चतरा के सिमरिया में एसडीओ का पद महीनों से खाली, मामलों की सुनवाई ठप होने से बढ़ी परेशानी

सिमरिया का अनुमंडल कार्यालय. फोटो: प्रभात खबर
Chatra News: चतरा के सिमरिया अनुमंडल में एसडीओ का पद महीनों से खाली है, जिससे धारा 107, 144 और 145 जैसे मामलों की सुनवाई ठप हो गई है. भूमि विवाद बढ़ रहे हैं और लोग बिना समाधान लौट रहे हैं. प्रशासनिक लापरवाही पर जनता में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
चतरा से दीनबंधू और धर्मेंद्र की रिपोर्ट
Chatra News: झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया अनुमंडल में प्रशासनिक लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है. अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) का पद पिछले कई महीनों से खाली पड़ा है, जिससे न्यायिक और प्रशासनिक कार्य लगभग ठप हो गए हैं. इससे लोगों की रोजमर्रा की समस्याएं गंभीर रूप लेती जा रही हैं.
स्थानांतरण के बाद नहीं हुई नई नियुक्ति
जानकारी के अनुसार, पूर्व एसडीओ सन्नी राज का तबादला 01 जनवरी 2026 को कर दिया गया था. लेकिन, हैरानी की बात यह है कि इतने समय बीत जाने के बाद भी इस महत्वपूर्ण पद पर किसी स्थायी अधिकारी की नियुक्ति नहीं की गई है. फिलहाल, चतरा के जिला परिवहन पदाधिकारी (डीटीओ) माहेश्वरी प्रसाद यादव को प्रभारी एसडीओ का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. हालांकि, वे अदालत से जुड़े मामलों का निष्पादन नहीं कर रहे हैं, जिससे स्थिति और बिगड़ गई है.
न्यायिक कार्य पूरी तरह ठप
स्थानीय लोगों का कहना है कि सिमरिया अनुमंडल में धारा 107, 144 और 145 जैसे अहम मामलों की सुनवाई पूरी तरह बंद पड़ी है. ये धाराएं आमतौर पर शांति व्यवस्था बनाए रखने और भूमि विवादों को सुलझाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती हैं. इन मामलों की सुनवाई नहीं होने के कारण छोटे-छोटे विवाद अब बड़े झगड़ों में बदलते जा रहे हैं. इससे क्षेत्र में तनाव और असुरक्षा का माहौल बनता जा रहा है.
हर दिन निराश होकर लौट रहे लोग
सिमरिया अनुमंडल के अंतर्गत सिमरिया, टंडवा, गिद्धौर, पत्थलगड़ा और लावालौंग जैसे प्रखंड आते हैं. इन क्षेत्रों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर अनुमंडल कार्यालय पहुंचते हैं. लेकिन, न्यायिक कार्य नहीं होने के कारण उन्हें बिना समाधान के ही वापस लौटना पड़ता है. इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है.
भूमि विवादों में बढ़ा तनाव
भूमि से जुड़े छोटे-छोटे मामलों का पहले समय पर निष्पादन हो जाता था, जिससे विवाद बढ़ने से पहले ही सुलझ जाते थे. लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. धारा 145 जैसे मामलों में सुनवाई नहीं होने से जमीन से जुड़े विवाद लगातार बढ़ रहे हैं. कई मामलों में आपसी तनाव हिंसक रूप भी ले सकता है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का खतरा है.
एलआरडीसी कोर्ट में भी लंबित मामले
सिर्फ अनुमंडल कार्यालय ही नहीं, बल्कि एलआरडीसी न्यायालय में भी कई मामले लंबित पड़े हैं. समय पर सुनवाई नहीं होने के कारण लोगों को न्याय पाने में देरी हो रही है. पहले लोग अंचल कार्यालय से संबंधित शिकायत लेकर एसडीओ के पास जाते थे और उन्हें त्वरित न्याय मिलता था, लेकिन अब ऐसी कोई व्यवस्था नहीं रह गई है.
अधिवक्ताओं और आम लोगों की बढ़ी परेशानी
अधिवक्ता विनेश कुमार राणा और अन्य वकीलों का कहना है कि सिमरिया में हर मंगलवार और शुक्रवार को कोर्ट लगता था. कोर्ट बंद होने से न सिर्फ वकीलों, बल्कि आम लोगों को भी भारी परेशानी हो रही है. अब लोगों को अपने मामलों के लिए चतरा कोर्ट जाना पड़ रहा है, जिससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है.
प्रशासनिक ढिलाई से बढ़ा भ्रष्टाचार का खतरा
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासनिक निगरानी की कमी के कारण अंचल अधिकारियों और कर्मियों का मनोबल बढ़ गया है. इससे कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है और भ्रष्टाचार को भी बढ़ावा मिल रहा है. लोगों का कहना है कि जब शीर्ष स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी नहीं होंगे, तो निचले स्तर पर जवाबदेही भी कम हो जाती है.
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जनआंदोलन की चेतावनी
क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की है कि सिमरिया अनुमंडल में जल्द से जल्द स्थायी एसडीओ की नियुक्ति की जाए. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे जनआंदोलन करने को मजबूर होंगे. फिलहाल, पूरे क्षेत्र की नजरें प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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