नीट पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर लगातार 36 दिनों से आंदोलन कर रही कॉकरोच जनता पार्टी को उस वक्त सफलता मिली जब शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. इस्तीफे को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा.सरकार कहती थी, इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए. गौरतलब है कि धर्मेन्द्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर एक चिट्ठी पोस्ट की, जिसमें उन्होंने इस्तीफे की जानकारी दी.NEET पेपर लीक को लेकर 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) धरने पर बैठी है, लेकिन बीते 48 घंटों में सरकार ने एक के बाद एक ऐसे कई फैसले लिए, जिसको लेकर कहा जहा रहा था कि वो अब दबाव में है. आइए जानते है क्या थे वो फैसले? 48 घंटे में सरकार ने बदला अपना फैसला 20 जून को शुरू हुए आंदोलन को लेकर सरकार पहले साइलेंट मोड में थी, लेकिन जैसे-जैसे युवा और छात्रों का झुकाव इस आंदोलन की तरफ बढ़ता गया सरकार पर दबाव बढ़ता गया. खासकर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और विपक्ष द्वारा सरकार पर लगातार हमले के बाद से सरकार मामले में निष्कर्ष पर पहुंचना चाह रही थी.प्रधानमंत्री का हस्तक्षेप मामले को लेकर चुप्पी रखने वाले पीएम मोदी ने पहली बार 23 जुलाई की सुबह पहली बार इस मुद्दे पर अपनी टिप्पणी की, उन्होंने X पर लिखा कि युवाओं के हित से बड़ा कुछ नहीं है और पेपर लीक के दोषियों को सजा देने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे.23 जुलाई की रात ही उन्होंने एक वीडियो मैसेज भी जारी किया, जो खास इसलिए रहा क्योंकि इसकी शुरुआत उन्होंने 'फ्रेंड्स' कहकर, सेल्फी वाले अंदाज में की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस इंस्टाग्राम रील को पहले 24 घंटे के भीतर 30.3 करोड़ (303 मिलियन) से अधिक बार देखा गया है, यह एक नया विश्व रिकॉर्ड है. करीब 3 मिनट के इस वीडियो में उन्होंने बताया कि 24 जुलाई की कैबिनेट बैठक में फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त सजा वाला प्रस्ताव रखा जाएगा. और अगले ही दिन यानी की 24 जुलाई को कैबिनेट ने पेपर लीक से जुड़े संशोधन बिल को मंजूरी भी दे दी. संभावना है कि यह बिल 27 जुलाई को संसद में पेश हो सकता है.CJP से बातचीत की कोशिश20 जुलाई को जब कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा संसद मार्च का आयोजन किया गया तो सरकार ने मामले में पहली बार बातचीत का प्रस्ताव रखा, हालांकि सरकार की तरफ से कहा गया कि बातचीत की पहल CJP द्वारा की गई. लेकिन इस बातचीत का कोई ठोस परिणाम नहीं निकला. उसके बाद फिर 23 जुलाई को सरकार ने बताया कि उसने CJP को बातचीत के लिए चार बार बुलाया, लेकिन वे नहीं आए. जिसको लेकर CJP ने कहा कि उसकी शर्त है कि सरकार बातचीत किसी मंत्री के घर या दफ्तर में नहीं, बल्कि किसी न्यूट्रल जगह या जंतर-मंतर पर करें.आखिरकार 24 जुलाई की सुबह जंतर-मंतर से करीब एक किलोमीटर दूर कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में मीटिंग हुई. इसमें CJP की तरफ से सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल हुए, वहीं सरकार की तरफ से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा मौजूद रहे.करीब दो घंटे चली इस बैठक के बाद नड्डा ने बताया कि CJP ने तीन बड़ी मांगें रखीं और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए पांच सुझाव भी दिए. सरकार ने इन पर विचार करने के लिए एक दिन का समय मांगा है. हालांकि CJP कहती रही कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बिना कोई समझौता नहीं होगा.सोनम वांगचुक का अनशन खत्मपेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर जंतर-मंतर पर 20 जून से आंदोलन चल रहा था लेकिन जब 28 जून को सोनम वांगचुक CJP के इस अभियान से जुड़े तो इसकी चर्चा तेज हो गई. उन्होंने सरकार पर मांग को लेकर दबाव बनाने के लिए आमरण अनशन शुरू की. सोनम वांगचुक को भूख हड़ताल के 21वें दिन दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर दिल्ली पुलिस ने सफदरगंज अस्पताल में भर्ती करवाया. जिसके बाद भारी संख्या में युवा और छात्र सड़कों पर उतर आए. जिसके बाद अदालत के निर्देश पर सोनम वांगचुक को सफदरगंज से दिल्ली के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां उन्होंने अपने हड़ताल के 26 वें दिन अनशन तोड़ा. 23 जुलाई की रात करीब 12 बजे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह खुद अस्पताल पहुंचे और उनका अनशन तुड़वाया. वांगचुक ने बताया कि उनसे पहले अलग-अलग पार्टियों के करीब 65 सांसद भी उनसे अनशन तोड़ने की अपील कर चुके थे. उन्होंने कहा कि सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन दिया है, इसलिए वे अनशन खत्म कर रहे हैं.चुप्पी से अचानक से कैसे हरकत में आ गई सरकार बीते 48 घंटों में जिस तरह लगातार ताबड़तोड़ फैसले ले रही थी, उससे यही लग रहा थी कि सरकार दबाव में थी. इसे समझने के लिए समझिए ये तीन बड़े कारण. पहला कारण - CJP द्वारा देश के हर जिले में बड़े प्रोटेस्ट का ऐलान लगातार हो रही बातचीत के बाद भी जब कोई सार्थक परिणाम नहीं मिल रहे थे तो CJP ने सरकार को चुनौती देते हुए एक घोषणा की. संगठन ने साफ कहा कि अगर 24 जुलाई तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तो देश के हर जिले में एक दिन का बड़ा प्रोटेस्ट होगा. इसके लिए पैम्फलेट भी बंट चुके थे. CJP की चेतावनी और मौजूदा हालात को लेकर कई राजनीतिक जानकार का कहना है कि छात्र आंदोलन इतिहास में कई बार सरकारों के लिए खतरे की घंटी साबित हुए हैं, और अभी यह आंदोलन पूरी तरह संगठित रूप नहीं ले पाया है , अगर यह संगठित रूप ले लेता तो सरकार के लिए उसको काबू में करना मुश्किल हो सकती थी. दूसरा कारण -विपक्ष का सीधा मैदान में उतरना20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान छात्रों और युवाओं पर लाठीचार्ज के साथ आंसू गैस के प्रयोग के बाद विपक्ष का सीधे तौर पर सरकार पर हमले कर रहे थी. 20 जुलाई की लाठीचार्ज घटना से पहले तक विपक्ष के कुछ ही नेता जंतर-मंतर पहुंच रहे थे, लेकिन उसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी सहित कई बड़े नेताओं ने पीएम आवास पर तीन घंटे धरना दिया. जब जितेंद्र सिंह धरना खत्म कराने पहुंचे, तो राहुल गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर हटाया गया.तीसरा कारण -वांगचुक को जबरन उठाकर अस्पताल ले जानासोनम वांगचुक के भूख हड़ताल के 21वें दिन 18 जुलाई को वांगचुक को जबरन उठाकर अस्पताल ले जाना और 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई, इन दोनों घटनाओं ने आंदोलन को शांत करने की बजाय और भड़का दिया. हालांकि सरकार ने अपनी चूक समझते हुए इसे ठीक करने की कोशिश में जुट गई थी. धर्मेन्द्र प्रधान ने इस्तीफा उसी का एक पार्ट है. कुल मिलाकर, पिछले 24 घंटों में सरकार की तेज हलचल, नड्डा और CJP दोनों के बयान साफ बताते हैं कि सरकार दबाव में आई और उसे अपने मंत्री का इस्तीफा लेना पड़ा. ये भी पढ़ें : जेन-जी का नया प्रोटेस्ट मॉडल : मीम, रील और हैशटैग से सरकार पर निशाना