ममता बनर्जी से छिन जायेगा तृणमूल का सिंबल! दीदी के करीबी अरूप बोले- बंगाल में खेला होबे

Edited by Mithilesh Jha
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अरूप चक्रवर्ती और ममता बनर्जी.

TMC Controversy: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से अपनी ही पार्टी का सिंबल छिन सकता है. तृणमूल कांग्रेस के बागी 20 सांसदों में एक ने कहा है कि अलग हुए 20 सांसद ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं. यह गुट अब पार्टी के सिंबल पर भी दावा करेगा.

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TMC Controversy: तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसद अरूप चक्रवर्ती ने सोमवार को दावा किया कि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी है. इसे ‘सुधारने’ की कोशिश कर रहे हैं. वे इसके चुनाव चिह्न पर भी दावा करेंगे. बागी सांसद ने कहा- एक नया खेल शुरू हो गया है. ‘खेला होबे’. उन्होंने दावा किया कि इस कदम से पश्चिम बंगाल में विकास और रोजगार आयेगा. इसके उलट, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने इस कदम को दलबदल विरोधी कानून के तहत अवैध करार दिया है.

20 सांसदों ने टीएमसी का एनसीपीआई में किया विलय

तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की. इन्होंने घोषणा की कि वे त्रिपुरा की एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई)में विलय कर रहे हैं.

ममता बनर्जी डरी हुई हैं : अरूप चक्रवर्ती

अरूप चक्रवर्ती ने तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा- ममता बनर्जी डरी हुई हैं, वह पार्टी की बैठक तक नहीं बुला सकतीं. वह चुनाव से पहले अपने चुनाव क्षेत्र में एक बैठक भी नहीं कर पायीं. उन्होंने कहा कि काकोली घोष दस्तीदार और सुदीप बंद्योपाध्याय उनके गुट के ‘नेता’ थे.

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हमने तृणमूल नहीं छोड़ी है. हम तृणमूल में ही हैं और पार्टी को ठीक करने की कोशिश कर रहे हैं. पार्टी को नुकसान क्यों पहुंचा, इस पर कोई बात नहीं हो रही है. हम पार्टी के चुनाव चिह्न के लिए लड़ेंगे. हमारे पास 20 सदस्य हैं, तो हम चुनाव चिह्न के लिए क्यों न लड़ें?

अरूप चक्रवर्ती, बागी सांसद, तृणमूल कांग्रेस

पूरी राजनीतिक पार्टी का विलय होना चाहिए : सागरिका

तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सदस्य सागरिका घोष ने कहा कि संविधान की 10वीं अनुसूची में यह स्पष्ट है कि पूरी ‘राजनीतिक पार्टी’ का विलय होना चाहिए, न कि केवल संसद में उसके सांसदों का. इस अनुसूची को आम बोलचाल की भाषा में ‘दल-बदल विरोधी कानून’ कहा जाता है.

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सागरिका घोष ने सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

सागरिका ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा- दो तिहाई बहुमत और दलबदल विरोधी कानून के बारे में बड़े पैमाने पर गलत जानकारी फैलायी जा रही है. सबसे पहले संसद के बाहर मौजूद राजनीतिक पार्टी (न कि संसद के अंदर बैठे पार्टी के प्रतिनिधि) का विभाजन या विलय होना चाहिए. इस शर्त के बाद, यदि दो-तिहाई सदस्य अलग होने का निर्णय लेते हैं, तो उन पर दलबदल विरोधी कानून लागू नहीं होगा.

ममता बनर्जी हैं तृणमूल की अध्यक्ष : सौगत रॉय

तृणमूल के वरिष्ठ नेता एवं सांसद सौगत रॉय ने कहा- अब यह स्पष्ट है कि अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस वह पार्टी है, जिसकी अध्यक्ष ममता बनर्जी हैं. इसका चुनाव चिह्न दो फूल है और इसका मकसद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)को हराना है.

20 सांसदों का एनसीपीआई में शामिल होना गलत : रॉय

सौगत रॉय ने कहा कि तृणमूल के चुनाव चिह्न पर चुने गये 20 सांसदों ने एक अनजान एनसीपीआई में गैर-कानूनी तरीके से शामिल होकर (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को समर्थन देने की घोषणा कर अपने मतदाताओं के साथ धोखा किया है. उन्होंने कहा- जाहिर है, उन लोगों ने ऐसा संविधान की अनुसूची 10(4) के प्रावधानों से बचने के लिए किया. लोग इसको देख रहे हैं.

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स्पीकर ओम बिरला से बोले बागी- हम अलग बैठेंगे

तृणमूल के बागी सांसदों ने रविवार को लोकसभा अध्यक्ष बिरला के साथ मुलाकात के दौरान सदन में बैठने की अलग व्यवस्था करने की मांग की, जबकि तृणमूल के संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि वह अलग हुए गुट मान्यता न दें.

TMC Controversy: 6 बार के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय भी बागी गुट में

छह बार के सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय भी रविवार को बागी गुट में शामिल हो गये. उन्होंने कहा कि बागी गुट ही असली तृणमूल कांग्रेस है और मान्यता और चुनाव चिह्न हासिल करने के लिए वह कानूनी लड़ाई लड़ेगा.

बंगाल विधानसभा और संसद में एक साथ लड़ रहे विधायक-सांसद

तृणमूल पर नियंत्रण की लड़ाई संसद और पश्चिम बंगाल विधानसभा, दोनों जगहों पर एक साथ लड़ी जा रही है. हाल ही में, पार्टी के 80 में से 64 विधायकों ने अलग होकर एक अलग विधायी समूह के तौर पर मान्यता हासिल कर ली और रीतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर मान्यता मिली. ऐसी ही कोशिश दिल्ली में भी टीएमसी के सांसद कर रहे हैं.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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