बजट सत्र से पहले तृणमूल को बड़ा झटका, सर्वदलीय बैठक में शोभनदेव को नहीं बुलाया, रीतब्रत को मिला न्योता
शोभनदेव चट्टोपाध्याय और रीतब्रत बनर्जी.
Bengal Assembly Budget Session: बंगाल विधानसभा के बजट सत्र से पहले ममता बनर्जी गुट को बड़ा झटका लगा है. सर्वदलीय बैठक में टीएमसी के आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय को दरकिनार कर 65 विधायकों के समर्थन वाले बागी नेता रीतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में न्योता दिया गया. जानिए, सदन के भीतर बदले समीकरण की पूरी इनसाइड स्टोरी.
Bengal Assembly Budget Session: पश्चिम बंगाल विधानसभा के बजट सत्र से पहले बुलायी गयी सर्वदलीय बैठक में ममता बनर्जी के वफादार विधायकों को नहीं बुलाया गया. विपक्ष के नेता रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के सदस्यों को निमंत्रण मिला. यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल के तौर पर उभरने के बावजूद तृणमूल कांग्रेस अभूतपूर्व आंतरिक बगावत से जूझ रही है. इसकी वजह से विधानसभा के भीतर सत्ता का संतुलन बदल गया है.
18 जून से शुरू हो रहा है बंगाल का बजट सत्र
बंगाल विधानसभा का बजट सत्र 18 जून से शुरू होने वाला है. इससे पहले, विपक्ष में नेतृत्व को लेकर चल रही खींचतान के बीच विधानसभा की सर्वदलीय एवं कार्य मंत्रणा समिति की बैठकें और भी अहम हो गयीं हैं. विधानसभा सूत्रों के मुताबिक, तृणमूल के वरिष्ठ विधायक एवं विपक्ष के नेता के तौर पर पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय को बैठक में नहीं बुलाया गया था. बेलेघाटा के विधायक कुणाल घोष का नाम भी आमंत्रित लोगों की सूची में नहीं था.
टीएमसी से निकाले गये रीतब्रत को मिला निमंत्रण
पार्टी से निकाले गये तृणमूल विधायक रीतब्रत बनर्जी के गुट को निमंत्रण भेजा गया. हाल में विधानसभाध्यक्ष रथींद्र नाथ बसु ने उन्हें विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता दी थी, क्योंकि बागी तृणमूल विधायकों के बहुमत ने बनर्जी के दावे का समर्थन किया था. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इस कदम से संकेत मिलता है कि विधानसभा ने सदन के भीतर उभरती हुई संख्या-संबंधी वास्तविकताओं को मान्यता देना शुरू कर दिया है.
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Bengal Assembly Budget Session: रीतब्रत के साथ 65 विधायक
यह घटनाक्रम तृणमूल विधायक दल के भीतर हुए जबर्दस्त विद्रोह के बाद सामने आया है. कुछ ही दिन पहले, पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने नेतृत्व की बात न मानते हुए और पार्टी आलाकमान द्वारा चुने गये शोभनदेव चट्टोपाध्याय को खारिज करते हुए, विपक्ष के नेता के पद के लिए रीतब्रत बनर्जी के दावे का समर्थन किया था. तब से बागी गुट का संख्याबल बढ़कर 65 विधायक हो गया, जिससे विधानसभा में रितब्रत बनर्जी की स्थिति और मजबूत हुई है.
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सर्वदलीय बैठक में हुमायूं कबीर, नौशाद सिद्दीकी और मुस्तफिजुर रहमान शामिल हुए
सर्वदलीय बैठक में विपक्ष के कई गुटों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, जिनमें आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी, आम जनता उन्नयन पार्टी के विधायक हुमायूं कबीर और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) विधायक मुस्तफिजुर रहमान शामिल थे. विधानसभा का घटनाक्रम तृणमूल के संसदीय खेमे में चल रही व्यापक उथल-पुथल के बीच सामने आया है.
28 में से 20 टीएमसी सांसदों ने बदल लिया है पाला
हाल में संसद में पार्टी को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब खबर आयी कि उसके 28 में से 20 लोकसभा सदस्यों ने तृणमूल संसदीय दल से अलग होकर ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ (एनसीपीआई) में विलय करने का फैसला किया और साथ ही भाजपा-नीत एनडीए को समर्थन देने का भी निर्णय लिया.
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By Mithilesh Jha
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