आईएएस अफसर विनय चौबे को मिली सशर्त जमानत, सुप्रीम कोर्ट ने दिया आदेश

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :13 Apr 2026 2:48 PM (IST)
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Ranchi News

आईएएस अफसर विनय चौबे. फाइल फोटो.

Ranchi News: सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित आईएएस विनय चौबे को 2009-10 के कथित जमीन घोटाले और उत्पाद नीति मामले में सशर्त जमानत दी. अदालत ने जांच में सहयोग और गवाहों को प्रभावित न करने का निर्देश दिया. इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Ranchi News: सुप्रीम कोर्ट ने निलंबित आईएएस अधिकारी विनय चौबे को जमानत प्रदान करते हुए उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश दिया है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि आरोपी जांच में पूर्ण सहयोग करेंगे और गवाहों को प्रभावित करने का प्रयास नहीं करेंगे. सुप्रीम कोट के न्यायाधीश जस्टिस बीवी नागरथना और उज्ज्वल भुयान की पीठ ने जमानत याचिका पर सुनवाई की. सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यह प्रकरण वर्ष 2009-10 से जुड़ा हुआ है, जिसमें कथित तौर पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं. राज्य सरकार की ओर से दायर मामले में विनय चौबे सहित अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जा रही है. जानकारी के अनुसार, एसीबी ने 20 मई 2025 को तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय कुमार चौबे को गिरफ्तार किया था.

2010 के जमीन घोटाले के मामले में मिली जमानत

विनय चौबे की ओर से दलील पेश की गई कि यह मामला 2009-10 का है. उस समय वे हजारीबाग के उपायुक्त के पद पर आसीन थे. जमीन से जुड़े इस मामले में वे सात महीने से जेल में सजा काट रहे हैं. झारखंड सरकार की ओर से कहा गया है कि विनय चौबे चार और मामले में अभियुक्त हैं.

मई 2025 में गिरफ्तार हुए थे विनय चौबे

विनय चौबे को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 20 मई 2025 को गिरफ्तार किया था. उन पर आरोप था कि विनय चौबे ने 2022 की उत्पाद नीति में जानबूझकर मैन पावर की सप्लाई करने वाली कंपनियों फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर काम करने का आदेश दिया था. इससे सरकार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा था. मई 2025 में गिरफ्तारी के बाद से विनय चौबे जेल में बंद हैं.

झारखंड हाईकोर्ट ने नहीं दी थी जमानत

इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने 6 जनवरी 2026 को विनय चौबे की जमानत याचिका को खारिज कर दिया था. जस्टिस संजय द्विवेदी की पीठ ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. तब उन्हें सुप्रीम कोर्ट की ओर से राहत दी गई है.

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सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कुछ शर्तों के साथ जमानत दे दी है. अपने आदेश में सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि वे देश छोड़कर नहीं जाएंगे. इसके साथ ही अदालत ने यह भी कहा है कि वे गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे और उनसे दूरी बनाए रखेंगे. इसके अलावा, जांच में पहले की ही तरह सहयोग करते रहेंगे.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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