74 देशों में बैन है यह जहरीला केमिकल, लेकिन भारत के खेतों में अब भी खुलेआम हो रहा है इसका इस्तेमाल

Published by : Abhishek Pandey Updated At : 11 Jun 2026 10:51 AM

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सांकेतिक तस्वीर (फोटो : Canva)

Paraquat Dichloride : दुनिया का सबसे खतरनाक खरपतवारनाशक! जिसके एक घूंट का कोई एंटीडोट नहीं, वह 'पैराक्वाट डाइक्लोराइड' भारत के खेतों में खुलेआम छिड़का जा रहा है. जानिए इसके पीछे का चौंकाने वाला सच.

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Paraquat Dichloride : एक ऐसा खतरनाक केमिकल, जिसकी महज कुछ बूंदें किसी भी इंसान की जिंदगी को हमेशा के लिए खत्म कर सकती हैं. सबसे डरावनी बात यह है कि अगर यह शरीर में चला जाए, तो दुनिया में इसका कोई एंटीडोट (काट) तक मौजूद नहीं है. लेकिन भारत के रेगुलेशन सिस्टम की कमजोरी देखिए कि दुनिया का यह सबसे घातक जहर आज हमारे देश के खेतों में खुलेआम छिड़का जा रहा है.

खेतों में खरपतवारनाशक (Herbicides/Weedicide) के तौर पर इस्तेमाल होने वाले इस केमिकल का नाम है पैराक्वाट डाइक्लोराइड (Paraquat Dichloride). यह फसलों की आड़ में हमारी मिट्टी, पर्यावरण और अन्नदाताओं की जिंदगी में धीमा जहर घोल रहा है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर के करीब 74 देशों ने इसे पूरी तरह से बैन कर दिया है, लेकिन भारत की मिट्टी में हर साल सैकड़ों मीट्रिक टन यह केमिकल उड़ेला जा रहा है.

कपड़े रंगने वाली डाई से ‘जहर’

पैराक्वाट का सफरनामा बेहद चौंकाने वाला है. दो ऑस्ट्रियाई वैज्ञानिकों ने इसे लैब में तैयार किया. तब इसे ‘मिथाइल वायलोन’ कहा जाता था और इसका इस्तेमाल सिर्फ कपड़ों को रंगने के लिए एक ‘केमिकल डाई’ के रूप में होता था.

ब्रिटेन की ‘जिलॉट्स हिल’ लैब के वैज्ञानिकों ने खोजा कि यह केमिकल पौधों को बहुत तेजी से सुखाकर नष्ट कर सकता है. फिर साल 1961-62 में ब्रिटिश कंपनी ICI ने इसका कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू किया और इसे दुनिया भर के बाजार में ‘ग्रामोक्सोन’ ब्रांड नाम से उतारा.

जिन देशों ने इस जहर को खोजा और इससे अरबों का मुनाफा कमाया, उन्होंने अपने नागरिकों की जान बचाने के लिए इसे बरसों पहले बैन कर दिया था. ऑस्ट्रिया ने 1993, स्विट्जरलैंड ने 1989, ब्रिटेन ने 2007 और चीन ने 2017 में इसके इस्तेमाल पर पूरी तरह रोक लगा दी थी. हालांकि, इसे बनाने वाली ग्लोबल कंपनियों (जैसे सिंजेटा) को विदेशों में इसे बेचकर मुनाफा कमाने की खुली छूट मिलती रही.

भारत में एंट्री और ‘कमेटी की कानूनी ढाल’

भारत में हरित क्रांति (Green Revolution) के दौर में इस केमिकल को बाजार में एंट्री मिली. हमारे देश में कीटनाशकों को मंजूरी देने वाली संस्था ‘सेंट्रल इंसेक्टिसाइड बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमेटी’ (CIBRC) ने ‘पैराक्वाट डाइक्लोराइड 24% SL’ को केवल 9 फसलों (चाय, आलू, कपास, रबर, कॉफी, धान, गेहूं, मक्का और अंगूर) में इस्तेमाल के लिए रजिस्टर्ड किया था.

बैन न होने की असली वजह

साल 2013 में केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने दुनिया भर में प्रतिबंधित हो चुके 66 कीटनाशकों की समीक्षा के लिए डॉ. अनुपम वर्मा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी. इस कमेटी ने साल 2015 में कुछ शर्तों (जैसे सुरक्षित पैकेजिंग, किसानों और डॉक्टरों की ट्रेनिंग) के साथ पैराक्वाट डाइक्लोराइड को भारत में इस्तेमाल की हरी झंडी दे दी. लेकिन जमीन पर ये सारे सुरक्षा मानक सिर्फ कागजी साबित हो रहे हैं.

थाली तक पहुंच रहा है जहर

इस समय भारत के खेतों में हर साल 100 मीट्रिक टन से ज्यादा पैराक्वाट का छिड़काव हो रहा है. सबसे डरावनी स्थिति राजस्थान और मध्य प्रदेश के खेतों में देखने को मिल रही है.

मजदूर और लेबर का खर्च बचाने के चक्कर में किसान खड़ी मूंग की फसल को जल्दी सुखाने के लिए इस घातक केमिकल का छिड़काव कर रहे हैं. महज दो दिनों में जबरन सुखाकर काटी गई यह मूंग सीधे मंडियों से होते हुए हमारी और आपकी थाली तक पहुंच रही है.

.यानी बिना जाने हम और हमारा परिवार इस जानलेवा जहर को अपने पेट में डाल रहे हैं. खेतों में बिना ग्लव्स, मास्क या चश्मे के इसका छिड़काव करने वाले गरीब किसान और मजदूर फेफड़ों, किडनी और त्वचा की गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं.

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लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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