JUVNL घोटाला: 109 करोड़ रुपये के गबन मामले में आरोपी अरग्य सेनगुप्ता को झारखंड हाईकोर्ट से मिली जमानत

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JUVNL Scam Jharkhand

झारखंड हाईकोर्ट

JUVNL Scam Jharkhand: झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की वेकेशन बेंच ने जेयूवीएनएल (JUVNL) के 109 करोड़ रुपये के घोटाला मामले में आरोपी अरग्य सेनगुप्ता उर्फ अर्नब सेनगुप्ता को सीआईडी के तीन मामलों में जमानत दे दी है. वकील ने अदालत में दलील दी कि सीआईडी के पास कोई साक्ष्य नहीं है.

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रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

रांची: झारखंड हाईकोर्ट से झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड (JUVNL) के 109 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाला मामले के आरोपी को बड़ी राहत मिली है. हाईकोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अवकाशकालीन पीठ (Vacation Bench) ने मामले के आरोपी अरग्य सेनगुप्ता उर्फ अर्नब सेनगुप्ता की ओर से दायर तीन अलग-अलग जमानत याचिकाओं (Bail Petitions) को स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत की सुविधा प्रदान कर दी है. सीआईडी (CID) द्वारा दर्ज किए गए तीन अलग-अलग मामलों में कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है.

सीआईडी के पास प्रार्थी के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं

सुनवाई के दौरान प्रार्थी अरग्य सेनगुप्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एल.सी.एन. शाहदेव ने पीठ के समक्ष मजबूती से पक्ष रखा. उन्होंने अदालत को बताया कि इस पूरे वित्तीय घोटाले में प्रार्थी की कोई प्रत्यक्ष या परोक्ष संलिप्तता नहीं है. सीआईडी ने उन्हें इस महाघोटाले से जुड़े चार अलग-अलग मामलों में आरोपी बनाया है, जबकि मूल प्राथमिकी (FIR) में वे नामजद आरोपी भी नहीं थे. अधिवक्ता ने दलील दी कि केवल अन्य आरोपियों के बयान (पूछताछ) के आधार पर प्रार्थी का नाम इस केस में घसीटा गया है, जबकि सीआईडी के पास उनके खिलाफ कोई ठोस या पुख्ता साक्ष्य मौजूद नहीं है. इसके अलावा, इस घोटाले के कई अन्य मुख्य आरोपियों को कोर्ट से पहले ही जमानत मिल चुकी है.

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109 करोड़ रुपये के गबन की जांच कर रही है सीआईडी

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट की अवकाशकालीन पीठ ने प्रार्थी और राज्य सरकार (सीआईडी) दोनों पक्षों की दलीलें और केस डायरी का अवलोकन किया. सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने प्रार्थी की दलीलों को न्यायसंगत मानते हुए तीनों केसों में अरग्य सेनगुप्ता को बेल बॉन्ड पर रिहा करने का आदेश जारी कर दिया. गौरतलब है कि झारखंड ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड की भारी-भरकम राशि (109 करोड़ रुपये) के अवैध गबन और फर्जीवाड़े को लेकर सीआईडी ने मामला दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया था, जिसमें अब आरोपियों को राहत मिलने लगी है.

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समीर उरांव

लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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