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SIR का काम करने बंगाल जायेंगे झारखंड और ओडिशा के न्यायिक अधिकारी, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Updated at : 24 Feb 2026 12:38 PM (IST)
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SIR का काम करने बंगाल जायेंगे झारखंड और ओडिशा के न्यायिक अधिकारी, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

बंगाल में अभी 80 ​​लाख शिकायतों की जांच की जानी है. जिला न्यायाधीश और अतिरिक्त जिला न्यायाधीश रैंक के 250 न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है. शेष काम के लिए दूसरे राज्यों से न्यायिक अधिकारी को बुलाया जा रहा है.

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कोलकाता. बंगाल में SIR के लिए दस्तावेजों के सत्यापन का काम अब झारखंड और ओडिशा के न्यायिक अधिकारी भी करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने समय पर इस काम को पूरा करने के लिए बंगाल के दो पड़ोसी राज्यों से न्यायिक अधिकारियों की नियुक्त करने को कहा है. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति जे. विपुल पंचोली की पीठ ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया है.

आयोग को देनी होगी ये जानकारी

मुख्य न्यायाधीश ने आगे कहा कि यदि आवश्यक हो, तो कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश झारखंड और ओडिशा उच्च न्यायालयों से संपर्क कर सेवानिवृत्त या सेवारत न्यायाधीशों से अनुरोध कर सकते हैं. उस स्थिति में, आयोग को उनके यात्रा खर्च और आवास की व्यवस्था करनी होगी. सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि काम करने वालों की सुविधा के लिए एसआईआर नियमों की जानकारी दी जानी चाहिए. कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कनिष्ठ और वरिष्ठ सिविल न्यायाधीशों के पद पर ऐसे अधिकारियों की नियुक्ति कर सकते हैं जिनके पास कम से कम तीन वर्ष का कार्य अनुभव हो.

बांग्ला भाषी को प्राथमिकता

बंगाल में SIR का काम समय से पूरा करने के उद्देश्य से मुख्य न्यायाधीश ने ओडिशा और झारखंड से न्यायिक अधिकारियों को तत्काल नियुक्त कर बंगाल भेजने को कहा है. मुख्य न्यायाधीश के आदेश के बाद राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि अन्य राज्यों के न्यायाधीश बंगाली नहीं समझेंगे. तब मुख्य न्यायाधीश ने कहा-ओडिशा और झारखंड के लोग भाषा समझते हैं. एक समय था जब पूरा क्षेत्र बंगाल का हिस्सा था. यहां के बांग्लाभाषी को इसमें प्राथमिकता दी जा सकती है.

कलकत्ता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस करेंगे अंतिम फैसला

मुख्य न्यायाधीश ने कहा- हमें कलकत्ता उच्च न्यायालय से स्थिति रिपोर्ट प्राप्त हुई है. 80 ​​लाख शिकायतों की जांच की जानी है. जिला न्यायाधीश और अतिरिक्त जिला न्यायाधीश रैंक के 250 न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है. ऐसे में, यदि कोई न्यायिक अधिकारी प्रतिदिन 250 शिकायतों का भी निपटारा कर दे, तो भी पूरी प्रक्रिया को पूरा करने में अस्सी दिन लगेंगे. मुख्य न्यायाधीश ने तीन वर्ष के अनुभव वाले सिविल न्यायाधीशों की नियुक्ति की भी अनुमति दी है. इस पर कल्याण बनर्जी ने कहा- एनडीपीएस और पॉक्सो मामलों की अदालतों में न्यायाधीशों का इस्तेमाल किया जा रहा है. उनके इस तर्क पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा- कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ही तय करेंगे कि किसे नियुक्त किया जाएगा, यह उनका मामला है.

इन दस्तावेजों की होगी जांच

सर्वोच्च न्यायालय के आदेशानुसार, आधार कार्ड और एडमिट कार्ड मान्य दस्तावेज होंगे. ये दस्तावेज 14 फरवरी तक ‘कट-ऑफ तिथि’ के अनुसार स्वीकार किए जाएंगे. ईआरओ और एयरो प्रभारी न्यायिक अधिकारी को दस्तावेजों की जानकारी और स्वीकार्यता के बारे में स्पष्टीकरण देने के लिए जिम्मेदार होंगे. न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने कहा- किन मतदाताओं ने सूची में शामिल होने के लिए आगे आए, यह हमारी चिंता का विषय नहीं है. हमारी चिंता प्रक्रिया की पारदर्शिता है. मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि अंतिम मतदाता सूची 28 तारीख को घोषित की जाएगी. आयोग शेष पूरक सूचियों को नियमित रूप से प्रकाशित करता रहेगा. पूरक सूची में शामिल मतदाताओं को अंतिम मतदाता सूची में मतदाता के रूप में पहचाना जाएगा.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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