द्वारकानाथ ठाकुर की कर्मस्थली तथा जीवनी को लेकर रिसर्च करने पहुंचे एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के अध्यापक
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 02 Jan 2020 2:33 AM
रानीगंज : भारत के प्रथम कोयला खनी के रूप में जाने जाने वाले विश्व कवि रवींद्रनाथ ठाकुर के पितामह प्रिंस द्वारकानाथ ठाकुर के कर्मस्थली का रिसर्च करने एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ एडवर्ड होलिश बुधवार को टीम के साथ रानीगंज पहुंचे. एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के डेपुटी डीन ऑफ रिसर्च एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी स्कॉटलैंड के प्रोफेसर एडवर्ड होलिश […]
रानीगंज : भारत के प्रथम कोयला खनी के रूप में जाने जाने वाले विश्व कवि रवींद्रनाथ ठाकुर के पितामह प्रिंस द्वारकानाथ ठाकुर के कर्मस्थली का रिसर्च करने एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ एडवर्ड होलिश बुधवार को टीम के साथ रानीगंज पहुंचे. एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के डेपुटी डीन ऑफ रिसर्च एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी स्कॉटलैंड के प्रोफेसर एडवर्ड होलिश के साथ एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के पेंटर एंड फोटोग्राफर पॉल गिल्लिंग, मुंबई से अर्बन हेरिटेज कंजर्वेटीनिस्ट कोमलिका बासु, काजी नज़रुल यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी विभाग के प्रोफेसर डॉ शांतनु बनर्जी जो हेरिटेज ग्रुप ऑफ आसनसोल से जुड़े हुए हैं, उनके साथ इस ग्रुप के हेमंत चटर्जी, शुभोजीत सरकार मौजूद थे.
इस मौके पर रानीगंज मथुरा चंडी पीठ स्थान अंतर्गत नारायण कुड़ी प्रिंस द्वारकानाथ ठाकुर हेरिटेज कमेटी की ओर से भूतनाथ मंडल, अरविंद सिंघानिया, तुलसी दास तथा देवाशीष दास ने आगत गवेषकों को प्रिंस द्वारकानाथ ठाकुर के कर्मस्थली, होलेज घर,जेट्टी ,एडमिनिस्ट्रेटिव आफिस आदि के परिदर्शन कराते हुए उनके अतीत तथा वर्तमान की समुचित जानकारी उपलब्ध कराई.
डॉ एडवर्ड होलिश ने बताया कि प्रिंस द्वारकानाथ ठाकुर का कर्मस्थली रानीगंज के नारायण कुड़ी के एक स्थान पर नहीं बल्कि काफी दायरे में फैली हुई है एवं इन सभी को मिलाकर इस स्थान को भव्य हेरिटेज का रूप प्रदान किया जायेगा. ज्ञात हो कि वर्ष 1832 में रानीगंज के इस नारायणकुड़ी में विलियम बंधु को लेकर रविंद्र नाथ ठाकुर के पितामह प्रिंस द्वारकानाथ ठाकुर ने कार एंड टैगोर नामक प्रथम कोल कंपनी खोलकर कोयला उत्तोलन का कार्य आरंभ किया था.
एडवर्ड होलिश ने बताया कि एडिनबर्ग विश्वविद्यालय में प्रिंस द्वारकानाथ ठाकुर के को लेकर रिसर्च किया जा रहा है. सिर्फ रानीगंज ही नहीं बल्कि उनसे जुड़ी वस्तुओं की जानकारी जगह-जगह जाकर की जा रही है. ज्ञात हो कि वर्ष 2018 में इस नारायण कुड़ी स्थल को हेरिटेज के रूप में घोषणा किया गया था.
इस मौके पर डॉ शांतनु बनर्जी ने बताया ने कहा कि प्रिंस द्वारकानाथ ठाकुर इतने बड़े ख्याति प्राप्त व्यक्तित्व होने के बावजूद भी वे उपेक्षित रहे हैं. द्वारकानाथ ठाकुर के प्रयोग की वस्तुओं को किस प्रकार संग्रहित कर यहां पर एक म्यूजियम तैयार किया जाए इसके लिए हम लोगों को प्रयास करने की आवश्यकता है. वहीं उन्होंने बताया कि इस कार्य के लिए एक्सपर्ट लोगों को जोड़ने की आवश्यकता है. साथ ही साथ उन्होंने बताया कि द्वारकानाथ ठाकुर के वंशज को भी इस स्थान पर लाया जाए ताकि लोगों का इस स्थान के प्रति लगाव पैदा हो.
इस स्थान को हेरिटेज के रूप में परिणित होने से इस अंचल के लोगों को रोजगार भी मिलेगा. उन्होंने कहा कि नारायणकुड़ी ग्रामवासियों की एक बहुत बड़ी उपलब्धि है कि उन्होंने प्रिंस द्वारकानाथ ठाकुर से जुड़ी स्मृतियों को आज तक बचाए रखने में सफल हुए हैं और इसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं.
साथ ही साथ उन्होंने यह भी कहा कि आसनसोल हेरिटेज ग्रुप द्वारा प्रिंस द्वारकानाथ ठाकुर के इस कर्मस्थली के अलावा अन्य हेरिटेज स्थलों को पर्यटन स्थल के रूप में परिणित करने के लिए बीते 3 वर्षों से कार्य चल रहा है एवं वह इस आशा से नहीं कार्य कर रहे हैं कि उन्हें कोई सरकारी अनुदान मिले.
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