भगवान जगन्नाथ नहीं यहां मां तारा की निकलती है रथयात्रा, शुभेंदु सरकार ने दिये 5 लाख रुपये का अनुदान

Author Ashish Jha
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मां तारा के लिए तैयार रथ

मां तारा के लिए तैयार रथ

विश्व प्रसिद्ध तारापीठ की सदियों पुरानी रथयात्रा इस वर्ष ऐतिहासिक गौरव के साथ मनाई जाएगी. पश्चिम बंगाल सरकार से मिली 5 लाख की वित्तीय सहायता से मां तारा का नया सागौन का रथ तैयार हो रहा है, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण होगा.

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बीरभूम से मुकेश तिवारी की रिपोर्ट

विश्व प्रसिद्ध शक्तिपीठ तारापीठ की सदियों पुरानी रथयात्रा इस वर्ष नई भव्यता और ऐतिहासिक गौरव के साथ आयोजित होगी. पश्चिम बंगाल सरकार ने मां तारा की रथयात्रा को राज्य की 25 ऐतिहासिक रथयात्राओं की सूची में शामिल करने के बाद मंदिर समिति को 5 लाख रुपये की विशेष वित्तीय सहायता दी है. इस सहायता से मां तारा के नए रथ का निर्माण, संरक्षण और रथयात्रा के समग्र आयोजन को और भव्य बनाया जाएगा.

सागौन की लकड़ी से नया रथ तैयार

मंदिर समिति के अनुसार, वर्षों पुराने रथ के जर्जर हो जाने के कारण इस बार उच्च गुणवत्ता वाली सागौन की लकड़ी से नया रथ तैयार किया जा रहा है.हालांकि, रथ की ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखने के लिए पुराने रथ के मूल पहियों और धुरी को सुरक्षित रखा गया है.नया रथ पारंपरिक स्वरूप के साथ आधुनिक सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर बनाया जा रहा है, जिसका निर्माण कार्य अंतिम चरण में है.

व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी

रथयात्रा के दिन विशेष वैदिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना के बाद मां तारा को नए रथ पर विराजमान कर पारंपरिक मार्ग से नगर भ्रमण कराया जाएगा. हर वर्ष की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी शुरू कर दी है. ट्रैफिक नियंत्रण, बैरिकेडिंग, स्वास्थ्य शिविर, पेयजल और आपातकालीन सेवाओं की विशेष व्यवस्था की जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो.

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धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बल

मंदिर समिति के सचिव पुलक चट्टोपाध्याय ने बताया कि इस वर्ष रथयात्रा को पहले से अधिक भव्य, सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने का लक्ष्य रखा गया है. राज्य सरकार की आर्थिक सहायता से न केवल आयोजन का स्तर बेहतर होगा, बल्कि तारापीठ की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को भी नई पहचान मिलेगी. धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस निर्णय का श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने स्वागत किया है. उनका मानना है कि ऐतिहासिक रथयात्राओं की सूची में शामिल होने से तारापीठ की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी तथा धार्मिक पर्यटन को भी नया बढ़ावा मिलेगा.

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आशीष झा

लेखक के बारे में

By आशीष झा

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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