ऑपरेशन सिंदूर : भारत ने पाकिस्तान के साथ किया न्याय, पीओके के साथ पाकिस्तान के अंदर भी घुसकर मारा; मची तबाही

Edited by Rajneesh Anand
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ऑपरेशन सिंदूर

Operation Sindhoor : ऑपरेशन सिंदूर ने एक बार फिर साबित किया है कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक पूरा भारत एक है और हम तब एक तरीके से सोचते हैं, जब बात देशहित की आती है. पूरा देश आज अपनी सेना पर गर्व कर रहा है और पहलगाम में मारे गए निर्दोषों को न्याय मिलने की बात की जा रही है. भारत ने पाकिस्तान को एक बार फिर चेताया है कि वह आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देना बंद करे, अन्यथा इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. सेना और विदेश मंत्रालय के प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह स्पष्ट कहा गया है कि अगर पाकिस्तान ने अब और हिमाकत की तो उसे बड़े परिणाम भुगतने पड़ेंगे.

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Operation Sindoor : भारत ने पाकिस्तान के साथ न्याय किया है. 22 अप्रैल को पहलगाम में जिस तरह 26 लोगों को आतंकवादियों ने मौत के घाट उतारा उसके खिलाफ भारत ने पाकिस्तान को न्याय के कठघरे में खड़ा किया और दोषियों को सजा दी है. ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी देते हुए उक्त बातें भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी, एयरफोर्स की विंग कमांडर व्योमिका सिंह और विदेश मंत्रालय के सचिव विक्रम मिस्री ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कही. प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि भारत ने आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की है और पाकिस्तान के किसी भी सैन्य ठिकानों और आम निर्दोष नागरिक को नुकसान नहीं पहुंचाया है.

जम्मू-कश्मीर को अशांत करने की थी कोशिश

विदेश मंत्रालय की ओर से विक्रम मिस्री ने बताया कि 22 अप्रैल को आतंकवादियों ने जिस बर्बरता से 25 भारतीय और एक विदेशी नागरिक की हत्या की और जिस तरह उन्होंने आम नागरिकों से कहा कि अपनी सरकार को हमारा मैसेज देना, वह उनके दुस्साहस का प्रतीक था. वे यह चाहते थे कि जम्मू-कश्मीर में सामान्य हो रहे हालात फिर से बिगड़ जाएं. वे यहां के पर्यटन को प्रभावित करना चाहते थे, ताकि जम्मू-कश्मीर के विकास और प्रगति को रोका जा सके. पाकिस्तान और उनके द्वारा पोषित आतंकवादी यह चाहते थे कश्मीर में सांप्रदायिक माहौल बिगड़े, इसलिए उन्होंने बहुत ही बर्बर तरीके से आतंकवादी घटना को अंजाम दिया. लेकिन भारतीय नागरिकों ने उनके मंसूबे को फेल कर दिया. पहलगाम हमले के बाद से देश में आक्रोश का माहौल है.

पाकिस्तान का रवैया आतंकवादियों के खिलाफ सहानुभूतिपूर्ण

attack inside Pakistan
आतंकवादियों के ठिकाने पर हमला

लश्कर ए तैयबा के साथ काम करने वाले आतंकी संगठन टीआरएफ ने हमले की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन पाकिस्तान का रवैया उसके खिलाफ सहानुभूतिपूर्ण था. पाकिस्तान और आतंकवादियों के संबंध को प्रमाणित करने वाले कई दस्तावेज मौजूद हैं. इस बात के भी प्रमाण हैं कि पाकिस्तान में अंतराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित आतंकी छुपे रहते हैं. इसके बावजूद पाकिस्तान ने आतंकवादियों के खिलाफ कोई ऐसी कार्रवाई नहीं की जिससे यह पता चले कि वह आतंकवाद को मिटाना चाहता है. विक्रम मिस्री ने बताया कि हमारे इंटेलिजेंस को इस बात की सूचना है कि पाकिस्तान, भारत में निकट भविष्य में भी आतंकवादी हमला करवा सकता है. पहलगाम की घटना के बाद संयुक्त राष्ट्र ने एक वक्तव्य जारी किया था, जिसमें पहलगाम के दोषियों के खिलाफ न्याय करने की बात की गई थी. हमारा ऑपरेशन सिंदूर उसे न्याय के दायरे में की गई कार्रवाई है.

पहलगाम हमले में मारे गए लोगों को न्याय दिलाने के लिए किया गया ऑपरेशन सिंदूर

attack on terrorist training camp
आतंकियों के ठिकाने पर हमला

सेना की ओर से बयान जारी करते हुए कर्नल सोफिया कुरैशी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर पहलगाम हमले में मारे गए निर्दोष लोगों को न्याय दिलाने के लिए आयोजित किया गया था. भारतीय सशस्त्र सेना ने 6-7 मई की रात को 1:05 से 1:30 मिनट तक पीओके और पाकिस्तान में आतंकवादियों के नौ ठिकानों पर हमला किया और उन्हें ध्वस्त कर दिया. कर्नल सोफिया कुरैशी ने कहा कि पिछले तीन दशक से पाकिस्तान आतंकवादियों को ट्रेनिंग दे रहा है, इसके लिए पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान की धरती का इस्तेमाल किया जाता है. हमने ऐसे नौ ठिकानों को टारगेट किया और उसे पूरी तरह बर्बाद कर दिया. पहला हमला सवाई नाला में किया गया, जो मुजफराबाद में है और एलओसी से इसकी दूरी 30 किलोमीट है. यह लश्कर ए तैयबा का ट्रेनिंग कैंप था. उसके बाद जैश ए मोहम्मद के ट्रेनिंग कैंप पर हमला किया गया. विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने बताया कि पीओके के अलावा भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान के अंदर भी आंतकी ठिकानों को ध्वस्त किया. पाकिस्तान के अंदर स्यालकोट में दो ठिकानों पर हमला किया गया, जिसमें महमूना जोया और मरकस तैयबा मुरीके शामिल है. इन कैंपों में मुंबई हमले के दोषी कसाब को ट्रेनिंग दी गई थी. पाकिस्तान में मरकज सुभानअल्लाह में स्थित आतंकवादी कैंप को भी ध्वस्त किया गया है.

पूरा देश एक सुर में कर रहा कार्रवाई की प्रशंसा

पहलगाम हमले के बाद भारतीय सशस्त्र सेना ने जिस तरह ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया है, पूरा देश उनके साथ खड़ा है. जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इसकी शुरुआत पाकिस्तान की ओर से हुई है. हम तो शांति से रह रहे थे. लेकिन पहलगाम में पाकिस्तान ने आतंकवादी कार्रवाई को अंजाम दिया और 26 लोगों की हत्या करवाई. इसका जवाब दिया जाना था और सही जवाब दिया गया है. हम युद्ध नहीं शांति चाहते हैं, लेकिन इसके लिए पाकिस्तान को अपनी बंदूकें कम करनी होगी. उन्होंने कहा कि किसी को भी घबराने की जरूरत नहीं है. जम्मू-कश्मीर में किसी भी जरूरत के सामान की कमी नहीं है. सबकुछ उपलब्ध है. स्कूलें खुली हैं, हां हवाईअड्डों को बंद किया गया है. गृहमंत्री ने उमर अब्दुल्ला से अभी कुछ देर पहले बात की है. कांग्रेस की ओर से प्रियांक खरगे ने कहा कि हम पूरी तरह ऑपरेशन सिंदूर के पक्ष में हैं, क्योंकि हमारा देश आतंकवाद के खिलाफ जीरो टाॅलरेंस की नीति पर काम करता है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी ऑपरेशन सिंदूर के पक्ष में एक्स पर पोस्ट लिखा है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ऑपरेशन सिंदूर को आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई बताया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने भारतीय सेना की प्रशंसा करते हुए लिखा है कि उन्हें अपने देश की सेना पर गर्व है. जय हिंद.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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