1 जून से शुरू हुई बाढ़ अवधि, वीरपुर से बराहक्षेत्र तक हाई अलर्ट, जानिए क्या है लाल बत्ती और चार झंडों का मतलब

Kosi Flood Alert 2026
Kosi Flood Alert 2026: कोसी का जलस्तर बढ़ते ही बदल जाते हैं संकेत, लाल बत्ती और चार झंडे बताते हैं कितना बड़ा है खतरा
प्रमोद कुमार, वीरपुर (सुपौल)
Kosi Flood Alert 2026: कोसी क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए आज से सतर्कता का नया दौर शुरू हो गया है. 1 जून से कोसी नदी की बाढ़ अवधि औपचारिक रूप से शुरू हो गई है और जल संसाधन विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है. वीरपुर से लेकर नेपाल के बराहक्षेत्र तक निगरानी तंत्र सक्रिय कर दिया गया है. विभाग ने संवेदनशील तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी, वायरलेस संचार व्यवस्था और कोसी बराज की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए हैं. अधिकारियों का कहना है कि नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली भारी बारिश कभी भी कोसी के जलस्तर को तेजी से बढ़ा सकती है.
कोसी पर क्यों बढ़ जाती है चिंता, क्या हैं विभाग की तैयारियां
बाढ़ अवधि शुरू होते ही जल संसाधन विभाग ने अपने सभी अधिकारियों और कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं. तटबंधों, स्परों और संवेदनशील स्थलों पर तीन पालियों में ड्यूटी लगाई जा रही है. बराहक्षेत्र, कुसहा, कोसी बराज और वीरपुर मुख्य अभियंता कार्यालय में वायरलेस केंद्र स्थापित किए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत मुख्यालय तक पहुंच सके.
विभाग ने पहले से चिन्हित अतिसंवेदनशील स्थलों पर आवश्यक सामग्री का भंडारण भी शुरू कर दिया है. इसके अलावा कोसी बराज पर लगाए गए 13 सीसीटीवी कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी की जा रही है.
लाल बत्ती और झंडों का रहस्य, कैसे मिलता है खतरे का संकेत
कोसी बराज पर जलस्तर बढ़ने के साथ चेतावनी संकेत भी बदलते जाते हैं. विभागीय व्यवस्था के अनुसार डेढ़ लाख क्यूसेक तक जलप्रवाह रहने पर एक झंडा लगाया जाता है. जैसे ही जलस्तर डेढ़ लाख क्यूसेक पार करता है, खतरे की लाल बत्ती जला दी जाती है और दो झंडे लगाए जाते हैं.
तीन लाख क्यूसेक जलप्रवाह पर तीन झंडे फहराए जाते हैं, जबकि तीन लाख क्यूसेक से अधिक जलस्तर होने पर चार झंडे लगाए जाते हैं. चार झंडे और लाल बत्ती एक साथ दिखाई देना संभावित बड़े खतरे का संकेत माना जाता है.
नेपाल की बारिश पर टिकी है कोसी की चाल
विशेषज्ञों का मानना है कि कोसी नदी का व्यवहार काफी हद तक नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली बारिश पर निर्भर करता है. 23 मई को हुई पहली बड़ी बारिश के बाद कोसी बराज पर जलप्रवाह 64,050 क्यूसेक तक पहुंच गया था. फिलहाल रविवार सुबह 8 बजे तक कोसी बराज पर 26,605 क्यूसेक जलप्रवाह दर्ज किया गया है और 56 में से 4 फाटकों को खोलकर पानी की निकासी की जा रही है.
आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियों पर पूरे कोसी क्षेत्र की नजर बनी रहेगी, क्योंकि नदी का बढ़ता जलस्तर लाखों लोगों की सुरक्षा और आजीविका से सीधे जुड़ा हुआ है.
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लेखक के बारे में
By प्रत्युष प्रशांत
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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