कल्पना सोरेन के ट्वीट पर सीता सोरेन का पलटवार- हमने मुंह खोला तो कितनों का सत्ता सुख पाने का सपना हो जाएगा चूर-चूर

Published by :Mithilesh Jha
Published at :20 Mar 2024 9:15 PM (IST)
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कल्पना सोरेन के ट्वीट पर सीता सोरेन का पलटवार- हमने मुंह खोला तो कितनों का सत्ता सुख पाने का सपना हो जाएगा चूर-चूर

Sita Soren

कल्पना सोरेन के सुबह के ट्वीट पर सीता सोरेन ने ट्वीट करके पलटवार किया है. कहा है कि दुर्गा सोरेन के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाने वाले उनके मुंह में उंगली न डालें.

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झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सोशल मीडिया ‘एक्स’ को हैंडल कर रहीं उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने बुधवार (20 मार्च) को सुबह एक ट्वीट किया था. यह ट्वीट सीता सोरेन के झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) छोड़ भाजपा का दामन थामने के बाद किया गया था. इस ट्वीट पर अब शिबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन ने पलटवार किया है.

‘एक्स’ पर सीता सोरेन ने किया अपने गुस्से का इजहार

जामा विधानसभा क्षेत्र की पूर्व विधायक और अब भाजपा नेता सीता सोरेन ने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर कल्पना सोरेन के पोस्ट के जवाब में एक पोस्ट लिखा. इसमें उन्होंने अपने गुस्से का इजहार किया है. एक के बाद एक 7 ट्वीट करके सीता सोरेन ने अपनी व्यथा भी व्यक्त की है और गुस्से का इजहार भी किया है.

…तो भयावह सच्चाई उजागर हो जाएगी : सीता सोरेन

उन्होंने कहा कि स्व दुर्गा सोरेन के नाम की दुहाई देकर घड़ियाली आंसू बहाने वाले लोग मेरे मुंह में उंगली न डालें. मैंने और मेरे बच्चों ने मुंह खोल दिया, तो भयावह सच्चाई उजागर हो जाएगी. फिर न जाने कितन लोगों की राजनीतिक सत्ता सुख भोगने का सपना चूर-चूर हो जायेगा.

दुर्गा सोरेन के निधन के बाद जीवन में आया परिवर्तन भयावह सपने से कम नहीं

सीता सोरेन ने लिखा, ‘मेरे पति स्वर्गीय दुर्गा सोरेन जी के निधन के बाद से मेरे और मेरे बच्चों के जीवन में जो परिवर्तन आया, वह किसी भयावह सपने से कम नहीं था. मुझे और मेरी बेटियों को न केवल उपेक्षित किया गया, बल्कि हमें सामाजिक और राजनीतिक रूप से भी अलग-थलग कर दिया गया.’

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ईश्वर जानता है मैंने अपनी बेटियों को कैसे पाला

उन्होंने लिखा, ‘ईश्वर जानता है कि मैंने इस दौर में अपनी बेटियों को कैसे पाला. मुझे और मेरी बेटियों को उस शून्य में छोड़ दिया गया, जहां से बाहर निकल पाना हमारे लिए असंभव लग रहा था. मैंने न केवल पति को खोया, बल्कि एक अभिभावक, एक साथी और अपने सबसे बड़े समर्थक को भी खो दिया. मेरे इस्तीफे के पीछे कोई राजनीतिक कारण नहीं है. यह मेरी और मेरी बेटियों की पीड़ा, उपेक्षा और हमारे साथ हुए अन्याय के खिलाफ एक आवाज है.’

झामुमो को मेरे पति ने खून-पसीने से सींचा

सीता सोरेन ने आगे लिखा है कि जिस झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) को मेरे पति ने अपने खून-पसीने से सींचा, वह पार्टी आज अपने मूल्यों और कर्तव्यों से भटक गई है. मेरे लिए, यह सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि मेरे परिवार का एक हिस्सा था. मेरा निर्णय भले ही दुःखदायी हो, लेकिन यह अनिवार्य था. मैंने समझ लिया है कि अपनी आत्मा की आवाज सुनना और अपने आदर्शों के प्रति सच्चा बने रहना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है.

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मेरे इस्तीफे को व्यक्तिगत संघर्ष के रूप में देखें, राजनीतिक चाल के रूप में नहीं

उन्होंने लिखा कि मैं समस्त झारखंडवासियों से अनुरोध करती हूं कि मेरे इस्तीफे को व्यक्तिगत संघर्ष के रूप में देखें, न कि किसी राजनीतिक चाल के रूप में. उन्होंने कहा कि झारखंड और झारखंडियों के लिए अपने जीवन का बलिदान देने वाले स्वर्गीय दुर्गा सोरेन जी के नाम की दुहाई देकर घड़ियाली आंसू बहाने वाले लोगों से विनती है कि मेरे मुंह में अंगुली न डालें.

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भयावह सच्चाई को उजागर किया, तो कितने का सपना चूर-चूर हो जाएगा

उन्होंने कहा कि अगर मैंने और मेरे बच्चों ने मुंह खोलकर भयावह सच्चाई को उजागर कर दिया, तो कितनों का राजनैतिक और सत्ता सुख का सपना चूर-चूर हो जायेगा. उन्होंने इस पोस्ट में आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने हमेशा से दुर्गा सोरेन और उनके लोगों को मिटाकर समाप्त करने की साजिश रची है.

सीता सोरेन के भाजपा में शामिल होने के बाद कल्पना ने किया ट्वीट

ज्ञात हो कि सीता सोरेन के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के एक दिन बाद कल्पना सोरेन ने हेमंत सोरेन के ‘एक्स’ हैंडल से एक ट्वीट किया. हेमंत सोरेन और उनके बड़े भाई स्व दुर्गा सोरेन के फोटो के साथ जो पोस्ट लिखा गया, उसमें कहा गया कि हेमंत जी के लिए स्वर्गीय दुर्गा दा, सिर्फ बड़े भाई नहीं बल्कि पिता तुल्य अभिभावक के रूप में रहे.

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हेमंत सोरेन के ‘एक्स’ अकाउंट को हैंडल कर रहीं हैं कल्पना सोरेन

कल्पना सोरेन इस बात का ऐलान कर चुकीं हैं कि जब तक हेमंत सोरेन जेल से छूटकर नहीं आ जाते, तब तक उनके सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ को वही हैंडल करेंगीं. कल्पना सोरेन ने आगे लिखा है कि वर्ष 2006 में ब्याह के उपरांत इस बलिदानी परिवार का हिस्सा बनने के बाद मैंने हेमंत जी का अपने बड़े भाई के प्रति आदर तथा समर्पण और स्वर्गीय दुर्गा दा का हेमंत जी के प्रति प्यार देखा.

राजनीति में नहीं आना चाहते थे हेमंत सोरेन : कल्पना मुर्मू सोरेन

कल्पना सोरेन ने यह भी लिखा है कि हेमंत सोरेन खुद राजनीति में नहीं आना चाहते थे. दुर्गा दादा की असामयिक मृत्यु और आदरणीय बाबा के स्वास्थ्य को देखते हुए उन्हें राजनीति में कदम रखना पड़ा. हेमंत जी ने आर्किटेक्ट बनने की ठानी थी, लेकिन उनके ऊपर झामुमो, आदरणीय बाबा और स्व दुर्गा दा की विरासत तथा संघर्ष को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी थी. इस तरह हेमंत जी ने राजनीति को नहीं, बल्कि राजनीति ने हेमंत जी को चुन लिया. सुबह 9:15 बजे किए गए कल्पना सोरेन के इसी ट्वीट पर सीता सोरेन ने शाम में 6:25 बजे ट्वीट करके पलटवार किया.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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