50 साल, 3 दुश्मन और शून्य पर सिमटा ‘हाथ’, पढ़ें बंगाल में कांग्रेस के वनवास की पूरी कहानी

West Bengal Congress 50 Years Exile: पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के 50 सालों के पतन की पूरी कहानी. जानें कैसे ज्योति बसु ने कांग्रेस से सत्ता छीनी, ममता बनर्जी ने उसका जनाधार बांटा और भाजपा ने अस्तित्व पर ही संकट खड़ा कर दिया. बंगाल चुनाव 2026 से पहले कांग्रेस का विस्तृत राजनीतिक विश्लेषण यहां पढ़ें.
West Bengal Congress 50 Years Exile: कभी पश्चिम बंगाल की सत्ता पर एकछत्र राज करने वाली कांग्रेस आज अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है. डॉ विधान चंद्र रॉय, प्रफुल्ल चंद्र घोष और अजय मुखर्जी जैसे दिग्गज कांग्रेसियों की धरती आज कांग्रेस के लिए ‘बंजर’ हो चुकी है. 1977 में सत्ता गंवाने के बाद से शुरू हुआ कांग्रेस का ‘वनवास’ 2026 के चुनाव तक एक ऐसी त्रासदी बन चुका है, जहां पार्टी के पास न तो विधानसभा में कोई प्रतिनिधि है, न संगठन में पुरानी धार बची. आइए, समझते हैं कि कैसे तीन अलग-अलग दौर और तीन अलग-अलग ताकतों ने बंगाल में कांग्रेस की जड़ों को खोद दिया. कैसे घर के चिराग से ही घर को आग लग गयी.
1. ज्योति बसु का दौर : वामपंथ ने छीनी कांग्रेस की जमीन
वर्ष 1977 बंगाल की राजनीति के लिए ‘वाटरशेड मोमेंट’ था. आपातकाल के बाद हुए चुनावों में ज्योति बसु के नेतृत्व में वाम मोर्चा (Left Front) ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल कर दिया. अगले 34 सालों तक वामपंथ ने ग्रामीण बंगाल में ‘भूमि सुधार’ और ‘पंचायती राज’ के जरिये ऐसी किलेबंदी की कि कांग्रेस सिर्फ शहरी इलाकों और उत्तर बंगाल के कुछ जिलों (मालदा, मुर्शिदाबाद) तक सिमट कर रह गयी.
2. ममता बनर्जी का राज : घर को लगी आग घर के चिराग से
कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका वर्ष 1998 में लगा, जब ममता बनर्जी ने अपनी उपेक्षा से नाराज होकर ‘तृणमूल कांग्रेस’ (TMC) बना ली. टीएमसी ने कांग्रेस का वो जुझारू चेहरा छीन लिया, जो वामपंथ से सीधे टकरा सकता था. देखते ही देखते, कांग्रेस के कद्दावर नेता और जनाधार ममता बनर्जी के साथ चले गये. वर्ष 2011 में जब वामपंथ का किला ढहा, तो उसका श्रेय कांग्रेस को नहीं, ममता को मिला. कांग्रेस उनके जूनियर पार्टनर की भूमिका में आ गयी.
बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
3. भाजपा की एंट्री ने पूरी कर दी रही-सही कसर
वर्ष 2014 के बाद बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ‘तीसरी ताकत’ के रूप में उभरी. भाजपा ने कांग्रेस के उस पारंपरिक हिंदू वोट बैंक और एंटी-इनकम्बेंसी (सत्ता विरोधी लहर) वाले स्पेस पर कब्जा कर लिया, जो कभी कांग्रेस का हुआ करता था. वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में तो उसने इतिहास ही रच दिया. आजादी के बाद पहली बार बंगाल में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला. भाजपा ने मुख्य विपक्षी दल बनकर कांग्रेस को हाशिये के भी पार धकेल दिया.
इसे भी पढ़ें : भवानीपुर का महासंग्राम : आज आयेंगे अमित शाह, कल शुभेंदु भरेंगे हुंकार, 8 अप्रैल को ममता बनर्जी का शक्ति प्रदर्शन
मौजूदा संकट और गठबंधन की उलझन
आज कांग्रेस बंगाल में एक अजीब दोराहे पर है. दिल्ली में वह ममता बनर्जी के साथ I-N-D-I-A गठबंधन का हिस्सा है, लेकिन बंगाल में उसे अस्तित्व बचाने के लिए टीएमसी के खिलाफ लड़ना पड़ता है. वामपंथियों के साथ उसका गठबंधन भी अब तक कोई बड़ा चमत्कार नहीं कर पाया है. इस बार कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है. ऐसे में सवाल है कि वामदलों और आईएसएफ के साथ गठबंधन में जब कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत पायी, तो इस बार क्या होगा?
इसे भी पढ़ें : बंगाल चुनाव 2026: कल्याणकारी योजनाएं बनाम सत्ता-विरोधी लहर, ममता बनर्जी के 15 साल के शासन की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा
कांग्रेस के लिए क्या बचा है रास्ता?
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि बंगाल में कांग्रेस अब केवल ‘साइनबोर्ड’ पार्टी बनकर रह गयी है. जब तक पार्टी के पास कोई सशक्त स्थानीय चेहरा और स्पष्ट विचारधारा नहीं होगी, तब तक मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे गढ़ों को बचाना भी मुश्किल होगा. वर्ष 2026 का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति है.
इसे भी पढ़ें
बंगाल चुनाव से पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जोश डाउन, सभी 294 सीटों पर लड़ेंगे चुनाव : जीए मीर
कांग्रेस ने उतारे 284 प्रत्याशी : बहरमपुर से अधीर रंजन, जानें भवानीपुर से ममता बनर्जी के खिलाफ कौन?
बंगाल चुनाव 2026 से पहले ममता बनर्जी की आयोग को चेतावनी, CEC से पूछा- ये कैसा लोकतंत्र?
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




