सांबर हिरण के सींग व पैंगोलिन के शल्क जब्त, झारखंड के दो तस्कर गिरफ्तार
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 17 Jan 2025 11:19 PM
गुप्त सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम ने छापेमारी करके तस्करी के सामान के साथ दोनों आरोपियों को दबोच लिया.
जिला कोर्ट में पेश करने पर न्यायिक हिरासत में भेजे गये जेल आसनसोल. बोकारो (झारखंड) जिला के टिरला थानांतर्गत बरीदारी गांव का निवासी गणेश प्रसाद (54) और धनबाद जिला के निरसा थाना क्षेत्र के केलियासोल कांटाजनिर इलाके के निवासी सुकुमार बाउरी को वन विभाग की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की टीम ने सांबर हिरण के सींग और पैंगोलिन के शल्क के साथ गिरफ्तार कर लिया. पकड़े गये दोनों आरोपी हिरण के सींग और पैंगोलिन के शल्क के साथ कुल्टी थाना क्षेत्र के चलबलपुर स्थित एक मैरेज हॉल में ठहरे थे और ये सामान यहां किसी को बेचने के लिए आये थे. गुप्त सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम ने छापेमारी करके तस्करी के सामान के साथ दोनों आरोपियों को दबोच लिया. शुक्रवार को आसनसोल जिला अदालत में पेश करने पर आरोपियों की जमानत याचिका खारिज हो गयी और उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. गौरतलब है कि इससे पहले भी वन विभाग की टीम ने पैंगोलिन के शल्क के साथ कुछ आरोपियों को पकड़ा था. शिल्पांचल के हर प्रकार के तस्कर सक्रिय हैं. ड्रग्स, हथियार, मानव, पशु आदि की तस्करी आम हो चुकी है. गुरुवार को वन विभाग आसनसोल टेरिटोरियल रेंज की रेंज अधिकारी तमालिका चंद के नेतृत्व में चलबलपुर इलाके में स्थित एक मैरेज हॉल में छापेमारी कर भारी मात्रा में सांबर हिरण के सींग और पैंगोलिन का शल्क बरामद किया गया. रेंज अधिकारी ने आगे बताया कि सांबर हिरण के सींग के 11 टुकड़े और पैंगोलिन के सात शल्क आरोपियों के पास से जब्त किये गये. इन सामान को लेकर आरोपी झारखंड से यहां तस्करी करने आये थे. ये सारे सामान इन्हें कहां से मिला, इसकी जानकारी अभी नहीं मिल पायी है. उन्होंने कहा कि ये सामान बेशकीमती हैं. इनकी कीमत नहीं आंकी जा सकती है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में पैंगोलिन के शल्क की भारी मांग होने के कारण इसका जम कर शिकार किया जा रहा है. पैंगोलिन दुनिया में सबसे ज्यादा तस्करी किया जानेवाला स्तनपायी है. जिसके कारण इसकी संख्या लगातार घटती जा रही है और यह लुप्तप्राय पशुओं की श्रेणी में चला गया है. मिली जानकारी के मुताबिक पैंगोलिन के शल्क का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में और सांबर हिरण के सींग के डस्ट का इस्तेमाल पारंपरिक दवाओं में किया जाता है.
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