क्या बढ़ेगा सीमा पर तनाव? बाड़बंदी के फैसले से क्यों बौखलाया बांग्लादेश?

Published by :Mithilesh Jha
Updated at :13 May 2026 6:33 PM
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Bangladesh Warns India West Bengal Border Fencing Land Transfer to BSF

Bangladesh Warns India: बंगाल चुनाव के बाद सीमा पर बाड़बंदी के फैसले से भारत-बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक विवाद गहरा गया है. बांग्लादेश सरकार की चेतावनी और कट्टरपंथी मौलवी की धमकी के बीच जानें क्या है सीमा पर मौजूदा स्थिति और शुभेंदु सरकार का अगला कदम.

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Bangladesh Warns India: पश्चिम बंगाल की सत्ता संभालते ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा सीमा पर बाड़बंदी (Fencing) के लिए जमीन देने के फैसले से बांग्लादेश बौखला गया है. वहां की सरकार ने सीमा विवाद और हालिया घटनाक्रमों को लेकर भारत को आधिकारिक चेतावनी जारी की है.

कट्टरपंथी मौलवी ने भारत के खिलाफ दिया भड़काऊ बयान

यह कूटनीतिक तल्खी ऐसे समय में आयी है, जब बांग्लादेश के एक प्रभावशाली कट्टरपंथी मौलवी ने भारत के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी करते हुए गंभीर धमकी दी है. इस विवाद ने सीमा सुरक्षा और दोनों देशों के रिश्तों के बीच एक नयी दीवार खड़ी कर दी है.

बाड़बंदी पर क्यों भड़का बांग्लादेश?

बंगाल के नये मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की कैबिनेट ने पहली ही बैठक में बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए BSF को जमीन देने की मंजूरी दे दी. इस पर ढाका का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के नियमों के अनुसार किसी भी बड़े निर्माण से पहले आपसी सहमति जरूरी है.

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नो-मेंस लैंड का पेच

बांग्लादेश का दावा है कि बाड़बंदी की योजना अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन कर सकती है, जिससे सीमावर्ती गांवों के लोगों की आवाजाही प्रभावित होगी. बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने नयी दिल्ली को संदेश भेजकर इस मामले पर ‘चिंता’ जतायी है और बातचीत की वकालत की है.

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कट्टरपंथी मौलवी ने भारत के खिलाफ उगला जहर

सीमा विवाद के बीच बांग्लादेशी मौलवी के एक वीडियो ने आग में घी डालने का काम किया है. मौलवी ने अपने अनुयायियों को संबोधित करते हुए भारत और विशेष रूप से बाड़बंदी के फैसले के खिलाफ भड़काया है. उसने बाड़बंदी को एक खास समुदाय के खिलाफ साजिश करार देते हुए गंभीर अंजाम भुगतने की धमकी दी है.

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सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट, शुभेंदु का स्पष्ट संदेश

मौलवी के भड़काऊ बयान के बाद सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने अपनी गश्त बढ़ा दी है. खुफिया विभाग भी सक्रिय हो गया है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने साफ कर दिया है कि राज्य की जनसांख्यिकी को बचाने के लिए बाड़बंदी हर हाल में पूरी की जायेगी. सरकार ने गृह मंत्रालय को इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दे दी है, ताकि कूटनीतिक और सैन्य दोनों स्तरों पर इससे निपटा जा सके.

Bangladesh Warns India: क्या है भारत-बांग्लादेश सीमा का भविष्य?

विशेषज्ञों का मानना है कि ममता बनर्जी के कार्यकाल में बाड़बंदी का काम जमीन न मिलने के कारण अटका हुआ था. अब जब नयी सरकार ने इसे प्राथमिकता दी है, तो बांग्लादेश के भीतर सक्रिय भारत-विरोधी तत्वों में बौखलाहट है. आने वाले दिनों में यह मुद्दा दक्षिण एशिया की राजनीति में एक बड़ा मोड़ ले सकता है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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