पाक की नापाक कोशिश को एस 400 सुदर्शन चक्र ने किया बेअसर, एक ही वक्त में 300 मिसाइलों को कर सकता है बेकार

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 08 May 2025 6:22 PM

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S 400 सुदर्शन चक्र

Operation Sindoor2 : ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइल दागे, हालांकि भारत ने उन तमाम हमलों को बेअसर कर दिया गया. भारत ने ऑपरेशन सिंदूर की प्रेस ब्रीफिंग के दौरान स्पष्ट तौर पर यह बताया था कि हमने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को निशाना नहीं बनाया है, सिर्फ आतंकवादियों के अड्डे को तबाह किया है, बावजूद इसके पाकिस्तान ने हिमाकत की और मुंह की खाया है. जवाबी कार्रवाई करते हुए भारत ने गुरुवार सुबह पाकिस्तान में कई स्थानों पर एयर डिफेंस रडार और सिस्टम को निशाना बनाया. भारत की जवाबी कार्रवाई में लाहौर का एक एयर डिफेंस सिस्टम बर्बाद हो गया है. भारत ने पाकिस्तानी मिसाइलों के हमले को जिस तकनीक के जरिए बेअसर किया उसका नाम है-एस-400 सुदर्शन चक्र.

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Operation Sindoor2 : पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जो अपनी हरकतों से बाज नहीं आता है. उसने पहले 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी कार्रवाई की और 26 निर्दोष लोगों की हत्या करवाई. इस आतंकी घटना में मारे गए लोगों के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए जब भारत ने 6-7 मई की रात को पाकिस्तान में ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया तो पाकिस्तान बौखला गया. भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हमला किया था, लेकिन पाकिस्तान ने 7-8 मई की रात को भारत के अवंतीपुरा, श्रीनगर, जम्मू, पठानकोट, अमृतसर, कपूरथला, जालंधर, लुधियाना, आदमपुर, भटिंडा, चंडीगढ़, नल, फलोदी, उत्तरलाई और भुज सहित उत्तरी और पश्चिमी भारत में कई सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश की. पाकिस्तान ने ड्रोन और मिसाइल के जरिए हमले की कोशिश की, जिसे भारत ने एस-400 सुदर्शन चक्र के जरिए बेअसर कर दिया. भारतीय वायुसेना ने एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 का नाम सुदर्शन चक्र इसलिए रखा है, क्योंकि ये बेहद ताकतवर हथियार है और दुश्मन को संभलने का कोई मौका तक नहीं देता है. भारत अभी भी यही कह रहा है कि हम क्षेत्र में विवाद को बढ़ाना नहीं चाहते, हम सिर्फ जवाब दे रहे हैं.

क्या है एस 400 सुदर्शन चक्र

एस 400 सुदर्शन चक्र भारतीय वायुसेना का अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम है. जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है एस 400 हमें मिसाइल हमले से सुरक्षित करता है. यह दुनिया की सबसे विकसित सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियों में से एक मानी जाती है. एस 400 की खासियत यह है कि यह एक साथ चार अलग-अलग रेंज की मिसाइलें चला सकती है और दुश्मन द्वारा दागे गए मिसाइल को इंटरसेप्ट कर सकती है यानी उस मिसाइल को टारगेट तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर सकती है.

एस 400 सुदर्शन चक्र की खासियत

एस 400 सुदर्शन चक्र की खासियत के बारे में लेफ्टिनेंट कर्नल जेएस सोढ़ी (रिटायर्ड) बताते हैं कि यह एक बेहतरीन डिफेंस सिस्टम है, जिसे भारत ने रूस से खरीदा है. यह डिफेंस सिस्टम इतना पावरफुल है कि यह एक ही वक्त में दुश्मन द्वारा दागे गए 300 मिसाइलों को नष्ट कर सकता है. साथ ही एस 400, 600 किमीटर तक के रेंज में वार कर सकता है.

  • एस 400 सुदर्शन चक्र एक साथ 36 लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है.
  • एस 400 सुदर्शन चक्र लड़ाकू विमान, मिसाइल, ड्रोन और स्टेल्थ विमान को भी मार गिरा सकता.
  • एस-400 में मल्टी-लेयर सुरक्षा होती है यानी यह दूरी के हिसाब से अलग-अलग मिसाइलों से कई स्तरों पर दुश्मन को रोक सकता है.
  • एस 400 सुदर्शन चक्र में अत्याधुनिक रडार सिस्टम (91N6E) होता है जो 600 किमी दूर तक के हवाई खतरे का पता लगा सकता है.
  • एस-400 एक मोबाइल सिस्टम है — यानी इसे ट्रक या वाहन पर ले जाकर कहीं भी तैनात किया जा सकता है.
  • सिस्टम के एक्टिवेट होने के बाद S-400 सिग्नल मिलने के 3 मिनट के भीतर फायरिंग के लिए तैयार हो जाता है.

भारत ने कब खरीदा एस-400

एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 को भारत ने रूस से खरीदा है. इसके लिए अक्टूबर 2018 में भारत ने रूस की सरकारी कंपनी Almaz-Antey से करार दिया था और कुल डील 5.43 अरब डॉलर (करीब 40,000 करोड़) रुपए की है. भारत ने डिफेंस सिस्टम की कई यूनिट की खरीद की है, जिसमें से पहली यूनिट भारत को दिसंबर 2021 में मिली थी. इस यूनिट की तैनाती पश्चिमी सेक्टर यानी पाकिस्तान सीमा के पास की गई थी.

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लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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