मंगल दोष से डरने की जरूरत नहीं, ये खास योग बदल सकते हैं आपकी शादी की किस्मत

मंगल दोष कब कैंसिल हो जाता है
Mangal Dosha: विवाह में मंगल दोष (कुज दोष) को लेकर अक्सर लोग चिंता करते हैं, लेकिन हर स्थिति में इसका असर गंभीर नहीं होता. कई ग्रह योग और कुंडली की स्थितियां इसे कम या खत्म कर सकती हैं. सही ज्योतिषीय विश्लेषण से इसके वास्तविक प्रभाव को आसानी से समझा जा सकता है.
Mangal Dosha: विवाह के समय अक्सर मंगल दोष (कुज दोष) को लेकर लोगों में चिंता देखी जाती है. लेकिन ज्योतिष के अनुसार, हर मंगल दोष उतना प्रभावशाली नहीं होता जितना आम तौर पर समझा जाता है. कई स्थितियों में इसका असर अपने आप कम हो जाता है या पूरी तरह खत्म भी हो सकता है. सबसे पहले बात करते हैं मंगल की स्थिति की. अगर मंगल कमजोर हो, जैसे वक्री, अस्त, नीच का या शत्रु राशि में, तो उसका नकारात्मक प्रभाव काफी कम हो जाता है, भले ही वह उन भावों में क्यों न हो जिन्हें संवेदनशील माना जाता है (जैसे 1, 4, 7, 8 या 12 भाव)। ऐसे मामलों में गैर-मांगलिक व्यक्ति से विवाह भी सामान्य माना जाता है.
कुंडली मिलान अहम भूमिका निभाता है
आईआईटी कानपुर के पूर्व छात्र और काशी नक्षत्र ज्योतिष के संस्थापक पंडित प्रशांत के अनुसार कुंडली मिलान भी बहुत अहम भूमिका निभाता है. अगर दोनों लड़का-लड़की मांगलिक हों, या उनके गुण 27 से ज्यादा मिलते हों, तो मंगल दोष को ज्यादा महत्व नहीं दिया जाता. साथ ही, अगर ग्रहों की आपसी मित्रता अच्छी हो और गण भी समान हो, तो भी इसका असर कम हो जाता है.
कुछ ग्रहों की खास स्थितियां भी मंगल दोष को खत्म कर देती हैं. जैसे,
- गुरु की मंगल पर दृष्टि,
- दूसरे भाव में चंद्र और शुक्र का होना,
- या राहु का मंगल के साथ होना
इन सभी स्थितियों में मंगल दोष का प्रभाव कम या समाप्त हो जाता है. इसके अलावा, अगर गुरु या शुक्र लग्न या सातवें भाव में मजबूत हों, तो भी अच्छा संतुलन बनता है. अगर कुंडली में शनि भी उन्हीं महत्वपूर्ण भावों (1, 4, 7, 8, 12) में हो, तो वह मंगल के प्रभाव को संतुलित कर देता है. साथ ही, अगर राहु केंद्र में हो या गुरु की शुभ दृष्टि मिले, तो भी चिंता कम हो जाती है.
कुछ शास्त्रों के अनुसार, खास स्थितियों में मंगल दोष बनता ही नहीं. जैसे,
- मेष में 1 भाव,
- वृश्चिक में 4 भाव,
- मकर में 10 भाव,
- कर्क में 8 भाव,
- या धनु में 12 भाव
इन जगहों पर मंगल होने से दोष नहीं माना जाता.
इसी तरह, कुछ ज्योतिषी मानते हैं कि कुछ राशि-भाव के संयोजन (जैसे 2 भाव में मिथुन या कन्या, 7 भाव में कर्क या मकर) में भी मंगल दोष नहीं बनता. कभी-कभी दोष अपने आप ही संतुलित हो जाता है. अगर दोनों कुंडलियों में एक जैसे भावों (1, 4, 7, 8, 12) में पाप ग्रह (सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु) हों, तो उनका असर एक-दूसरे को काट देता है.
एक दिलचस्प बात यह है कि अगर मंगल सिंह या कुम्भ राशि में हो, तो आमतौर पर मंगल दोष नहीं माना जाता. वहीं, सिंह और कर्क लग्न वालों के लिए मंगल एक शुभ ग्रह होता है, इसलिए उनमें यह दोष आमतौर पर असर नहीं करता, जब तक मंगल बहुत ज्यादा कमजोर या पीड़ित न हो.
सीधी बात: मंगल दोष को लेकर घबराने की ज़रूरत नहीं है. पूरी कुंडली को सही तरीके से देखने पर अक्सर ऐसे कई योग मिलते हैं जो इसके असर को कम या खत्म कर देते हैं. इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले एक विशेषज्ञ से संपूर्ण विश्लेषण जरूर कराएं.
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लेखक के बारे में
By Saurabh Poddar
मैं सौरभ पोद्दार, पिछले लगभग 3 सालों से लाइफस्टाइल बीट पर लेखन कर रहा हूं. इस दौरान मैंने लाइफस्टाइल से जुड़े कई ऐसे विषयों को कवर किया है, जो न सिर्फ ट्रेंड में रहते हैं बल्कि आम पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से भी सीधे जुड़े होते हैं. मेरी लेखनी का फोकस हमेशा सरल, यूजर-फ्रेंडली और भरोसेमंद भाषा में जानकारी देना रहा है, ताकि हर वर्ग का पाठक कंटेंट को आसानी से समझ सके. फैशन, हेल्थ, फिटनेस, ब्यूटी, रिलेशनशिप, ट्रैवल और सोशल ट्रेंड्स जैसे विषयों पर लिखना मुझे खास तौर पर पसंद है.
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