कोलकाता नहीं कांथी से चलता है बंगाल! क्यों शुभेंदु अधिकारी की कार्यशैली उन्हें दूसरे नेताओं से बनाती है जुदा?
Published by : Mithilesh Jha Updated At : 31 May 2026 8:20 AM
Suvendu Adhikari Political Strategy: शुभेंदु अधिकारी की कार्यशैली अन्य मुख्यमंत्रियों से क्यों अलग है? कोलकाता की बजाय कांथी से बंगाल की नब्ज थामने वाले शुभेंदु के रणनीतिक कौशल और जमीनी पकड़ पर एक विशेष विश्लेषण.
खास बातें
Suvendu Adhikari Political Strategy: पश्चिम बंगाल की सत्ता के केंद्र में भले ही कोलकाता का ‘नबान्न’ हो, लेकिन राज्य की वर्तमान राजनीतिक दिशा और दशा का निर्धारण अक्सर पूर्व मेदिनीपुर के कांथी (Contai) से होता है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की कार्यशैली ने बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ दिया है. आमतौर पर मुख्यमंत्री सचिवालय से राज्य चलाते हैं, लेकिन शुभेंदु ने एक नयी लकीर खींची है.
ग्राउंड कनेक्ट है शुभेंदु की सबसे बड़ी ताकत
विश्लेषकों का मानना है कि उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका ग्राउंड कनेक्ट और जिलों की नब्ज पर पकड़ है. आखिर क्या है, जो शुभेंदु अधिकारी को पारंपरिक राजनेताओं से अलग बनाता है? प्रभात खबर की इस विशेष रिपोर्ट में पढ़ें उनकी राजनीति के वो अनछुए पहलू, जो अब तक चर्चा से दूर रहे हैं.
कांथी बना मिनी सचिवालय
शुभेंदु अधिकारी की राजनीति का सबसे मजबूत स्तंभ उनका अपना जिला और घर है. बड़े नेता अक्सर दिल्ली या कोलकाता के वातानुकूलित कमरों में रणनीति बनाते हैं. लेकिन, शुभेंदु का ज्यादातर समय कांथी के ‘शांति कुंज’ और बंगाल के सुदूर गांवों में बीतता है. वे राज्य के हर जिले के ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ताओं को उनके नाम से जानते हैं. यह व्यक्तिगत जुड़ाव उन्हें सूचनाओं का ऐसा नेटवर्क देता है, जो इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) से भी तेज माना जाता है. योजनाओं का क्रियान्वयन हो या पार्टी का विस्तार, शुभेंदु खुद छोटी-छोटी बातों पर नजर रखते हैं.
इसे भी पढ़ें : दिल्ली से मिली हरी झंडी, शुभेंदु अधिकारी कैबिनेट का विस्तार जल्द, इन दिग्गजों की लग सकती है लॉटरी
सचिवालय नहीं, जनता के दरबार पर भरोसा
शुभेंदु अधिकारी की कार्यशैली का सबसे अलग हिस्सा है, उनका डिसीजन मेकिंग पैटर्न. वे सरकारी फाइलों से ज्यादा जमीन से आने वाले फीडबैक पर भरोसा करते हैं. ‘अन्नपूर्णा भंडार’ जैसी योजनाओं में जो 11 पन्ने का डेटा फॉर्म लाया गया, वह इसी ‘कांथी मॉडल’ की उपज है, ताकि कोई भी अपात्र व्यक्ति सिस्टम का फायदा न उठा सके.
बंगाल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
संकटमोचक की भूमिका और कड़ा अनुशासन
सिंगूर आंदोलन हो या नंदीग्राम, शुभेंदु हमेशा फ्रंटलाइन पर रहे. आज मुख्यमंत्री के रूप में भी वे संकट के समय खुद मौके पर पहुंचना पसंद करते हैं. यह अधिकारियों और जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता को बढ़ाता है. उनके प्रशासन में लालफीताशाही के लिए जगह कम है. उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि काम में देरी या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.
Suvendu Adhikari Political Strategy: राजनीतिक रणकौशल
शुभेंदु को ‘बंगाल का चाणक्य’ कहने वाले समर्थकों का मानना है कि वे तृणमूल कांग्रेस (TMC) की रग-रग से वाकिफ हैं. उन्होंने टीएमसी के वोट बैंक को उन्हीं के अंदाज में चुनौती दी. योजनाओं के नाम बदलने से लेकर प्रशासनिक फेरबदल तक, उनका हर कदम टीएमसी के प्रभाव को कम करने की एक सोची-समझी चाल है. बीजेपी को बंगाल के कोने-कोने में एक इलेक्शन मशीन की तरह खड़ा करने में उनकी सांगठनिक क्षमता का बड़ा हाथ है.
इसे भी पढ़ें : बंगाल में बजट से पहले होगा शुभेंदु कैबिनेट का विस्तार, 54 से ज्यादा विभाग अभी सीएम के पास
क्या है भविष्य की चुनौती?
कांथी से कोलकाता तक का सफर तय करने के बाद, शुभेंदु के सामने अब पूरे बंगाल के सर्वमान्य नेता बने रहने की चुनौती है. उनकी ‘कट्टर’ छवि कुछ तबकों में डर पैदा करती है, लेकिन उनके समर्थक इसे ‘सुशासन का डंडा’ कहते हैं.
इसे भी पढ़ें
शंखध्वनि से गूंजा लोकतंत्र का मंदिर, शुभेंदु ने विधानसभा में की पूजा, विधायकों को परोसा गया मछली-भात
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Mithilesh Jha
मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










