तंत्र वही, अधिकारी भी वही, जानें कैसे लगा इसीएल में सालाना 550 करोड़ रुपये की लूट पर अंकुश
Published by : Ashish Jha Updated At : 16 May 2026 2:48 PM
ईसीएल के खदान
ECL Mines: कोयला चोरी को लेकर भाजपा नेता अपने भाषणों में राज्य पुलिस को जिम्मेदार बताते थे, तो तृणमूल ने नेता अपने भाषणों में केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को जिम्मेदार बताते थे. आरोप प्रत्यारोप में कोयला चोरी पर कभी अंकुश नहीं लगा. सरकार बदलते ही दिख गया बड़ा बदलाव.
मुख्य बातें
शिवशंकर ठाकुर
ECL Mines: आसनसोल. पश्चिम बंगाल में डबल इंजन की सरकार बनते ही शिल्पांचल में वह नजारा देखने को मिला, जिसकी किसी ने कल्पना तक नहीं की थी. इसीएल के ओपन कास्ट प्रोजेक्ट (ओसीपी) कोयला खदानों में घुसपैठियों (कोयला चोरों) की संख्या शून्य हो गयी है. जबकि नौ मई तक इसीएल के सभी ओसीपी में सात से आठ सौ लोग प्रतिदिन दाखिल होते थे और औसतन एक व्यक्ति चार से छह खेप में तीन क्विंटल तक कोयला उठाकर ले जाते थे. नौ मई को शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री पद का शपथ ग्रहण करने के बाद पूरा नजारा ही बदल गया. कोयला खदानों में एक भी कोयला चोर नहीं दिख रहा है. जिससे इसीएल को प्रतिदिन डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त लाभ हो रहा है. इसीएल के अधिकारी इसे लेकर काफी उत्साहित हैं. कलकत्ता उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि सरकार यदि चाह ले, तो नामुमकिन कुछ भी नहीं है. पुलिस एक तंत्र है, जो सरकार के दिशानिर्देशों के आधार कार्य करती है.
सीएमडी ने डीजीपी से की थी लिखित शिकायत
इसीएल के सीएमडी सतीश झा ने पिछली सरकार में राज्य के डीजीपी राजीव कुमार को पत्र लिखकर इसीएल के कोयला खदानों में कोयले की हो रही लूट का जिक्र करते हुए सुरक्षा एनफोर्समेंट के तरीकों को मजबूत करने की अपील की थी. उन्होंने लिखा कि इसीएल के लिजहोल्ड एरिया में कोयला चोरी और अवैध खनन की घटनाएं लगातार हो रही है. बड़े समूह में महिलाएं और बच्चे कोयला निकालने के लिए खदान में में अवैध तरीके से प्रवेश करते हैं. जिससे कंपनी को कोयला खनन करने में भारी रुकावट आती है, खनन में रुकावट और खनन किया हुआ कोयले को ले जाने से इसीएल को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. ऐसी गतिविधियों से खदान में दुर्घटना का भी खतरा हर वक्त बना रहता है. ड्यूटी के दौरान कोयला चोरी रोकने पर सुरक्षा कर्मियों पर जानलेवा हमला हुआ है. यह घटना सुरक्षा बलों के मनोबल को तोड़ती है और असरदार कार्रवाई पर बुरा असर डालती है. इसके बावजूद भी कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई.
3 महीने में 822 रेड और 4513 टन अवैध कोयला जब्त
डीजीपी को लिखे पत्र में सीएमडी ने बताया था कि सितंबर से नवम्बर 2025 तक तीन माह में कुल 822 छापेमारियां हुई, जिसमें 4513.10 टन अवैध कोयला और 29 वाहनों को जब्त किया गया तथा एडीपीसी के विभिन्न थानों में 242 प्राथमिकी दर्ज हुई. 84 अवैध कोयला खनन के क्षेत्रों की भराई हुई. सीएमडी द्वारा दिये गये इन आंकड़ों से यह साफ है कि किस स्तर पर कोयले की चोरी होती थी.
प्रतिदिन होती थी 5000 टन कोयले की लूट
इसीएल में कुल 77 कोयला खदानें हैं. जिसमें 48 भूमिगत, 23 ओसीपी और छह मिक्स (भूमिगत और ओसीपी दोनों) खदानें हैं. ओसीपी में ही घुसपैठ होती है. कंपनी के बंगाल इलाके में कुल 24 ओसीपी हैं. इसीएल में सुरक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी ओसीपी में प्रतिदिन सात से आठ सौ लोग अवैध प्रवेश करके कोयला ले जाते थे और एक व्यक्ति चार से छह खेप में न्यूतम 300 टन तक कोयला ले जाता था. इस आधार पर किये गये आकलन के अनुसार एक ओसीपी से प्रतिदिन औसतन 700 लोग× 300 किलो कोयला= 210 टन कोयला निकलता था. 24 ओसीपी × 210 टन कोयला = 5040 टन कोयला प्रतिदिन निकलता है. इसका बाजार मूल्य डेढ़ करोड़ रुपये है, यानी सालाना करीब 550 करोड़ रुपये का कोयला सिर्फ इसीएल के ओसीपी से चोरी होता था, जिसका खामियाजा राज्य और केंद्र सरकार दोनों को ही उठाना पड़ता था. जो फिलहाल बंद हो गया.
कोयला खरीदनेवाले हो गये गायब
किसी भी कोलियरी इलाके में भोर के समय मेला लगता था, लोग खदान से कोयला ला रहे है और खरीदने वाले बाइक और साइकिल पर लाइन लगाकर खड़े रहते थे. पैसा देकर कोयला लेकर निकल जाते थे. जो जितना खेप कोयला ढो लेगा, उसे उतनी अधिक कमाई होगी. तीन से चार घंटे में हर कोई औसतन छह-सात सौ रुपये कमा लेता था. असली कमाई कोयला संग्रह करके बाहर भेजने वालों को होती थी. शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद का शपथ लेते ही. पूरे धंधे पर ब्रेक लग गया. कुछ तो गायब हो गये. न लाठी भांजी गयी, न किसी को गिरफ्तार किया गया. सरकार का नजरिया बदलते ही सबकुछ बदल गया.
नहीं हुई कोई कार्रवाई
एक माह पहले इसीएल सुरक्षा विभाग की ओर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी को लिखित शिकायत की गयी थी. जिसमें कोल सिंडिकेट के सदस्यों धर्मेंद्र सिंह उर्फ पप्पू सिंह, शेख नईम, पंकज सिंह, रतन राय, शेख सद्दाम, लोकेश सिंह, रणधीर सिंह, समसेर हुसैन, कृष्ण मुरारी कयाल, विजय सिंह, युधिष्ठिर, ओम अग्रवाल, रोशन, मनीष, राकेश तिवारी, जयदेव खां, मैजूल, जावेद का नाम और पता देते हुए इनपर दादागिरी टैक्स वसूलने का आरोप लगाया गया था. ई-ऑक्शन में कोयला खरीदने वाले विभिन्न संस्थाओं ने इनके खिलाफ इसीएल प्रबंधन को शिकायत की थी, जिसके आधार पर इसीएल ने पुलिस में शिकायत की. इसपर कुछ एक्शन नहीं हुआ. सरकार बदलते ही सिंडिकेट के 14 लोग अरेस्ट हो गए.
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क्या कहते हैं सीएम डी
इसीएल के अध्यक्ष सह प्रबंधक निदेशक (सीएमडी) सतीश झा ने कहा-पिछले कुछ दिनों से खदानों में घुसपैठ पर पूर्णरूप से अंकुश लग गया है. जिससे खदानों में कोयला चोरी एकदम बंद हो गयी है. हर खदान में ही सात-आठ सौ लोग प्रवेश करते थे, जिन्हें रोकना कठिन था. करोड़ो रूपये की कोयले की लूट होती थी. इसे लेकर पूर्व डीजीपी को पत्र लिखा गया था. यह एक अच्छा संकेत है कि सरकार बदलने पर अंकुश लग गया. पुलिस की भूमिका भी सराहनीय है. इससे केंद्र और राज्य सरकार दोनों को भारी लाभ होगा, जिसका फायदा प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से देश और राज्य की जनता को मिलेगा. सरकार ने अवैध कारोबार पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनायी है. जिसका नजारा दो दिनों में ही दिखने लगा है. तंत्र वही, अधिकारी भी वही, सरकार के नजरिये ने पूरा माहौल बदल दिया.
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By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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