टॉलीवुड का काला सच आया सामने, 10 साल तक काम के लिए तरसती रहीं श्रीलेखा मित्रा, ‘सिंडिकेट’ ने किया करियर बर्बाद

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 08 Jun 2026 9:05 AM

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बांग्ला फिल्मों की अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा.

Sreelekha Mitra Tollywood ‍Ban: प्रसिद्ध बंगाली अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा ने टॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री पर बड़ा और गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया कि नेपोटिज्म और पावर सिंडिकेट के खिलाफ आवाज उठाने के कारण उन्हें 10 साल तक काम नहीं दिया गया.

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Sreelekha Mitra Tollywood ‍Ban: पश्चिम बंगाल की राजनीति से लेकर सांस्कृतिक जगत तक इन दिनों बड़े-बड़े सिंडिकेट और बगावत के राजफाश हो रहे हैं. इसी बीच बांग्ला फिल्म इंडस्ट्री (Tollywood) का एक ऐसा खौफनाक और काला सच सामने आया है, जिसने पूरे भद्रलोक को झकझोर कर रख दिया है.

बेबाकी और दमदार अभिनय के लिए जानी जाती हैं श्रीलेखा

अपनी बेबाकी और दमदार अभिनय के लिए पहचानी जाने वाली कद्दावर अभिनेत्री श्रीलेखा मित्रा (Sreelekha Mitra) ने एक बेहद सनसनीखेज और दर्दनाक खुलासा किया. उन्होंने दावा किया है कि टॉलीवुड के एक बेहद प्रभावशाली ‘पावर क्लब’ और ‘सिंडिकेट’ ने उन्हें पूरे 10 साल के लिए इंडस्ट्री से व्यावहारिक रूप से बैन (Ban) कर दिया था.

टॉलीवुड में नेपोटिज्म और कैंप कल्ट का जानलेवा जाल

टॉलीवुड में जारी तकनीशियन विद्रोह के बीच श्रीलेखा मित्रा का यह बयान यह साबित करता है कि बंगाल के सिनेमाई जगत में ‘नेपोटिज्म’ और ‘कैंप कल्ट’ (गुटबाजी) का जाल कितना गहरा और जानलेवा है.

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पावर लॉबी के आगे झुकने से इनकार की चुकानी पड़ी कीमत

श्रीलेखा मित्रा ने बांग्ला मीडिया और अपने सोशल मीडिया इनपुट्स के जरिये टॉलीवुड के भीतर छिपे उन सफेदपोशों पर सीधा निशाना साधा है, जो अभिनेताओं का करियर तय करते हैं. अभिनेत्री का आरोप है कि टॉलीवुड में कुछ खास निर्देशकों, कद्दावर अभिनेताओं और निर्माताओं का एक ऐसा गुट (Syndicate) सक्रिय है, जिसकी मर्जी के बिना किसी भी काबिल कलाकार को काम नहीं मिलता.

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जी-हुजूरी न करने की मिली सजा : श्रीलेखा मित्रा

श्रीलेखा ने कहा कि उन्होंने कभी भी इंडस्ट्री के इन स्वयंभू आकाओं की जी-हुजूरी नहीं की. न ही वे किसी विशेष ‘कैंप’ का हिस्सा बनीं. इसी स्वाभिमान की सजा उन्हें दी गयी. उन्हें लगातार अच्छी फिल्मों से बाहर कर दिया गया और निर्माताओं पर उन्हें काम न देने का परोक्ष दबाव बनाया गया.

Sreelekha Mitra Tollywood ‍Ban: प्रतिभा को दरकिनार कर अपनों को मिला काम

श्रीलेखा मित्रा के अनुसार, कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराही गयी फिल्मों का हिस्सा रहने के बावजूद उनके जीवन के सबसे बेहतरीन 10 साल इस अघोषित प्रतिबंध की भेंट चढ़ गये. उनकी जगह उन लोगों को काम दिया गया, जो अभिनय में उनसे कहीं पीछे थे, लेकिन ‘पावर लॉबी’ के पसंदीदा थे.

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श्रीलेखा के खुलासे के गहरे सियासी मायने

राजनीतिक और सांस्कृतिक विश्लेषकों का मानना है कि श्रीलेखा मित्रा का यह दर्द ऐसे वक्त पर सामने आया है, जब टॉलीवुड में फेडरेशन के अध्यक्ष स्वरूप विश्वास के ‘सिंडिकेट राज’ के खिलाफ निर्देशकों और टेक्नीशियनों ने विद्रोह कर रखा है. तृणमूल कांग्रेस के भीतर मची बगावत के चलते वैसे ही सत्ता का नियंत्रण कमजोर हुआ है, जिसके कारण अब पीड़ित कलाकार और निर्देशक बिना किसी डर के खुलकर सामने आ रहे हैं.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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