बंगाल के गढ़ चंडीधाम मंदिर का होगा विकास, विधायक ने रखा कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव

Author Ashish Jha
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सुनसान जंगल में स्थित मंदिर

सुनसान जंगल में स्थित मंदिर

दुर्गापुर के ऐतिहासिक गढ़ चंडीधाम को एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है. विधायक चंद्रशेखर बनर्जी ने सरकार से एक धार्मिक कॉरिडोर के निर्माण का प्रस्ताव दिया है. इस विकास से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा.

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दुर्गापुर से निमाई दास की रिपोर्ट

दुर्गापुर पूर्व के भाजपा विधायक चंद्रशेखर बनर्जी ने कॉकसा जंगल स्थित प्राचीन गढ़ चंडी धाम को तीर्थ स्थल के विकास और वहां एक धार्मिक कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव सरकार को दिया है. विधायक का कहना है किगढ़ चंडीधाम के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए यहां मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना ज़रूरी है.

पूरे देश से पूजा करने आयेंगे लोग

विधायक चंद्रशेखर बनर्जी ने कहा- इस मुद्दे पर पहले ही बात हो चुकी है. हमने एक प्रपोज़ल सरकार को भेजा है. अगर यह कॉरिडोर बनता है, तो इलाके में बड़े पैमाने पर डेवलपमेंट होगा. उम्मीद है कि यह काम बहुत जल्द शुरू हो जाएगा. मेधास मुनि का आश्रम गढ़ चंडीधाम का रूप ले लेगा. पूरे देश से लोग यहां पूजा करने आएंगे.

रहस्यमयी है यह देवी मंदिर

रहस्यमयी गढ़ जंगल अब गढ़ चंडीधाम के नाम से जाना जाता है. चारों तरफ घने जंगल के बीच स्थित इस मंदिर के आसपास दिन में भी बाघ और भालू खुलेआम घूमते हैं. मंदिर तक पहुंचने के रास्ते बेहद असुरक्षित है. लुटेरे हमेशा उत्पात मचाते रहते हैं. साधु और तांत्रिक इस सुनसान जंगल में कपालिक साधना करते दिख जाते हैं. इस घने जंगल में एक तरफ श्यामरूप मंदिर और दूसरी तरफ मेधास मुनि का आश्रम है.

धार्मिक टूरिज्म को मिलेगा बल

विधायक की ओर से दिये गये प्रस्ताव में कहा गया है कि आज भी यहां पहुंचना किसी के लिए बेहद कष्टकारी है. ऐसे में यहां आने वालों की सुविधा के लिए बस सर्विस की शुरुआत होनी चाहिए. पूरे इलाके को सजाने के लिए एक बड़ा गेट, लाइटिंग और एक रेस्ट हाउस बनाने का प्लान है. माना जाता है कि इससे भक्तों को आने-जाने में आसानी होगी और दूसरी तरफ, धार्मिक टूरिज्म भी बढ़ेगा.

क्या है मान्यता

गढ़ जंगल स्थित मंदिर को लेकर मान्यता है कि प्राचीन काल में राजा सुरथ और अपदस्थ समाधि वैश्य ने ऋषि मेधास के आश्रम में शरण ली थी. ऋषि की सलाह पर उन्होंने देवी महामाया की कठोर साधना की. उनकी साधना से खुश होकर, देवी ने उन्हें आशीर्वाद दिया. सदियों से, स्थानीय लोगों का मानना है कि यह वह पवित्र जंगल है जहां देवी की सबसे पहले पूजा की गई थी. इसी मान्यता के आधार पर, साल भर भक्त इस जगह पर आते हैं.

धार्मिक टूरिज्म की बहुत संभावना

स्थानीय लोगों का दावा है कि गढ़ चंडीधाम के आसपास धार्मिक टूरिज्म की बहुत संभावना है. राज्य सरकार ने वैसे ईंट की पक्की सड़क बना दी है, लेकिन वह काफी टूटी हुई है. अगर कॉरिडोर बनता है, तो राज्य के साथ-साथ देश के अलग-अलग हिस्सों से और भी ज़्यादा तीर्थयात्री और टूरिस्ट आएंगे. रोज़गार के अवसर पैदा होंगे.

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पिछली सरकारों ने किया नजरअंदाज

गढ़ चंडी धाम के प्रमुख योगीनाथ ब्रह्मानंद गिरी की शिकायत है कि माकपा और तृणमूल की सरकारों के दौरान इस आश्रम की किसी ने सुध नहीं ली. यहां विकास का कोई काम नहीं हुआ. तृणमूल सरकार के किसी भी प्रतिनिधि ने इस मंदिर का भ्रमण नहीं किया. दुनिया की पहली दुर्गा पूजा यहीं शुरू हुई थी, लेकिन तृणमूल सरकार ने इस जगह को नज़र अंदाज़ किया.मौजूदा बीजेपी सरकार ने इस ओर ध्यान दिया है.

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आशीष झा

लेखक के बारे में

By आशीष झा

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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