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झारखंड में छह सरकारी संस्कृत हाइस्कूल, एक में भी शिक्षक नहीं

Updated at : 03 Aug 2020 5:44 AM (IST)
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झारखंड में छह सरकारी संस्कृत हाइस्कूल, एक में भी शिक्षक नहीं

झारखंड में सरकारी संस्कृत स्कूल व कॉलेजों का हाल खस्ता है. राज्य में छह राजकीय (सरकारी) हाइस्कूल हैं, लेकिन किसी भी स्कूल में शिक्षक नहीं हैं. संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों की अंतिम नियुक्ति वर्ष 1994 में हुई थी.

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रांची : झारखंड में सरकारी संस्कृत स्कूल व कॉलेजों का हाल खस्ता है. राज्य में छह राजकीय (सरकारी) हाइस्कूल हैं, लेकिन किसी भी स्कूल में शिक्षक नहीं हैं. संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों की अंतिम नियुक्ति वर्ष 1994 में हुई थी. आलम यह है सरकारी संस्कृत विद्यालयों से विद्यार्थियों का परीक्षा में शामिल होना बंद हो गया है. रांची स्थित राजकीय संस्कृत हाइस्कूल से भी वर्ष 2020 की मध्यमा परीक्षा में शामिल होने के लिए एक भी विद्यार्थी ने आवेदन नहीं किया है. स्कूल में एक भी शिक्षक नहीं है. वर्तमान में मात्र एक लिपिक है. यही आलम अन्य संस्कृत विद्यालयों का भी है. शिक्षकों की कमी का असर नामांकन और रिजल्ट पर पड़ा है.

मध्यमा परीक्षा मेंं शामिल होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या में लगातार कमी आ रही है. मध्यमा परीक्षा 2019 में सफल परीक्षार्थियों की संख्या मात्र 55 फीसदी थी.राज्य के राजकीय संस्कृत विद्यालयएकीकृत बिहार में 17 राजकीय संस्कृत विद्यालय थे. वर्तमान में झारखंड में देवघर, रांची, हजारीबाग, डाल्टनगंज, धनबाद व चाईबासा में संस्कृत विद्यालय है. राजकीय विद्यालय के शिक्षकों को प्रावधान के अनुरूप वर्ष 2018-19 में शिक्षा सेवा में प्रोन्नति दे दी गयी. इस कारण जो शिक्षक कार्यरत थे सभी शिक्षा सेवा के अधिकारी बन गये.प्रधानाध्यापक समेत नाै पदसंस्कृत विद्यालय में प्रधानाध्यापक समेत शिक्षक के कुल नौ पद सृजित हैं.

इसमें चार शिक्षक संस्कृत के हैं. संस्कृत में व्याकरण, साहित्य, वेद व ज्योतिष के पद सृजित हैं. इसके अलावा गणित, सामाजिक विज्ञान, हिंदी व अंग्रेजी विषय के एक-एक शिक्षक के पद हैं. जबकि विद्यालयों में प्रधानाध्यापक समेत कुल 54 शिक्षक होने चाहिए. वर्ष 2018-19 में इन विद्यालयों में मात्र सात शिक्षक कार्यरत थे. प्रोन्नति के बाद सभी पद रिक्त हो गये.लगातार कम हो रहे परीक्षार्थीमध्यमा की परीक्षा जैक द्वारा ली जाती है. कुल 24 विद्यालयों से प्रतिवर्ष मध्यमा की परीक्षा में परीक्षार्थी शामिल होते हैं.

इसमें से अधिकतर विद्यालय गैर सरकारी हैं. इन विद्यालयों को सरकार से संबद्धता प्राप्त है. मध्यमा परीक्षा में शामिल होनेवाले परीक्षार्थियों की संख्या लगातार कम हो रही है. पिछले तीन वर्षों में परीक्षार्थियों की संख्या में लगभग तीन हजार की कमी आयी है. 2018 में लगभग नौ हजार परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे. वहीं 2020 में लगभग सात हजार परीक्षार्थियों ने आवेदन किया है.

Post by : Pritish Sahay

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