भागो नहीं तो हम खदेड़ेंगे, शुभेंदु अधिकारी के अल्टीमेटम से घबराये बांग्लादेशियों का बॉर्डर पर लगा जमावड़ा
Published by : Mithilesh Jha Updated At : 27 May 2026 9:19 PM
Suvendu Adhikari Ultimatum to Bangladeshi: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के कड़े अल्टीमेटम के बाद पश्चिम बंगाल के हकीमपुर बॉर्डर पर अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की वापसी की होड़ मच गयी है. Detect, Delete and Deport की नीति के डर से लोग खुद ही सीमा पार करने के लिए कतारों में लगे हैं.
खास बातें
Suvendu Adhikari Ultimatum to Bangladeshi: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद घुसपैठ के मुद्दे पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सख्त रुख से भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गयी है. अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को मुख्यमंत्री के अल्टीमेटम के बाद उत्तर 24 परगना जिले के हकीमपुर बॉर्डर पर हलचल है. सालों से पश्चिम बंगाल के अलग-अलग कोने में छिपकर रह रहे बांग्लादेशी अब अपने मुल्क लौटने के लिए सीमा पर जमे हैं. यह पहला मौका है, जब बिना किसी सैन्य कार्रवाई के, केवल प्रशासनिक चेतावनी के डर से इतनी बड़ी संख्या में लोग खुद बंगाल छोड़कर भाग रहे हैं.
भागो, वरना सरकार जो करेगी उसका अंदाजा नहीं : शुभेंदु
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कल्याणी की प्रशासनिक बैठक के बाद कहा था कि बंगाल अब ‘सॉफ्ट स्टेट’ नहीं रहेगा. उन्होंने अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों से कहा- जल्दी-जल्दी भागो, नहीं तो जो करना है सरकार करेगी. इस एक वाक्य ने उन लोगों के बीच खौफ पैदा कर दिया है, जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोगों ने वोट बैंक के लिए सीमाएं खोल रखीं थीं, अब देशहित सर्वोपरि होगा.
हकीमपुर चौकी पर महा-पलायन का मंजर
स्वरूपनगर के हकीमपुर में सीमा पर बांग्लादेशियों की भीड़ हालांकि थोड़ी कम हुई है, लेकिन महा-पलायन की स्थिति अभी भी बनी हुई है. आज करीब 70 लोग सीमा पर मौजूद हैं. बारिश के दौरान उन्हें सीमा के पास बने एक नये मकान में शरण दी गयी है. हालांकि बांग्लादेशियों का सीमा पर आना अभी भी जारी है. जैसे-जैसे दिन चढ़ता है, बांग्लादेश लौटने वालों की संख्या सीमा पर बढ़ जाती है. हकीमपुर चेक पोस्ट के पास का नजारा हैरान करने वाला है.
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बॉर्डर पर ऐसे हैं हालात
- बोरिया-बिस्तर के साथ कतार : पुरुष, महिलाएं और मासूम बच्चे प्लास्टिक की सीटों पर अपना सारा सामान (बर्तन, कपड़े और बिस्तर) लेकर बैठे हैं.
- इन इलाकों से भाग रहे लोग : बॉर्डर पर पहुंचे अधिकांश लोग कोलकाता के दमदम, न्यूटाउन, राजारहाट और डानकुनी जैसे इलाकों में मजदूरी या घरेलू काम कर रहे थे.
- खुद ही कर रहे सरेंडर : बीएसएफ (BSF) के जवानों के पास जाकर ये लोग खुद ही गुहार लगा रहे हैं कि उन्हें सीमा पार बांग्लादेश भेज दिया जाये, क्योंकि वे अब पकड़े जाने और डिटेंशन सेंटर जाने से डर रहे हैं.
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Suvendu Adhikari Ultimatum to Bangladeshi: डिटेंशन सेंटर और 3D नीति का डर
राज्य सरकार ने हाल ही में Detect, Delete and Deport (पहचानो, हटाओ और निर्वासित करो) की नीति पर काम शुरू किया है. इसके तहत मालदा में राज्य का पहला निरुद्ध केंद्र (Holding Centre) शुरू हो चुका है, जहां कई संदिग्धों को रखा गया है. सरकार द्वारा आधार कार्ड और वोटर लिस्ट की सघन जांच के आदेश के बाद घुसपैठियों को डर है कि उनके फर्जी कागजात अब उन्हें नहीं बचा पायेंगे.
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BSF और जिला प्रशासन अलर्ट पर
उत्तर 24 परगना के बशीरहाट उपमंडल में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी कर दी गयी है. बीएसएफ के अधिकारी लगातार बांग्लादेशी अधिकारियों (BGB) के संपर्क में हैं, ताकि इन लोगों की पहचान सुनिश्चित कर इन्हें वापस भेजा जा सके. प्रशासन का मानना है कि आने वाले दिनों में यह संख्या और बढ़ेगी, क्योंकि मुख्यमंत्री ने कह दिया है कि जून में पूरे राज्य में ‘वेरिफिकेशन अभियान’ को और तेज किया जायेगा.
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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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