जगन्नाथ की रथयात्रा : 70 साल से रथ नहीं, फिर भी नहीं टूटी आस्था, जानें कैसे 300 साल पुरानी परंपरा को संजोए रखा है यह परिवार

Author Ashish Jha
Updated:
विज्ञापन
भगवान जगन्नाथ की पूजा

भगवान जगन्नाथ की पूजा

पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले के एक गांव में 70 वर्षों से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा बिना रथ के ही निकाली जाती है. गंगा में कटाव के कारण प्राचीन मंदिर और रथ नष्ट हो गए थे, जिसके बाद से आर्थिक तंगी के कारण नया रथ नहीं बन पाया. इसके बावजूद, ग्रामीणों की आस्था अटूट बनी हुई है.

विज्ञापन

बर्धमान/पानागढ़ से मुकेश तिवारी की रिपोर्ट

आषाढ़ का महीना आते ही देशभर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. विशाल रथ, "जय जगन्नाथ" के जयघोष और रथ की रस्सी खींचने को उमड़ती श्रद्धालुओं की भीड़ इस पर्व की पहचान है. लेकिन पश्चिम बंगाल के पूर्व बर्धमान जिले के कालना-2 प्रखंड के पूर्व सातगछिया गांव में एक ऐसी परंपरा जीवित है, जहां करीब 70 वर्षों से भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा बिना रथ के ही निकाली जाती है.

तीन शताब्दियों से चली आ रही आस्था

यह कहानी केवल एक धार्मिक आयोजन की नहीं, बल्कि तीन शताब्दियों से चली आ रही आस्था, संघर्ष और उम्मीद की भी है. करीब 300 वर्ष पुराने गोस्वामी परिवार में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की पूजा पीढ़ियों से होती आ रही है.ग्रामीणों के अनुसार, वर्षों पहले गंगा में आए भीषण कटाव ने गांव के प्राचीन जगन्नाथ मंदिर और रथ दोनों को अपने आगोश में ले लिया था. किसी तरह भगवान की प्रतिमाओं को सुरक्षित निकालकर नए स्थान पर मंदिर बनाया गया. मंदिर तो बन गया, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण नया रथ कभी नहीं बन सका.

गंगा कटाव में नष्ट हो गए मंदिर और रथ

तब से लेकर आज तक हर साल रथयात्रा, स्नान यात्रा और उल्टा रथ के सभी धार्मिक अनुष्ठान पूरे विधि-विधान से संपन्न होते हैं.मंदिर में पूजा होती है, भोग चढ़ता है, हरिनाम संकीर्तन गूंजता है और दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. बस एक चीज की कमी हर किसी को सालती है—भगवान का रथ. मंदिर के पुजारी एवं गोस्वामी परिवार के सदस्य निर्मल गोस्वामी बताते हैं कि गंगा कटाव में मंदिर और रथ दोनों नष्ट हो गए थे. परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि नया रथ बनवाया जा सके.इसलिए दशकों से परंपरा तो जारी है, लेकिन रथ के बिना.

नया रथ बनवाने की मांग

गोस्वामी परिवार की सदस्य मितु गोस्वामी कहती हैं कि पंचायत चुनाव से पहले स्थानीय जनप्रतिनिधियों से कई बार नया रथ बनवाने और मंदिर में पेयजल की व्यवस्था कराने की मांग की गई थी. भगवान के भोग की तैयारी तक में पानी की परेशानी होती है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि कई पीढ़ियां गुजर गईं, लेकिन रथ की रस्सी खींचने की इच्छा अधूरी ही रही. आज के बच्चे भी अपने दादा-परदादा की तरह सिर्फ रथ की कहानियां सुनते हैं. उन्होंने कभी भगवान जगन्नाथ को रथ पर विराजमान होकर गांव की गलियों में निकलते नहीं देखा.

पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण खबरों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

एक दिन भगवान जगन्नाथ फिर से रथ पर होंगे विराजमान

फिर भी आस्था नहीं डगमगाई. हर वर्ष उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ रथयात्रा मनाई जाती है. गोस्वामी परिवार और गांव के लोगों को भरोसा है कि यदि सरकार, प्रशासन या क्षेत्र के विधायक सिद्धार्थ मजूमदार पहल करें, तो एक दिन भगवान जगन्नाथ फिर से रथ पर विराजमान होकर गांव की गलियों में निकलेंगे. उस दिन केवल एक रथ नहीं चलेगा, बल्कि 70 वर्षों से संजोया गया एक सपना भी साकार होगा.

Also Read: बारुईपुर कांड : शुभेंदु अधिकारी ने डीजीपी से 72 घंटे में मांगी रिपोर्ट, कहा- कट्टरपंथी और देश विरोधी ताकतों ने भड़कायी हिंसा


विज्ञापन
Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola