बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तसलीमा नसरीन ने कोलकाता में शनिवार को अपना दर्द बयां किया. उन्होंने कहा कि यूरोप ने मुझे नागरिकता और रहने की जगह दी है, लेकिन अफसोस की बात है कि दोनों बंगाल (तसलीमा का अपना देश बांग्लादेश और पश्चिम बंगाल)में मुझे रहने के लिए थोड़ी सी भी जगह नहीं मिल सकी. हालांकि, कोलकाता आने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा- कोलकाता लौटने पर मुझे ऐसा लगता है, जैसे मैं जिंदगी के उस हिस्से में वापस आ गयी हूं, जिसे मैं यहीं छोड़ गयी थी.किसी लेखक को अपने देश से निर्वासित न होना पड़े : नसरीन‘द्विखंडितो’ की लेखिका तसलीमा नसरीन कोलकाता में अपने सम्मान में रवींद्र सदन में आयोजित समारोह को संबोधित कर रहीं थीं. 19 साल बाद कोलकाता आयीं तसलीमा ने कहा- मैं ऐसे दिन की कामना करती हूं, जब किसी लेखक को अपने देश से निर्वासित न होना पड़े. उन्होंने कहा- मैं यहां किसी राजनीतिक पार्टी के पक्ष या विपक्ष में बोलने नहीं आयी हूं. मैं महिलाओं के अधिकारों के पक्ष में बात करने आयी हूं.