झारखंड के पेयजल विभाग में हुए घोटाले का ये है मास्टर माइंड, ऐसे दिया जाता था खेल को अंजाम
Published by : Sameer Oraon Updated At : 10 Apr 2025 9:52 AM
Jharkhand Drinking Water Scam, सांकेतिक तस्वीर
Scam In Jharkhand: झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में हुए घोटाले का मास्टर माइंड संतोष कुमार था. पेयजल विभाग और कोषागार की सांठगांठ से इस खेल को अंजाम दिया गया था.
रांची, आनंद मोहन : झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में हुए घोटाले में नये नये खुलासे हो रहे हैं. जांच में पता चला है कि घोटाले को अंजाम देने में बड़ा रैकेट सक्रिय रहा. सरकार के अनुसंधान में ये बातें सामने आयी है. पेयजल और कोषगार के एक दर्जन से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी संदेह के घेरे में हैं. 20 करोड़ की अवैध निकासी में रोकड़पाल संतोष कुमार मास्टर माइंड था. फर्जी निकासी का मोहरा था. पेयजल विभाग और कोषागार की सांठगांठ से इस खेल को अंजाम दिया गया है. इन अधिकारियों और कर्मियों ने मिलकर सिस्टम से से खिलवाड़ किया.
अवैध निकासी का पैसा भी संतोष के खाते में होता था जमा
जांच में यह भी पता चला है कि पे-आइडी में डीडीओ के रूप में कार्यपालक अभियंता का नाम अंकित होता था और मोबाइल नंबर रोकड़पाल संतोष कुमार का अंकित होता था. अवैध निकासी का पैसा भी संतोष के खाते में जमा होता और फिर उसकी बंदरबांट की जाती थी. इस घोटाले में लेखापाल अर्चना कुमारी, शैलेंद्र सिंह और दीपक कुमार यादव के भी नाम जांच में सामने आये हैं. स्वर्णरेखा शीर्ष कार्यप्रमंडल में डीडीओ कोड आरएनसीडब्लूएसएस001 और आरएनसीडब्लूएसएस0017 से अवैध निकासी का मामला सामने आया है.
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अंतर विभागीय जांच कमेटी की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
जानकारी के अनुसार, अंतर विभागीय जांच कमेटी ने केवल एक स्वर्णरेखा शीर्ष कार्य प्रमंडल की जांच करायी, तो चौंकाने वाला मामला सामने आया है. कमेटी ने पाया कि पेयजल विभाग के कार्यपालक अभियंता प्रभात कुमार सिंह, विनोद कमार, राधेश्याम रवि और चंद्रशेखर अलग-अलग अवधि में विभाग के इस प्रमंडल में पदस्थापित थे. कार्यपालक अभियंता डीडीओ यानी निकासी और व्ययन पदाधिकारी के रूप में भी जिम्मेवारी निभा रहे थे. पेयजल विभाग के अनिल डाहंगा, रंजन कुमार सिंह और परमानंद कुमार की प्रमंडलीय लेखा पदाधिकारी के रूप में भूमिका संदिग्ध रही.
ट्रेजरी ऑफिसर ने भी नियमावली की अनदेखी की
सरकार की जांच में यह भी उजागर हुआ है कि ट्रेजरी ऑफिसर ने भी वित्तीय नियमावली को नजरअंदाज किया. घोटाले में इन कोषागार पदाधिकारियों की भूमिका भी सामने आयी है. कोषागार पदाधिकारी मनोज कुमार, डॉ मनोज कुमार, सुनील कुमार सिन्हा और सारिका भगत की भूमिका संदेह के घेरे में बतायी गयी है.
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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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