ममता बनर्जी को महा-झटका, काकोली घोष दस्तीदार समेत 20 सांसद NDA के साथ, दीदी का खेल खत्म
Published by : Mithilesh Jha Updated At : 08 Jun 2026 4:58 PM
TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर एनडीए (NDA) को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है. इस महा-बगावत से ममता बनर्जी को बड़ा झटका लगा है.
खास बातें
TMC Crisis: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद बिखर रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के ताबूत में सोमवार को दिल्ली की धरती पर सबसे आखिरी और सबसे बड़ा कील ठोक दिया गया. पश्चिम बंगाल से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक उस समय राजनीतिक भूकंप आ गया, जब तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ सांसद और लोकसभा में पार्टी की पूर्व मुख्य सचेतक (Chief Whip) काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि टीएमसी के 28 लोकसभा सदस्यों में से 20 ने केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी राजग (NDA) को समर्थन देने का फैसला कर लिया है.
बागी सांसदों ने निकाली दलबदल कानून की काट
बागी टीएमसी सांसदों ने दलबदल कानून की काट निकालते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को आधिकारिक पत्र भी सौंप दिया है, जिससे ममता बनर्जी का संसदीय कुनबा ताश के पत्तों की तरह ढह गया. इसी तरह रीतब्रत बनर्जी की अगुवाई में 58 टीएमसी विधायकों ने ममता बनर्जी को बंगाल विधानसभा में झटका दिया था.
हम एनडीए के साथ जा रहे हैं : काकोली घोष दस्तीदार
सोमवार को काकोली घोष दस्तीदार ने टीएमसी में सबसे बड़े विद्रोह की आधिकारिक पुष्टि की. उन्होंने खुलासा किया कि केंद्र सरकार को समर्थन देने की इच्छा जताते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक लिखित पत्र पहले ही भेजा जा चुका है. उन्होंने एक बड़ा तकनीकी दावा ठोकते हुए कहा- तृणमूल कांग्रेस के करीब 20 सांसदों ने, जिनमें मैं भी शामिल हूं, एनडीए को समर्थन देने के अपने फैसले से लोकसभा अध्यक्ष को अवगत करा दिया है. मैं अभी भी लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक बनी हुई हूं और यह निर्णय सभी साथी सांसदों के साथ गहन विचार-विमर्श और आम सहमति के बाद लिया गया है.
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दलबदल विरोधी कानून की उड़ी धज्जियां
बागियों ने दलबदल कानून (Anti-Defection Law) के उस चक्रव्यूह को पूरी तरह भेद दिया, जिसकी चर्चा रविवार को टीएमसी के थिंक टैंक कर रहे थे. लोकसभा में टीएमसी के कुल 28 सदस्य हैं. नियमानुसार, दलबदल कानून से बचने और अपनी सांसदी बचाने के लिए दो-तिहाई यानी कम से कम 19 सांसदों की जरूरत थी. काकोली का दावा है कि 20 सांसदों का उनको समर्थन प्राप्त है. इसलिए दलबदल कानून उन पर लागू नहीं होता.
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बंगाल की जनता के फैसले को किया स्वीकार
बगावत को जायज ठहराते हुए काकोली घोष दस्तीदार ने कहा- हमने पश्चिम बंगाल की जनता के फैसले और जनादेश को खुले दिल से स्वीकार कर लिया है. हमारा दृढ़ विश्वास है कि बंगाल के विकास के लिए हमारा भविष्य का राजनीतिक मार्ग अब राजग (NDA) की नीतियों के अनुरूप ही होना चाहिए.
TMC Crisis: दिल्ली में खलबली, कालीघाट में सन्नाटा
यह अप्रत्याशित घटनाक्रम उस वक्त सामने आया है, जब तृणमूल कांग्रेस के भीतर पिछले कुछ दिनों से वरिष्ठ नेताओं द्वारा खुले तौर पर केंद्रीय नेतृत्व (अभिषेक बनर्जी की शैली) के खिलाफ असहमति जताने और इस्तीफे देने का दौर चल रहा था. लोकसभा के 28 सांसदों के साथ-साथ राज्यसभा में भी टीएमसी के 12 सदस्य हैं, लेकिन लोकसभा में हुए इस 20 सांसदों के महा-विद्रोह ने ममता बनर्जी की राष्ट्रीय राजनीति को शून्य पर ला खड़ा किया है.
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ममता के ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक से पहले हुआ ‘धमाका’
दिल्ली में ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की बड़ी बैठक से ठीक पहले यह धमाकेदार खबर आ गयी. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस महा-तख्तापलट और काकोली घोष दस्तीदार के दावों पर समाचार लिखे जाने तक तृणमूल कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व (कालीघाट) की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या खंडन सामने नहीं आया है.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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