीसीसी कहा जाता है. इस संगठन का उद्देश्य खाड़ी क्षेत्र में परस्पर सहयोग बढ़ाना और आर्थिक विकास करना है. इन देशों की कुल आबादी में नागरिकों से ज्यादा विदेशियों की संख्या है. कतर तो एक ऐसा देश है, जहां की 87.9% आबादी विदेशियों की है.

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Gulf Cooperation Council : ईरान में जारी युद्ध के बाद से खाड़ी देशों यानी गल्फ कंट्रीज की खूब चर्चा हो रही है. गौर करने वाली बात यह है कि प्रवासी भारतीयों की 25% आबादी से अधिक इन गल्फ कंट्रीज में रहती है. सबसे अधिक प्रवासी भारतीय संयुक्त अरब अमीरात में रहते हैं और इनकी कुल आबादी लगभग 40 लाख के करीब बताई जाती है.

किसे कहा जाता है गल्फ कंट्री जो GCC के सदस्य हैं?

फारस की खाड़ी के आसपास स्थित छह देशों को गल्फ कंट्री या खाड़ी देश कहा जाता है. इनमें शामिल हैं–बहरीन,कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, सउदी अरब और कतर. ये छह देश जीसीसी (Gulf Cooperation Council) के सदस्य हैं. इस कौंसिल का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, सुरक्षा, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग बढ़ाना है. जीसीसी की स्थापना 25 मई 1981 को हुई है, इसका मुख्यालय रियाद सऊदी अरब में है.

खाड़ी देशों में इतने भारतीय क्यों रहते हैं?

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खाड़ी देशों में भारतीयों की आबादी

खाड़ी देशों में भारतीयों की एक बड़ी आबादी रोजगार के लिए जाती है. विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार खाड़ी देशों में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं. इनके वहां जाने की वजह है रोजगार की उपलब्धता और बेहतर वेतन. 1970 के दशक में जब इन देशों में तेल की खोज हुई और निर्यात में तेजी आई तो इन देशों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य की जरूरत पड़ी ताकि सड़क, बंदरगाह और अन्य जरूरी निर्माण कार्य कराए जा सकें, लेकिन इन देशों की आबादी बहुत कम थी,तब इन्होंने बाहर दे श्रमिक बुलाया और उसी दौरान भारत से बेहतर वेतन की चाह में मजदूर गए. बाद में स्वास्थ्य, होटल और आईटी सेक्टर में भी काम करने के लिए भारत से लोग खाड़ी देशों में गए. खाड़ी देशों में वेतन अन्य देशों की अपेक्षा ज्यादा मिलता है और यहां आय पर टैक्स नहीं देना पड़ता है, इस वजह से भारतीय खाड़ी देशों में नौकरी करना पसंद करते हैं.

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खाड़ी देशों में कितने भारतीय रहते हैं?

खाड़ी देशों में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं. इनकी संख्या सबसे अधिक संयुक्त अरब अमीरात में है. विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार संयुक्त अरब अमीरात में 3419875 प्रवासी भारतीय और कुल 3425144 भारतीय रहते हैं. सऊदी अरब में प्रवासी भारतीयों की संख्या 2592166 है, जबकि कुल भारतीयों की संख्या 2594947 है.

गल्फ देशों में नागरिक से ज्यादा रहते हैं विदेशी

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खाड़ी देशों की जनसंख्या का अनुपात

गल्फ देशों की खासियत यह है कि यहां की कुल आबादी में नागरिकों से ज्यादा संख्या विदेशियों की है, जो यहां रोजगार की तलाश में आते हैं. खाड़ी देशों में कतर एक ऐसा देश है, जहां नागरिकों की संख्या मात्र 12.1 प्रतिशत है और विदेशी यहां 87.9 प्रतिशत रहते हैं. दूसरे स्थान पर संयुक्त अरब अमीरात है जहां नागरिक 12.9 प्रतिशत और विदेशी 87.1 प्रतिशत रहते हैं.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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