खूंटी में शिशु गृहों से बदली तस्वीर: कामकाजी महिलाओं की चिंता दूर, बच्चों के विकास को मिली नई उड़ान
Published by : Sameer Oraon Updated At : 15 May 2026 8:11 PM
खूंटी में संचालित हो रहे शिशु गृह
Khunti News: खूंटी के मुरहू प्रखंड में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन और मोबाइल क्रेच के सहयोग से संचालित शिशु गृह 7 माह से 3 साल तक के बच्चों के लिए वरदान बन गए हैं. यहां बच्चों को पौष्टिक आहार के साथ सुरक्षित माहौल मिल रहा है, जिससे कामकाजी माताओं को बड़ी राहत मिली है.
Khunti News, खूंटी (प्रवीण मुंडा की रिपोर्ट): खूंटी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए संचालित ‘शिशु गृह’ (Creche) एक वरदान साबित हो रहे है. विशेष रूप से 7 माह से 3 साल तक के बच्चों के लिए बनाए गए ये केंद्र न केवल उन्हें सुरक्षित और अच्छा वातावरण प्रदान कर रहे हैं, बल्कि उनके शारीरिक और मानसिक विकास में भी मील का पत्थर साबित हो रहे हैं.
अजीम प्रेमजी फाउंडेशन और मोबाइल क्रेच की पहल
मुरहू प्रखंड के 40 गांवों में दो साल पहले शुरू हुए इन शिशु गृहों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. हाल ही में दिसंबर में जिउरी में एक नया केंद्र खोला गया है. इन केंद्रों का संचालन अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की सहायता से मोबाइल क्रेच के तत्वावधान में किया जा रहा है.
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कामकाजी माताओं के लिए बड़ी राहत
शिशु गृहों के संचालन से ग्रामीण क्षेत्रों की कामकाजी महिलाओं, विशेषकर खेतों में काम करने वाली और मजदूरी करने वाली माताओं को बड़ी सहूलियत हुई है. वे अपने बच्चों को गांव के ही शिशु गृह में छोड़कर काम पर जा सकती हैं. जिउरी ग्रामसभा के अध्यक्ष बिनसाय मुंडा के अनुसार, ये केंद्र बच्चों को सांप काटने या पानी में डूबने जैसी दुर्घटनाओं से बचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. साथ ही यहां बच्चों को बैठने, खाना खाने के तरीके और स्वच्छता की अच्छी आदतें सिखायी जाती हैं.
पौष्टिक आहार और नियमित मॉनिटरिंग
केंद्र में बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए आहार का एक विशेष मेन्यू तैयार किया गया है, जिसमें पोहा, सत्तू, सूजी, चावल-दाल, मौसमी सब्जियां और अंडे शामिल हैं. इसके अलावा बच्चों के शारीरिक विकास (ग्रोथ) की नियमित मॉनिटरिंग की जाती है. सुपरवाइजर राजकिशोर के अनुसार कुदा, कुड़ापूर्ति, बालंगा और सैको सहित कई गांवों में इन केंद्रों से बच्चों के विकास में बड़ी मदद मिली है.
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