फॉरेन फंडिंग लेने वाले एनजीओ और चैरिटेबल ऑर्गनाइजेशंस के लिए FCRA अमेंडमेंट बिल को लेकर बहस तेज है. विवाद सिर्फ इस बात पर नहीं है कि कोई एनजीओ आगे फॉरेन फंडिंग ले पाएगा या नहीं, जबकि सवाल यह है कि अगर किसी एनजीओ का FCRA सर्टिफिकेट खत्म या कैंसिल हो जाता है, तो उस एनजीओ ने फॉरेन फंड से जो स्कूल, अस्पताल या दूसरे एसेट्स बनाए हैं, उनका क्या होगा? इन सवालों के बीच प्रस्तावित विधेयक में Section 14B, Section 16A और Section 16B में बदलावों को लेकर भी चर्चा हो रही है.पहले समझिए FCRA क्या है?FCRA यानी Foreign Contribution Regulation Act, आसान भाषा में कहें तो यह वह कानून है, जिसके तहत भारत में एनजीओ, चैरिटेबल ऑर्गनाइजेशंस और दूसरी योग्य संस्थाएं विदेश से मिलने वाले पैसे यानी फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन को हासिल और इस्तेमाल करती हैं.मामला सिर्फ फंड मिलने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह भी देखा जाता है कि जिस संगठन को फॉरेन फंड मिला है, वह उसका इस्तेमाल किस तरह कर रहा है और उसके पास इसे लेने की वैध अनुमति यानी FCRA सर्टिफिकेट या रजिस्ट्रेशन है या नहीं.इसके साथ ही, संगठन फॉरेन फंड का इस्तेमाल उन्हीं गतिविधियों के लिए कर सकता है, जिनके लिए उसे अनुमति मिली है. मसलन, अगर फंड शिक्षा, स्वास्थ्य या सामाजिक कार्यों के लिए मिला है, तो उसका इस्तेमाल उसी उद्देश्य के अनुरूप होना चाहिए.यही वजह है कि FCRA सर्टिफिकेट या रजिस्ट्रेशन इस पूरे मामले में बेहद अहम है. क्योंकि अगर किसी संगठन का यह सर्टिफिकेट खत्म या कैंसिल हो जाता है, तो सवाल सिर्फ उसकी आगे की फॉरेन फंडिंग का नहीं रहता, बल्कि पहले मिले फॉरेन फंड से बनाए गए एसेट्स और संस्थानों को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं.मसलन, किसी एनजीओ ने फॉरेन फंड से कोई स्कूल या अस्पताल बनाया और कुछ साल बाद उसका FCRA सर्टिफिकेट खत्म हो गया. ऐसे में सवाल उठता है कि उस पुराने स्कूल या अस्पताल पर आगे किसका अधिकार या नियंत्रण होगा?यही सवाल प्रस्तावित Section 14B, 16A और 16B को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है.ये भी पढ़ें : रेप के बाद कैसा होना चाहिए पीड़िता का व्यवहार? जानें परफेक्ट विक्टिम को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने क्या कहाSection 14B क्या है? मान लीजिए किसी एनजीओ के पास FCRA registration है. इसी registration के आधार पर वो फॉरेन फंड ले सकता है. लेकिन कुछ समय बाद उस एनजीओ के FCRA सर्टिफिकेट की अवधि खत्म हो जाती है और वह समय पर इसका रिन्यूअल नहीं करा पाता.यहीं Section 14B महत्वपूर्ण हो जाता है.Section 14B यह बताता है कि अगर FCRA सर्टिफिकेट की अवधि खत्म हो गई, उसका रिन्यूअल नहीं हुआ, या रिन्यूअल की अर्जी मंजूर नहीं हुई, तो ऐसी स्थिति में सर्टिफिकेट cease यानी समाप्त माना जाएगा.इसे अब दूसरे उदाहरण से समझते हैं.मान लीजिए एक एनजीओ को FCRA के तहत फॉरेन फंड मिला और उसने उस पैसे से एक स्कूल की बिल्डिंग बनाई. कुछ साल बाद एनजीओ का FCRA सर्टिफिकेट एक्सपायर हो गया और उसका रिन्यूअल नहीं हो पाया.अब यहां दो सवाल है पहला क्या सर्टिफिकेट खत्म होने के बाद एनजीओ आगे फॉरेन फंड ले सकता हैऔर दूसराजो स्कूल की बिल्डिंग पहले मिले फॉरेन फंड से बनाई जा चुकी है, उसका अब क्या होगा?यहीं से FCRA Amendment Bill में एसेट्स से जुड़ी अगली व्यवस्था महत्वपूर्ण हो जाती है.यानी Section 14B यह बताता है कि किन परिस्थितियों में FCRA सर्टिफिकेट समाप्त माना जाएगा. Section 16A क्या है? मान लीजिए किसी एनजीओ ने फॉरेन फंड से एक स्कूल बनाया. बाद में उसका FCRA registration खत्म हो गया,अब सवाल है, उस स्कूल का क्या होगा?प्रस्तावित Section 16A के मुताबिक, ऐसी स्थिति में फॉरेन फंड से मिली रकम और उससे बनाई गई एसेट्स एक तय सरकारी अधिकारी यानी Designated Authority के control में जा सकती हैं. जिसको लेकर सरकार का कहना है कि यह control temporary होगा.यानी अगर एनजीओ बाद में फिर से FCRA registration हासिल कर लेता है, तो उसकी एसेट्स उसे वापस मिल सकती हैं. लेकिन अगर तय समय में उसे दोबारा registration नहीं मिलता, तो उसकी एसेट्स हमेशा के लिए Designated Authority के पास जा सकती हैं.इसके बाद सरकार इन एसेट्स को किसी सरकारी department, agency या किसी दूसरी संस्था को भी transfer कर सकती है. Section 16B क्या है?अब आते हैं Section 16B पर.इसे समझने के लिए उसी स्कूल वाले उदाहरण पर वापस आते हैं.मान लीजिए...2020 में एनजीओ को फॉरेन फंड मिला2021 में उस पैसे से स्कूल बनाया गया2026 में एनजीओ का FCRA सर्टिफिकेट खत्म हो गयाअब सवाल हैक्या 2026 में सर्टिफिकेट खत्म होने के बाद ऐसे नियम लागू हो सकते हैं, जो 2021 में स्कूल बनाते समय लागू हुए थे. यही है रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट को लेकर चिंता.रेट्रोस्पेक्टिव का मतलब हुआ कि आज का कोई नया कानूनी प्रावधान अतीत में किए गए किसी काम या पहले से मौजूद एसेट को प्रभावित करें.यानी विपक्ष और कुछ माइनॉरिटी ऑर्गनाइजेशंस की चिंता यह है कि अगर किसी एनजीओ ने कई साल पहले फॉरेन फंड से स्कूल, अस्पताल या दूसरी संपत्ति बनाई थी, तो बाद में FCRA सर्टिफिकेट खत्म होने पर क्या नए प्रावधानों का असर उन पुराने एसेट्स पर भी पड़ सकता है?ये भी पढ़ें : सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने के लिए सरकार ने कानून में संसोधन किया, लेकिन मनी बिल पर क्यों हो रहा विवादकौन-कौन कर रहा विरोध FCRA Amendment Bill को लेकर विरोध की आवाजें सिर्फ विपक्षी दलों तक सीमित नहीं हैं. कुछ चर्च संगठनों और सिविल सोसाइटी ग्रुप्स ने भी प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर चिंता जताई है.विपक्ष का मुख्य सवाल यह है कि अगर किसी एनजीओ का FCRA सर्टिफिकेट खत्म हो जाता है, तो उसके फॉरेन फंड से पहले बनाए गए स्कूल, अस्पताल और दूसरी संपत्तियों पर सरकार की भूमिका कितनी होगी. विपक्ष को आशंका है कि अगर कानून में पर्याप्त स्पष्टता नहीं हुई, तो इन प्रावधानों का इस्तेमाल भविष्य में विवादित तरीके से किया जा सकता है.ईसाई संगठनों की चिंता खास तौर पर उन संस्थानों को लेकर है, जो वर्षों पहले विदेशी सहायता से बनाए गए थे.उनका सवाल है कि अगर आज किसी संस्था का FCRA सर्टिफिकेट खत्म हो जाता है, तो क्या दशकों पहले बनाए गए चर्च, स्कूल या अस्पताल भी नए नियमों के असर में आ जाएंगे?दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि इन प्रावधानों का मकसद किसी संस्था की संपत्ति को जब्त करना नहीं है. सरकार के मुताबिक, FCRA सर्टिफिकेट में किसी तरह की समस्या आने पर फॉरेन फंड से जुड़े संस्थानों और संपत्तियों के लिए एक तय कानूनी व्यवस्था जरूरी है.यानी विवाद की असली वजह यही है कि सर्टिफिकेट खत्म होने के बाद पुराने एसेट्स की कानूनी स्थिति क्या होगी और उन पर किसका नियंत्रण रहेगा.अब आगे क्या?अब नजर इस बात पर है कि सरकार प्रस्तावित प्रावधानों में कोई बदलाव करती है या नहीं. खास तौर पर रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट को लेकर उठ रही आपत्तियों पर सरकार की ओर से क्या स्पष्टता दी जाती है, यह महत्वपूर्ण होगा.अगर सरकार विवादित प्रावधानों में बदलाव करती है या उनकी भाषा को और स्पष्ट करती है, तो विपक्ष और प्रभावित संगठनों की कुछ चिंताएं कम हो सकती हैं. लेकिन अगर विधेयक इसी तरह आगे बढ़ता है, तो संसद में इसके प्रावधानों को लेकर बहस और तेज होने की संभावना है.आखिरकार, इस पूरे मामले का केंद्र सिर्फ यह नहीं है कि कोई एनजीओ विदेशी फंड ले पाएगा या नहीं. बड़ा सवाल यह है कि विदेशी फंड से पहले बनाई गई संपत्ति का क्या होगा, अगर उस संगठन का FCRA सर्टिफिकेट बाद में खत्म हो जाए?पढ़िए देश दुनिया और बिहार झारखंड की ओरिजिनल खबर