ग्रामीणों के आंदोलन के आगे पुनर्वास के मुद्दे पर झुका प्रबंधन, दो महीने में सर्वे होगा पूरा

Published at :03 Oct 2024 9:54 PM (IST)
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ग्रामीणों के आंदोलन के आगे पुनर्वास के मुद्दे पर झुका प्रबंधन, दो महीने में सर्वे होगा पूरा

इसीएल केंदा एरिया के केंदा तीन नंबर माइंस इलाके में भूगर्भ में लगी आग के कारण नियमित हो रहे धंसान से प्रभावित लोगों के पुनर्वास को लेकर दो माह में सर्वे कर लिया जाोगा और छह माह के अंदर उचित मुआवजे के साथ उन्हें वहां से हटाया जायेगा.

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जामुड़िया.

इसीएल केंदा एरिया के केंदा तीन नंबर माइंस इलाके में भूगर्भ में लगी आग के कारण नियमित हो रहे धंसान से प्रभावित लोगों के पुनर्वास को लेकर दो माह में सर्वे कर लिया जाोगा और छह माह के अंदर उचित मुआवजे के साथ उन्हें वहां से हटाया जायेगा. इस दौरान किसी का घर यदि काफी खराब स्थिति में पहुंच गया तो उसे इसीएल के आवास में शिफ्ट किया जायेगा. ग्रामीणों के साथ बैठक में प्रबंधन द्वारा इस बात पर राजी होने के बाद तीन दिनों से खदान बंद करके चल रहा आंदोलन शुक्रवार को संभवतः समाप्त हो जायेगा. इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे भुइयां समाज उत्थान समिति के प्रदेश अध्यक्ष सिंटू कुमार भुइयां ने कहा कि स्थानीय विधायक हरेराम सिंह की उपस्थिति में केंदा एजेंट कार्यालय में यह बैठक हुई. जिसमें केंदा एरिया के महाप्रबंधक, एजेंट, प्रबंधक, जामुड़िया थाने के प्रभारी, खदान चला रही आउटसोर्सिंग कंपनी के प्रतिनिधि आदि उपस्थित थे. जिसमें उक्त निर्णय हुआ है, जिसकी मिनट्स की प्रति शुक्रवार को बनाकर सभी के उसपर हस्ताक्षर होंगे., सर्वे कमेटी में दो ग्रामीणों को भी शामिल किया गया है.

गौरतलब है रानीगंज कोलफील्ड एरिया पुनर्वास परियोजना के तहत 142 बस्तियों को पुनर्वास करने का कार्य कछुए की रफ्तार से भी धीमी गति से चल रहा है. केंद्र और राज्य सरकार के बीच पुनर्वास के पैसे को लेकर गतिरोध के कारण हजारों लोगों की जिंदगियां खतरे में हैं. इस पुनर्वास परियोजना में केंदा एरिया के बस्तियों के भी नाम शामिल हैं. यहां जमीन के नीचे आग सुलग रही है. 
बारिश होने पर ही यहां गैस का रिसाव और धंसान आम बात है. पुनर्वास की मांग को लेकर यहां के लोग नियमित रूप से आंदोलन कर रहे हैं. लोगों को सिर्फ और आश्वासन ही मिलता है. पिछले एक माह के दौरान इस इलाके में दो बार धंसान की बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं. खदान भी लोगों के घरों के करीब आ गया है. 60 घर ऐसे हैं जो कभी भी जमींदोज हो सकते हैं. तत्काल पुनर्वास देने की मांग को लेकर पहले आंदोलन हुआ था. जिसमें एजेंट ने कब तक पुर्नवास किया जायेगा इसका लिखित आश्वासन देने का समय देकर पलट गये थे. जिसके कारण 27 सितंबर को वृहद आंदोलन हुआ. इस बार भी आंदोलनकारियों को एक अक्तूबर को महाप्रबंधक के साथ बैठक का आश्वासन मिला.

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