क्या आप जानते हैं आदमपुर एयरबेस की खासियत, जहां टिकी थी दुश्मन देश की नजर ?

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 14 May 2025 5:52 PM

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आदमपुर एयरबेस की खासियत

Adampur Air Base : भारत में कुल 60 से ज्यादा एयरबेस हैं, जिन्हें सात कमांड क्षेत्रों में बांटा गया है. इन एयरबेस में पंजाब का आदमपुर एयरबेस बहुत ही खास है, क्योंकि यहां हमारा एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 तैनात है और यह मिग 29 का बेस भी है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद आदमपुर एयरबेस की चर्चा खूब हो रही है, क्योंकि इस एयरबेस ने पाकिस्तान के हमलों का मुंहतोड़ जवाब दिया, वहीं पाकिस्तान यह लगातार कह रहा है कि उसने आदमपुर एयरबेस को बर्बाद कर दिया है. मंगलवार को जब पीएम मोदी ने इस एयरबेस पर सेना के विमान से लैंड किया, तो पाकिस्तानी दावों के परखच्चे उड़ गए.

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Adampur Air Base : आदमपुर एयर बेस चर्चा में है और गूगल पर टाॅप ट्रेंड में भी बना हुआ है. आदमपुर एयर बेस के चर्चा में रहने की बड़ी वजह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को यहां पहुंचे थे और सेना के जवानों से मिलकर उनका हौसला बढ़ाया था. आदमपुर एयरबेस पंजाब के जालंधर जिले में स्थित है और भारत का बहुत ही अहम एयरबेस है जिसपर देश की सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी है. आदमपुर एयरबेस से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बड़ी कार्रवाई हुई और पाकिस्तान को पस्त कर दिया गया.

क्या है आदमपुर एयरबेस की खासियत?

आदमपुर एयरबेस भारत का बहुत ही खास एयरबेस है, क्योंकि यह पाकिस्तान की सीमा से महज 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इस एयर बेस में भारत के तमाम डिफेंस सिस्टम तैनात हैं. इस एयरबेस की खासियत के बारे में बताते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस सोढ़ी (रिटायर्ड) ने कहा कि किसी भी देश के लिए उनका एयरबेस बहुत अहम होता है. एयरबेस में किसी भी देश की सेना के लड़ाकू विमान और ट्रांसपोर्ट विमान तैनात होते हैं. हमारा आदमपुर एयरबेस इसलिए बहुत खास है, क्योंकि यहां हमारे ड्रोन, लड़ाकू विमान, एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 सहित कई अन्य जरूरी विमान तैनात हैं. चूंकि आदमपुर एयरबेस पाकिस्तान की सीमा के करीब है, इसलिए भी इस एयरबेस पर जरूरी विमानों की तैनाती रहती है. यह मिग 29 का खास बेस है.

आदमपुर एयरबेस पर थी पाकिस्तान की नजर

PM Modi visits Adampur Air base
पीएम मोदी आदमपुर एयरबेस पहुंचे

भारत ने जब पहलगाम की घटना के बाद ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया, तो पाकिस्तान बौखला गया और उसने अपने क्षेत्र से कई ड्रोन और मिसाइल भारत की ओर चलाए. उस वक्त आदमपुर एयरबेस पर तैनात एस-400 और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम ने ही नाकाम किया. पाकिस्तान यह जानता है कि आदमपुर एयरबेस भारत के लिए बहुत ही खास है, इसलिए उसने अपनी मीडिया में यह बात फैलाई कि उसने भारत के आदमपुर एयरबेस को ध्वस्त कर दिया है, भारत के लड़ाकू विमानों को क्षति पहुंचाई है. इस बारे में लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस सोढ़ी (रिटायर्ड) बताते हैं कि पाकिस्तान के इस दुष्प्रचार पर तब लगाम लग गई, जब प्रधानमंत्री ने सेना के सी-130 विमान से आदमपुर एयरबेस पर ही लैंडिंग की. जब वे सेना के अधिकारियों और जवानों से बात कर रहे थे, तो हमारा डिफेंस सिस्टम एस-400 भी नजर आ रहा था, इससे साफ जाहिर है कि आदमपुर एयरबेस को बर्बाद करने का पाकिस्तानी दावा बेकार और निरर्थक है.

क्या होता है एयरबेस, क्यों दुश्मन देश की नजर रहती है

एयरबेस यानी वायुसेना का हवाई अड्डा. इस हवाई अड्डे पर वायुसेना के जंगी लड़ाकू विमान और ट्रांसपोर्ट के विमान तैनात रहते हैं. आमतौर पर वायुसेना के अधिकारी इन विमानों के जरिए अपने ट्रेनिंग करते हैं और युद्ध की तैयारी में जुटे रहते हैं, लेकिन जब युद्ध की घोषणा होती है, तो यह एयरबेस वायुसेना के लिए बहुत खास हो जाता है. लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस सोढ़ी (रिटायर्ड) बताते हैं कि युद्ध के वक्त किसी भी एयरबेस पर दुश्मन की नजर रहती है, वह यह कोशिश करता है कि एयरबेस को बर्बाद कर दिया जाए,ताकि विरोधी देश का नुकसान हो. किसी भी देश के पास संसाधन सीमित होते हैं, चाहे वो एयर डिफेंस सिस्टम हो या लड़ाकू विमान, उनकी संख्या सीमित होती है. अगर युद्ध के दौरान उस ताकत को खत्म कर दिया जाए, तो दुश्मन देश कमजोर पड़ जाएगा, इसी वजह से एयरबेस का महत्व बहुत ज्यादा है और कोई भी देश युद्ध के दौरान दुश्मन के एयरबेस पर पैनी नजर रखता है.

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लेखक के बारे में

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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