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World Sanskrit Day: झारखंड के सरकारी संस्कृत स्कूलों में न विद्यार्थी हैं, न ही शिक्षक

Updated at : 19 Aug 2024 10:45 AM (IST)
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ऐसा है संस्कृत विद्यालय का हाल. फोटो : प्रभात खबर

World Sanskrit Day: किशोरगंज स्थित राजकीय संस्कृत विद्यालय में भी एक भी विद्यार्थी नहीं है. विद्यालय में एक शिक्षक है. सरकार उसे बिना पढ़ाये वेतन दे रही है.

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World Sanskrit Day|रांची, सुनील कुमार झा : झारखंड में सरकारी संस्कृत स्कूल बंद हो रहे हैं. एकीकृत बिहार के समय में कुल 17 राजकीय संस्कृत विद्यालय थे. इनमें से 6 संस्कृत स्कूल झारखंड में हैं. राज्य गठन के बाद से लगातार इन विद्यालयों की स्थिति खराब होती चली गयी.

झारखंड के 6 राजकीय संस्कृत स्कूलों में से 4 में विद्यार्थी नहीं

वर्तमान में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, इन छह राजकीय संस्कृत स्कूलों में से चार में एक भी विद्यार्थी नहीं है. तीन विद्यालयों में एक भी शिक्षक नहीं है. एक विद्यालय में मात्र एक शिक्षक हैं. बच्चों का नामांकन नहीं होने के कारण विद्यालय बंद होने की स्थिति में है. ऐसे विद्यालयों के भवन व जमीन पर असामाजिक तत्वों ने कब्जा करना शुरू कर दिया है.

रांची के राजकीय संस्कृत विद्यालय में नहीं एक भी विद्यार्थी

किशोरगंज स्थित राजकीय संस्कृत विद्यालय में भी एक भी विद्यार्थी नहीं है. झारखंड सरकार के रिकॉर्ड के अनुसार, विद्यालय में वर्तमान में एक शिक्षक पदस्थापित है. सरकार शिक्षक को बिना पढ़ाये वेतन दे रही है. संस्कृत स्कूलों में नामांकन नहीं होने के कारण मध्यमा परीक्षा में शामिल होने वाले विद्यार्थियों की संख्या में लगातार कमी आ रही है.

30 वर्ष से नहीं हुई नियुक्ति

झारखंड के संस्कृत स्कूलों में अंतिम नियुक्ति वर्ष 1994 में हुई थी. राज्य के सभी संस्कृत विद्यालय राजकीय कोटि के विद्यालय हैं. प्रावधान के अनुरूप विद्यालय के शिक्षक शिक्षा सेवा संवर्ग में प्रोन्नति दी जाती है. वर्ष 2018-19 में विद्यालय में कार्यरत अधिकतर शिक्षक को शिक्षा सेवा में प्रोन्नति मिल गयी. जबकि शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई.

झारखंड के किन जिलों में हैं संस्कृत स्कूल?

रांची, पलामू, हजारीबाग, देवघर, धनबाद व चाईबासा में संस्कृत विद्यालय है. रांची, पलामू, हजारीबाग व देवघर के विद्यालय में एक भी विद्यार्थी नहीं हैं. वहीं प्रधानाध्यापक समेत कुल नौ पद सृजित है.

रांची के स्कूल में वर्षों से पढ़ाई बंद

राजधानी के किशोरगंज में राजकीय संस्कृत उच्च विद्यालय है. विद्यालय एक शिक्षक कार्यरत है, पर विद्यार्थी नहीं है. विद्यालय भवन की स्थिति ठीक नहीं है. शिक्षा विभाग के पदाधिकारी का ध्यान विद्यालय पर नहीं है, अगर जल्द इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो जमीन अवैध कब्जा हो सकता है.

पलामू में वर्ष 1960 में खुला था स्कूल

पलामू में वर्ष 1960 में संस्कृत विद्यालय खुला था. विद्यालय में न तो शिक्षक हैं और न ही विद्यार्थी. सिर्फ एक अनुसेवक के भरोसे विद्यालय चल रहा है. चार कमरे के विद्यालय का भवन जर्जर है. पिछले कई वर्षों से प्रथमा एवं मध्यमा कक्षा में विद्यार्थियों का नामांकन नहीं हो रहा है.

हजारीबाग के स्कूल का भवन जर्जर

हजारीबाग के राजकीय संस्कृत उच्च विद्यालय की स्थापना 1957 में हुई थी. चालू सत्र 2024-25 में एक भी विद्यार्थियों का नामांकन नहीं हुआ है. भवन की स्थिति जर्जर है. छत से पानी टपकता है. प्लस टू हिंदू स्कूल के प्राचार्य लक्ष्मण मेहता को प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाया गया है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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