Video : क्या हुआ था प्रतीक यादव को? डॉक्टर ने किया खुलासा

अखिलेश यादव प्रतीक यादव के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन करते (Photo: PTI)
Video : मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव की मौत कैसे हुई? नीचे वीडियो में देखें डॉक्टर ने प्रतीक की सेहत को लेकर क्या-क्या बताया.
Video : सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सौतेले भाई प्रतीक की मौत के बाद तरह-तरह की बातें फैल रही हैं. सोशल मीडिया पर लोग अलग-अलग थ्योरी बना रहे हैं, खासकर स्टेरॉयड को लेकर, क्योंकि वो जिम करते थे और काफी फिट दिखते थे. लेकिन सच्चाई इन अफवाहों से कहीं ज्यादा अलग और दुखद है. मामला उतना सीधा नहीं है जितना लोग समझ रहे हैं, असल कहानी काफी जटिल है.
प्रतीक यादव का इलाज कर रही डॉक्टर ने पूरी जानकारी दी है जो उनका इलाज कुछ सालों से कर रहीं थीं. डॉक्टर ने बताया कि उन्हें Deep Vein Thrombosis (DVT) की समस्या थी. यह एक ऐसी समस्या है जिसमें शरीर की गहरी नसों में खून के थक्के बन जाते हैं. आमतौर पर इसे दवाइयों से कंट्रोल किया जा सकता है. लेकिन अगर यही थक्का टूटकर खून के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाए, तो Pulmonary Embolism हो जाता है, जो काफी खतरनाक है. ऐसे मामलों में हर मिनट बहुत अहम होता है. DVT वाले मरीजों को ब्लड थिनर दी जाती है और उन्हें लंबे समय तक डॉक्टर की निगरानी में रखा जाता है. डॉक्टर ने कहा कि अभी उनको क्या हुआ ये कह नहीं सकते हैं.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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