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नए साल में PM मोदी की चीन यात्रा से हो सकता है दोनों देशों को फायदा

Updated at : 24 Dec 2014 6:44 PM (IST)
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नए साल में PM मोदी की चीन यात्रा से हो सकता है दोनों देशों को फायदा

नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नए साल में चीन का दौरा करने वाले हैं. इस यात्रा को लेकर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को बढावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. इससे पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे, जिनमें […]

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नयी दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नए साल में चीन का दौरा करने वाले हैं. इस यात्रा को लेकर दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को बढावा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है. इससे पहले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे, जिनमें 20 अरब डॉलर के चीनी निवेश के साथ भारत में दो औद्योगिक पार्कों की स्थापना और भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण में सहयोग को लेकर किए गए समझौते शामिल हैं. इसके अलावा सिक्किम के नाथूला दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर के लिए एक नया मार्ग खोलने पर भी सहमति बनी.
मोदी के सिक्किम के नाथूला दर्रे के रास्ते कैलाश मानसरोवर के नए मार्ग का औपचारिक उद्घाटन करने की उम्मीद है. इससे भारतीय श्रद्धालु पहाड़ी रास्तों पर पैदल जाने की बजाए बस द्वारा कैलाश मानसरोवर जा सकेंगे.
प्रधानमंत्री की बीजिंग यात्र से पहले व्यवस्थाओं को अंतिम रुप देने के लिए चीन में भारत के राजदूत अशोक के. कंठ शीर्ष चीनी अधिकारियों के साथ तिब्बत का दौरा कर चुके हैं.
भारत इस समय तेज रफ्तार वाली ट्रेनों के लिए दो कॉरिडोर पर विचार कर रहा है. अगर परियोजना मूर्त रुप लेती है तो देश से बाहर तेज रफ्तार वाली ट्रेन तकनीक का बाजार तलाश रहे चीन को इससे बहुत फायदा होगा. मोदी की यात्रा के दौरान इन सभी परियोजनाओं के आकार लेने की उम्मीद है.
भारत दोनों देशों के बीच औसतन करीब 35 अरब डॉलर प्रति वर्ष के व्यापार घाटे से निपटने के एक उपाय के तौर पर चीन से निवेश बढाने को कह रहा है. पिछले साल दोनों देशों का व्यापार 66.47 अरब डॉलर का था जो चीन के पक्ष में बहुत ज्यादा झुका हुआ था.
दोनों देश साथ ही 18वीं सीमा वार्ता की तैयारी कर रहे हैं, जिसमें भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और उनके चीनी समकक्ष यांग जेइची हिस्सा लेंगे. वार्ता के मोदी की यात्रा से पहले अगले कुछ महीनों में होने की उम्मीद है.
भारत के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने इस महीने चीन की यात्रा के दौरान कहा था कि सीमा विवाद के हल के लिए जरुरी सभी काम पूरे कर लिए गए हैं और दोनों देश जल्द इसका हल कर सकते हैं क्योंकि दोनों देशों में इस समय मजबूत जनादेश वाली सरकारें हैं.
सीमा विवाद पर गतिरोध लद्दाख क्षेत्र के अक्साई चिन और अरुणाचल प्रदेश में सीमाओं के अंकन से जुड़ा है. शी जिनपिंग की भारत यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, हमें जल्द ही अपने सीमा मुद्दे का हल कर लेना चाहिए. वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भी स्थिति स्पष्ट होना बहुत महत्वपूर्ण है. यह सालों से लंबित रहा है, यह इसे दोबारा शुरु करने का समय है. शी की यात्रा के दौरान मोदी और शी के बीच दोस्ताना माहौल चर्चा में रहा था लेकिन लद्दाख के चुमार क्षेत्र में भारत और चीन के सैनिकों के बीच गतिरोध इस दौरे पर हावी हो गया. कई दौर की बातचीत के बाद सैनिकों की वापसी के साथ मुद्दे का हल निकाला गया.
इस साल सर्दियों में चीनी सैनिकों ने चुमार में एक बार फिर घुसपैठ की कोशिश की. अभी तक इस इलाके में चीनी सैनिकों ने कई बार घुसपैठ की कोशिश की है.
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