हाईकोर्ट में 4 हफ्ते के लिए टली जमशेदपुर के जेएनसी की सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट से मिल चुका है स्टे

Updated at : 09 Mar 2026 1:02 PM (IST)
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Jharkhand High Court

झारखंड हाईकोर्ट

Jamshedpur News: जमशेदपुर में जेएनएसी क्षेत्र के अवैध निर्माण और नक्शा विचलन मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी है. इससे पहले कोर्ट ने 24 भवनों के विवादित हिस्सों को ध्वस्त करने का आदेश दिया था. सुप्रीम कोर्ट से 21 भवन मालिकों को स्टे मिलने के कारण मामला फिलहाल लंबित है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jamshedpur News: झारखंड हाईकोर्ट में जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) क्षेत्र में नक्शा विचलन और अवैध निर्माण से जुड़े मामले की सुनवाई फिलहाल टल गई है. सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले को चार सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया. इस फैसले के बाद फिलहाल जेएनएसी की कार्रवाई पर अनिश्चितता बनी हुई है.

हाईकोर्ट की बेंच ने सुनी मामले की दलील

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई. सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही जेएनएसी की कार्रवाई पर रोक लगा चुका है और चार सप्ताह का समय दिया गया था. सोमवार को इस मामले में विस्तृत सुनवाई होनी थी, लेकिन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने सुनवाई को चार सप्ताह के लिए टाल दिया. इस फैसले के बाद फिलहाल संबंधित भवनों पर किसी प्रकार की तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं हो सकेगी और मामले की अगली सुनवाई अब निर्धारित समय के बाद होगी.

जेएनएसी ने दायर किया अनुपालन एफिडेविट

सुनवाई के दौरान जेएनएसी की ओर से अधिवक्ता कृष्णकांत कुमार ने अदालत में अनुपालन एफिडेविट दायर किया. उन्होंने अदालत को बताया कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के आलोक में 24 प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया गया था. इन नोटिसों के बाद संबंधित भवनों के विवादित हिस्सों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की जानी थी. हालांकि, इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस पर रोक लगा दी. इसके चलते जेएनएसी को अपनी कार्रवाई रोकनी पड़ी और मामला फिलहाल कानूनी प्रक्रिया में अटका हुआ है.

15 जनवरी को हाईकोर्ट ने दिया था सख्त आदेश

इससे पहले 15 जनवरी को झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया था. अदालत ने जेएनएसी क्षेत्र के 24 अवैध भवनों के विवादित हिस्सों को एक महीने के भीतर ध्वस्त करने का स्पष्ट और लिखित आदेश दिया था. अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि बिल्डिंग बायलॉज के उल्लंघन के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी. कोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिया था कि नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए और अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.

21 भवन मालिकों को सुप्रीम कोर्ट से राहत

इस पूरे मामले में कुल 24 भवन मालिकों के नाम सामने आए थे. इनमें से 21 भवन मालिकों को सुप्रीम कोर्ट से स्टे मिल चुका है. इसके अलावा, एक भवन मालिक को झारखंड हाईकोर्ट से राहत प्राप्त हुई है. हालांकि, दो भवन मालिक ऐसे हैं जिन्होंने अब तक न तो हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और न ही सुप्रीम कोर्ट में अपील की है. इन दोनों भवन मालिकों के नाम साकची के एसके एकथ और सत्यनारायण मारवाड़ी बताए जा रहे हैं.

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दो भवन मालिकों पर कार्रवाई का खतरा बरकरार

जिन दो भवन मालिकों ने अब तक किसी भी अदालत में अपील नहीं की है, उन पर कार्रवाई का खतरा अभी भी बना हुआ है. यदि अदालत की ओर से कोई नई राहत नहीं मिलती है, तो प्रशासन उनके भवनों के विवादित हिस्सों पर कार्रवाई कर सकता है. फिलहाल, हाईकोर्ट की अगली सुनवाई तक पूरे मामले पर सबकी नजर बनी हुई है. जमशेदपुर में अवैध निर्माण को लेकर यह मामला लंबे समय से चर्चा में है और आने वाले दिनों में अदालत का फैसला कई भवन मालिकों के लिए अहम साबित हो सकता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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