घुसपैठियों में बंगाल की 3D नीति का खौफ, हकीमपुर बॉर्डर पर बीएसएफ से कह रहे- साहब, हमें वापस भेज दो
Published by : Mithilesh Jha Updated At : 27 May 2026 6:25 AM
बांग्लादेश की सीमा पर बोरिया-बिस्तर के साथ बैठे बांग्लादेशी घुसपैठिये.
Illegal Bangladeshis Fleeing West Bengal: पश्चिम बंगाल में Detect, Delete and Deport नीति लागू होने के बाद हकीमपुर बॉर्डर पर बांग्लादेशी घुसपैठियों की भारी भीड़ जमा हो गयी है. लोग खुद देश छोड़कर जाने की मांग कर रहे हैं. मालदा और मुर्शिदाबाद में निरुद्ध केंद्र भी चालू हो गया है.
खास बातें
Illegal Bangladeshis Fleeing West Bengal: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की 3D (Detect, Delete and Deport यानी पता लगाओ, हटाओ और निर्वासित करो) की नीति ने अवैध रूप से प्रदेश में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों में भारी दहशत पैदा कर दी है. आलम यह है कि जो लोग दशकों से कोलकाता और आसपास के इलाकों में पहचान छिपाकर रह रहे थे, वे अब खुद ही बॉर्डर की ओर भाग रहे हैं.
जल्द से जल्द सीमापार जाने की तैयारी
उत्तर 24 परगना के बशीरहाट स्थित हकीमपुर सीमा चौकी पर पिछले 2 दिनों में 100 से अधिक संदिग्ध बांग्लादेशी अपने सामान, बिस्तर और बर्तनों के साथ जमा हो गये हैं, ताकि वे किसी भी तरह सीमा पार कर अपने वतन लौट सकें.

दमदम से न्यूटाउन तक सफाई अभियान का असर
हकीमपुर बॉर्डर पर कतारों में खड़े इन लोगों में पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. इनमें से अधिकतर लोग कोलकाता के दमदम, न्यूटाउन और डानकुनी जैसे इलाकों में सालों से दिहाड़ी मजदूरी या घरेलू सहायक का काम कर रहे थे.
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Illegal Bangladeshis Fleeing West Bengal: सुना रहे मजबूरी की दास्तां
राज्य सरकार द्वारा जिला स्तर पर निरुद्ध केंद्र (Detention Centres) शुरू किये जाने के फैसले ने इनकी नींद उड़ा दी है. जांच चौकी पर इंतजार कर रहे एक व्यक्ति ने दर्द साझा करते हुए कहा- अगर सरकार हमें यहां रहने ही नहीं देगी और पकड़कर जेल (डिटेंशन सेंटर) में डाल देगी, तो हमारे पास वापस जाने के अलावा क्या चारा है? हम खुद ही चले जाना बेहतर समझ रहे हैं.
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मालदा में खुला पहला निरुद्ध केंद्र, 9 संदिग्ध हिरासत में
प्रशासनिक सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मालदा राज्य का पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां संदिग्धों के लिए निरुद्ध केंद्र ने काम करना शुरू कर दिया है. मालदा के इस सेंटर में फिलहाल 9 संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है. उन्हें तब तक यहं रखा जायेगा, जब तक उनके निर्वासन (Deportation) की कानूनी औपचारिकताएं पूरी नहीं हो जातीं.

SIR के दौरान भी दिखा था ऐसा ही डर
पिछले साल नवंबर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान भी ऐसी भीड़ दिखी थी, लेकिन नयी सरकार की सख्ती ने इस बार वापसी की रफ्तार बढ़ा दी है.
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BSF भी हैरान : खुद सरेंडर कर रहे हैं लोग
सीमा सुरक्षा बल (BSF) के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पिछले 2 दिनों में वापस जाने वालों की संख्या में अचानक भारी उछाल आया है. बीएसएफ कर्मी अब इन लोगों के दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं और BGB के संपर्क में हैं, ताकि इन लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित हो सके.
जाली कागजातों का डर
कई घुसपैठियों को डर है कि अगर 3D अभियान के तहत घर-घर तलाशी हुई, तो उनके द्वारा बनवाये गये जाली आधार कार्ड और पहचान पत्र पकड़े जायेंगे, जिससे वे कानूनी पचड़े में बुरी तरह फंस सकते हैं.
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प्लास्टिक शीट और सामान के साथ बॉर्डर पर डेरा
हकीमपुर सीमा चौकी की तस्वीरें किसी शरणार्थी शिविर जैसी नजर आ रही हैं. लोग प्लास्टिक की चादरें बिछाकर खुले आसमान के नीचे बैठे हैं. उनके पास बड़े-बड़े बोरे और बंडल हैं, जिनमें उनकी बरसों की जमा पूंजी और गृहस्थी के सामान हैं. शुभेंदु अधिकारी सरकार की ‘पता लगाओ और हटाओ’ की नीति ने साफ संदेश दे दिया है कि बंगाल अब अवैध प्रवासियों के लिए ‘सेफ हेवन’ नहीं रहा.
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By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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