ड्राइव पर निकलने से पहले फोन में रखें ये 5 EV चार्जिंग ऐप्स, मिनटों में ढूंढकर देंगे नजदीकी चार्जिंग स्टेशन

EV चार्जिंग ऐप्स (Photo: Tata Power)
EV Charging Apps: भारत में EV चार्जिंग अब पहले से काफी आसान हो चुकी है. कई स्मार्ट ऐप्स की मदद से आप कहीं भी नजदीकी चार्जिंग स्टेशन खोज सकते हैं और उसकी उपलब्धता भी देख सकते हैं. ये ऐप्स लंबी ड्राइव को टेंशन-फ्री बनाते हैं.
भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EVs) की पॉपुलैरिटी तेजी से बढ़ रही है. इसके साथ ही EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर भी लगातार मजबूत हो रहा है. आज चार्जिंग को पहले से कहीं ज्यादा आसान बनाने के लिए कई मोबाइल ऐप्स मौजूद हैं, जिनकी मदद से EV ओनर्स अपने आसपास या ट्रेवल के दौरान आसानी से चार्जिंग स्टेशन ढूंढ सकते हैं. अगर आप EV चलाते हैं, तो ये कुछ बेहतरीन EV चार्जिंग ऐप्स हैं जिन्हें अपने स्मार्टफोन में जरूर डाउनलोड करना चाहिए. ये ऐप्स आपको नजदीकी चार्जिंग स्टेशन खोजने, उनकी उपलब्धता देखने और चार्जिंग को बेहद आसान बनाने में मदद करेंगे. आइए एक-एक कर जानते हैं इनके बारे में.
Tata Power EZ Charge
Tata Power के EZ Charge ऐप के जरिए भारत भर में 5,500 से ज्यादा चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध हैं. अच्छी बात यह है कि ये चार्जर सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मॉल्स, होटल्स, ऑफिस कॉम्प्लेक्स और मेन हाईवे रूट्स पर भी आसानी से मिल जाते हैं.
Zeon Charging
भारत में EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की बात करें, तो Zeon Charging उन शुरुआती कंपनियों में से एक है जिसने इस फील्ड में सबसे पहले कदम रखा था. आज कंपनी देशभर में 300 से ज्यादा लोकेशनों पर 500 से अधिक चार्जिंग पॉइंट्स ऑपरेट कर रही है. यही नहीं, Zeon Charging अपने चार्जिंग नेटवर्क को लगातार बढ़ा रही है. कंपनी 120 से ज्यादा नए चार्जिंग स्टेशन बनाने पर काम कर रही है, जो जल्द ही लोगों के इस्तेमाल के लिए शुरू हो जाएंगे.
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Statiq
Statiq आज भारत के सबसे बड़े और भरोसेमंद EV चार्जिंग नेटवर्क्स में से एक बन चुका है. कंपनी ने देश के 1,000 से ज्यादा शहरों में 10,000 से अधिक चार्जर लगाए हैं. खास बात यह है कि Statiq सिर्फ पब्लिक चार्जिंग ही नहीं, बल्कि होम चार्जिंग सॉल्यूशंस भी उपलब्ध कराता है. इसके चार्जर 7.4kW, 11kW और 22kW की चार्जिंग पावर के साथ आते हैं.
Bolt.Earth
भारत में Bolt.Earth तेजी से सबसे बड़े EV चार्जिंग नेटवर्क्स में से एक बन चुका है. कंपनी के 2,000 से ज्यादा शहरों में 1 लाख से अधिक चार्जिंग पॉइंट्स मौजूद हैं, जो दोटू-व्हीलर्स, थ्री-व्हीलर्स और फोर-व्हीलर्स इलेक्ट्रिक गाड़ियों को सपोर्ट करते हैं. अच्छी बात यह है कि इसके चार्जिंग स्टेशन आपको घरों के पास, टाउनशिप्स में, मॉल्स में और यहां तक कि हाईवे मोटल्स पर भी आसानी से मिल जाते हैं.
ChargeZone
ChargeZone पूरे भारत में 13,000 से ज्यादा चार्जिंग पॉइंट्स ऑपरेट करती है. इनमें फास्ट चार्जिंग और सुपरचार्जिंग दोनों सुविधाएं उपलब्ध हैं. इसके ज्यादातर चार्जिंग स्टेशन हाईवे, ऑफिस पार्क, मॉल और रिहायशी सोसाइटियों के पास मौजूद हैं. खास बात यह है कि ChargeZone सिर्फ प्राइवेट कारों ही नहीं, बल्कि ट्रक और बस जैसे कमर्शियल गाड़ियों की जरूरतों को भी ध्यान में रखकर अपना नेटवर्क लगातार बढ़ा रहा है.
ध्यान में रखें ये बातें
भारत में ज्यादातर EV चार्जिंग ऐप्स यूज करने के लिए आपको अकाउंट बनाना पड़ता है और चार्जिंग का पेमेंट करने के लिए वॉलेट में बैलेंस भी रखना होता है. हालांकि, समझदारी इसी में है कि वॉलेट में जरूरत से ज्यादा पैसे न डालें, खासकर तब जब आप कोई लंबी हाईवे ड्राइव प्लान नहीं कर रहे हों. डेली यूज के लिए सीमित बैलेंस रखना बेहतर रहता है. साथ ही, सिर्फ एक ऐप पर डिपेंड रहने के बजाय 2-3 अलग-अलग चार्जिंग ऐप्स अपने फोन में रखना अच्छा ऑप्शन है.
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लेखक के बारे में
By अंकित आनंद
शॉर्ट बायो
अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.
काम के बारे में
अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.
उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.
पढ़ाई और करियर
बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.
प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.
विजन
अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.
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