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बंगाल में कोर्ट के फैसले पर भारी पड़ी मानवता, बिना घर तोड़े लौट गये अधिकारी

Updated at : 27 Feb 2026 12:27 PM (IST)
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बंगाल में कोर्ट के फैसले पर भारी पड़ी मानवता, बिना घर तोड़े लौट गये अधिकारी

Bengal News: गैरमजरुआ खास जमीन पर अवैध कब्जा का है मामला. वामपंथी सरकार के दौरान किया था कब्जा.

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Bengal News: कोलकाता. अदालत का आदेश था घर तोड़ दिया जाये, लेकिन मानवता ने अधिकारियों को ऐसा करने से रोक दिया. पश्चिम मिदनापुर जिले के चंद्रकोना में अदालत के आदेश के बाद पुलिस प्रशासन दल बल के साथ घर गिराने आए थे. घर के लोग रोते हुए पुलिसकर्मियों के पैरों में गिर पड़े. वे मकान के सामने दीवार की तरह खड़े हो गए. प्रशासनिक अधिकारियों ने कई बार उन्हें हटने का अनुरोध किया, लेकिन कोई नहीं हटा. अंत में, अदालत के आदेश के बावजूद, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को घर गिराए बिना ही लौटना पड़ा.

दो घरों को तोड़ने का था आदेश

आरोप है कि चंद्रकोना नगरपालिका वार्ड संख्या 3 के अयोध्या क्षेत्र के निवासी श्रीकांत राणा, मधुसूदन राणा और राधारमन राणा की जमीन पर कई परिवार लंबे समय से कब्जा जमाए हुए हैं. राणा परिवार ने अपनी जमीन वापस पाने के लिए अदालत का रुख किया. घाटाल न्यायालय के वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश ने अवैध रूप से बने दो घरों को गिराने का आदेश दिया. प्रशासन और पुलिस कर्मी दोनों को गिराने के लिए पहुंचे. चंद्रकोना पुलिस स्टेशन के पुलिसकर्मी, चंद्रकोना ब्लॉक संख्या 2 के बीडीओ उत्पल पाइक और अदालत के कर्मचारी दोनों घरों को गिराने के लिए पहुंचे.

40 वर्षों से कब्जा रहने का दावा

प्रशासन के अधिकारियों ने घर मालिकों को एक घंटे के भीतर मकान खाली करने का संदेश दिया. हालांकि, दोनों घरों में रहने वाले सुकुमार दास और नियति दास के परिवारवालों ने इसका विरोध किया. उनका दावा था कि वामपंथी शासन के दौरान प्रशासन ने इस जगह को खास घोषित किया था. तब से वे वहां 40 वर्षों से रह रहे हैं. उनके पास अपनी कोई जमीन या जगह नहीं है. उन्होंने पूछा कि अगर घर गिरा दिया गया, तो वे कहां जाएंगे. उन्होंने यह भी बताया कि उन्हें अदालत के आदेश के बारे में अचानक पता चला. उन्होंने इस आदेश के खिलाफ अपील की है. नतीजतन, फिलहाल घर को गिराया नहीं जाये.

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अदालत ही करेगा आगे का फैसला

परिवार के सदस्य पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के चरणों में गिरकर फूट-फूट कर रोने लगे. इस घटना में परिवार का एक सदस्य बीमार पड़ गया. अंत में, वकील और प्रशासनिक अधिकारी घर तोड़े बिना ही लौट गए. हालांकि उन्होंने मीडिया कैमरों के सामने इस बारे में कुछ नहीं कहा, लेकिन वादी के वकील कृष्णेंदु विकास दत्ता ने कहा- दोनों परिवारों ने अदालत के आदेश का उल्लंघन किया है. इसलिए, हम न्याय के लिए फिर से अदालत का रुख करेंगे. अब देखते हैं कि इस बार अदालत क्या आदेश देती है. बहरहाल अभी दोनों घर टूटने से बच गये और घरवाले को थोड़ी राहत महसूस हो रही है.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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