शुभेंदु अधिकारी का डोनाल्ड ट्रंप स्टाइल एक्शन, मिशन Detect, Delete and Deport शुरू, 9 घुसपैठियों को डिटेंशन सेंटर में डाला
Published by : Mithilesh Jha Updated At : 25 May 2026 8:57 PM
Suvendu Adhikari Detect Delete Deport Policy: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अवैध घुसपैठ के खिलाफ Detect, Delete and Deport नीति लागू की है. जिलाधिकारियों को होल्डिंग सेंटर्स बनाने के निर्देश दिये गये हैं. BSF को जमीन सौंप दी गयी है, ताकि वह सीमा पर बाड़बंदी का काम पूरा कर सके. जानें बंगाल में घुसपैठ रोकने और घुसपैठियों को निकालने के लिए क्या-क्या कर रही नयी सरकार.
खास बातें
Suvendu Adhikari Detect Delete Deport Policy: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य में अवैध घुसपैठियों के खिलाफ व्यापक 3D पॉलिसी (Detect, Delete and Deport) पर काम शुरू कर दिया है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त प्रवासी नीति की याद दिलाने वाले इस एक्शन प्लान के तहत, अब पकड़े गये अवैध बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों को कोर्ट-कचहरी के लंबे चक्करों में नहीं फंसाया जायेगा. उन्हें सीधे सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंपकर देश वापस भेजा जायेगा.
मालदा के इंगलिश बाजार के चंदन पार्क में बना डिटेंशन सेंटर
इस नीति को सोमवार से लागू भी कर दिया गया. मालदा पहला जिला बना, जिसने अवैध रूप से भारत में रह रहे विदेशी नागरिकों के लिए एक निरुद्ध केंद्र (Detention Center) स्थापित किया है. यहां 9 संदिग्ध बांग्लादेशियों को रखा गया है. जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इंगलिश बाजार के चंदन पार्क में डिटेंशन सेंटर स्थापित किया गया है. रविवार को गजोले के पांडुआ क्षेत्र से 3 महिला और 6 नाबालिग को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यहां लाया गया.
सीसीटीवी निगरानी और 12 पुलिसकर्मियों का सुरक्षा घेरा
अधिकारी ने बताया कि सीसीटीवी निगरानी, 12 पुलिसकर्मियों की तैनाती, नागरिक सुरक्षा कर्मचारियों और नागरिक स्वयंसेवकों की तैनाती के साथ-साथ भोजन और रख-रखाव की व्यवस्था के साथ केंद्र को कई स्तरों की सुरक्षा के दायरे में रखा गया है.
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कैसे लोगों को रखा जायेगा निरुद्ध केंद्र में?
मालदा के एक अन्य पुलिस अधिकारी ने कहा कि यहां उन विदेशी नागरिकों को अस्थायी रूप से रखा जायेगा, जिन्हें अवैध रूप से प्रवेश करने या वैध दस्तावेजों की कमी के आरोप में हिरासत में लिया गया है. यह राज्य के गृह और पहाड़ी मामलों के विभाग की विदेशी शाखा द्वारा सभी जिला प्रशासनों को ‘पकड़े गये विदेशियों’ और ‘निर्वासन या स्वदेश वापसी की प्रतीक्षा कर रहे रिहा विदेशी कैदियों’ के लिए ‘निरुद्ध केंद्र’ स्थापित करने का निर्देश देने के ठीक 2 दिन बाद सामने आया है.
मालदा जिले में निरुद्ध केंद्र ने काम करना शुरू कर दिया है. फिलहाल, 9 बांग्लादेशी नागरिकों को वहां रखा गया है. आवश्यक सत्यापन और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं. हिरासत में लिये गये लोगों के साथ निर्धारित कानूनी मानदंडों के अनुसार व्यवहार किया जा रहा है.
मालदा के एक अधिकारी
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क्या है Detect, Delete and Deport पॉलिसी?
शुभेंदु अधिकारी सरकार का यह नया फॉर्मूला राज्य की सुरक्षा और जनसांख्यिकी (Demography) को सुरक्षित रखने के लिए बनाया गया है. इसे विस्तार से समझें.
- Detect (पहचान): खुफिया तंत्र और जिला प्रशासन के जरिये उन लोगों की पहचान की जायेगी, जो बिना वैध दस्तावेजों के राज्य में रह रहे हैं.
- Delete (हटाना): बिना वैध दस्तावेज के लोगों की पहचान होने के बाद उनके नाम मतदाता सूची (Voter List), राशन कार्ड और अन्य सरकारी डेटाबेस से तत्काल प्रभाव से हटा दिये जायेंगे.
- Deport (निर्वासन): पकड़े गये घुसपैठियों को सीधे सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सुपुर्द किया जायेगा, जो बांग्लादेशी सीमा प्रहरियों (BGB) के साथ तालमेल बिठाकर उन्हें वापस उनके देश भेज देंगे.
जिला स्तर पर बनेंगे ‘होल्डिंग सेंटर्स’
सरकार ने केवल आदेश ही नहीं दिया है, बल्कि बुनियादी ढांचा भी तैयार करना शुरू कर दिया है. मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर अपने-अपने जिलों में होल्डिंग सेंटर्स (Holding Centres) स्थापित करने का निर्देश दिया है. इन केंद्रों में उन विदेशी नागरिकों को रखा जायेगा, जो जेल से रिहा हो चुके हैं या जिन्हें अवैध रूप से भारत में रहते हुए पकड़ा गया है, जब तक कि उनकी नागरिकता सत्यापन और निर्वासन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती.
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शुभेंदु अधिकारी की दो टूक- CAA के बाहर सब अवैध
नबान्न (सचिवालय) में वरिष्ठ अधिकारियों और BSF प्रमुख के साथ बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि जो लोग नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के दायरे में नहीं आते, वे पूरी तरह से घुसपैठिये हैं. उन्होंने पिछली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वोट बैंक की राजनीति के कारण सालों तक केंद्र के निर्देशों की अनदेखी की गयी, लेकिन अब बंगाल की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा.
Suvendu Adhikari Detect Delete Deport Policy: बॉर्डर थानों को मिला ग्रीन सिग्नल
राज्य के गृह सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को आदेश दिया गया है कि सीमावर्ती इलाकों के सभी थानों में यह कानून तत्काल प्रभाव से लागू किया जाये. अब स्थानीय पुलिस संदिग्धों को हिरासत में लेते ही इसकी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों और BSF को देगी, जिससे कानूनी जटिलताएं कम होंगी और निर्वासन की प्रक्रिया तेज होगी.
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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
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