जज उत्तम आनंद हत्याकांड में दोषियों को राहत नहीं, झारखंड हाईकोर्ट ने उम्रकैद की सजा बरकरार रखी

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झारखंड हाईकोर्ट की फाइल फोटो.

Uttam Anand Murder Case: झारखंड हाईकोर्ट ने धनबाद के जज उत्तम आनंद हत्याकांड में दोषी लखन वर्मा और राहुल वर्मा की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी. हाईकोर्ट ने दोनों की अपील खारिज करते हुए सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले पर मुहर लगा दी.

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Uttam Anand Murder Case: झारखंड हाईकोर्ट ने बहुचर्चित धनबाद के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे) उत्तम आनंद हत्याकांड में मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए दोनों दोषियों लखन वर्मा और राहुल वर्मा की आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है. जस्टिस रंजन मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने दोनों आरोपियों की ओर से दायर अपील याचिकाओं को खारिज कर दिया. इसके साथ ही धनबाद स्थित सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई सजा पर हाईकोर्ट ने अपनी मुहर लगा दी.

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सीबीआई कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट ने सही माना

खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पहले ही अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. मंगलवार को फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि मामले में सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा दिया गया निर्णय और सजा उचित है. इसलिए दोषियों की अपील स्वीकार करने का कोई आधार नहीं बनता. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा भुगतनी होगी.

मॉर्निंग वॉक के दौरान हुई थी जज की मौत

यह मामला 28 जुलाई 2021 का है. उस दिन धनबाद के एडीजे उत्तम आनंद सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले थे. इसी दौरान एक तेज रफ्तार ऑटो ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी थी. गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी. घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पूरे देश में सनसनी फैल गई थी. न्यायपालिका से जुड़े एक जज की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए थे.

सीबीआई जांच में सामने आई साजिश

घटना की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी गई थी. जांच के बाद लखन वर्मा और राहुल वर्मा को गिरफ्तार किया गया. सीबीआई ने दोनों के खिलाफ हत्या और साक्ष्य से जुड़े विभिन्न आरोपों में आरोपपत्र दाखिल किया. सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर दोनों को दोषी करार दिया.

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2022 में सुनाई गई थी उम्रकैद की सजा

धनबाद स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 6 अगस्त 2022 को दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था. विशेष अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया था कि दोनों दोषियों को अंतिम सांस तक जेल में रहना होगा. इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने झारखंड हाईकोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है. हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद बहुचर्चित जज उत्तम आनंद हत्याकांड में सीबीआई अदालत का निर्णय पूरी तरह बरकरार रहेगा.

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