ममता बनर्जी का रीतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष मानने से इनकार, स्पीकर के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची टीएमसी

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 08 Jun 2026 9:09 PM

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Mamata Banerjee Challenge Ritabrata LoP Status: तृणमूल कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष के फैसले के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिसने बागी नेता रीतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दी थी. जस्टिस कृष्णा राव 11 जून को याचिका पर सुनवाई करेंगे.

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Mamata Banerjee Challenge Ritabrata LoP Status: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है. तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अंदरूनी लड़ाई कोर्ट तक पहुंच गयी है. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय (Calcutta High Court) में एक याचिका दायर की. याचिका में पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी गयी है, जिसके तहत पार्टी के बागी गुट के नेता रीतब्रत बनर्जी को विधानसभा में आधिकारिक तौर पर नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition) के रूप में मान्यता दी गयी है.

11 जून को होगी हाईकोर्ट में सुनवाई

कलकत्ता हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर सोमवार को काफी गहमागहमी देखी गयी. तृणमूल के वरिष्ठ वकील ने न्यायमूर्ति कृष्णा राव से केस की जल्द से जल्द सुनवाई की मांग की. जस्टिस कृष्णा राव ने मामले की गंभीरता और समय की कमी को देखते हुए कहा कि याचिका पर 11 जून को प्राथमिकता के आधार पर (Priority Basis) विस्तृत सुनवाई की जायेगी.

विधानसभा अध्यक्ष को बनाया मुख्य प्रतिवादी

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को यह भी बताया कि इस पूरी कानूनी लड़ाई में सदन के अध्यक्ष (Speaker) को ही मुख्य प्रतिवादी (Main Respondent) बनाया गया है, क्योंकि उनके ही एक फैसले ने पार्टी के भीतर इस संवैधानिक संकट को जन्म दिया है.

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टीएमसी के 80 में 58 विधायकों ने किया विद्रोह

कानूनी लड़ाई का सियासी गणित और संख्या बल ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले आधिकारिक धड़े के लिए बेहद चिंताजनक और परेशान करने वाला है. विधानसभा चुनाव 2026 के बाद टीएमसी के कुल 80 विधायकों में से रिकॉर्ड 58 विधायकों ने ममता बनर्जी के आधिकारिक आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए नेता प्रतिपक्ष पद के लिए बागी नेता रीतब्रत बनर्जी का समर्थन किया.

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Mamata Banerjee Challenge Ritabrata LoP Status: आधिकारिक उम्मीदवार हो गया खारिज

इन 58 विधायकों के संख्या बल के कारण ममता बनर्जी के वफादार और पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेब चट्टोपाध्याय के नाम को बागी गुट ने पूरी तरह से खारिज कर दिया. विधायकों के बहुमत के आधार पर विधानसभा अध्यक्ष ने रीतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दी थी, जिसे अब अदालत में घसीटा गया है.

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नयी विधानसभा में ममता बनर्जी की साख का सवाल

हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 294 सदस्यीय विधानसभा के भीतर सीटों का समीकरण पूरी तरह बदल चुका है. चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 207 सीटों पर जीत दर्ज कर सरकार बनायी है. तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमटकर मुख्य विपक्षी दल बनी थी. इनमें से 58 अलग हो गये. यानी ममता बनर्जी के साथ अब मात्र 22 विधायक बचे हैं. 11 जून को अगर हाईकोर्ट ने टीएमसी के हक में फैसला नहीं दिया, तो ममता बनर्जी की राजनीतिक साख दांव पर होगी.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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