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बिहार/झारखंड का शाहबाज नदीम, जानिए उनके संघर्ष और रोचक टेस्ट डेब्यू की कहानी

Updated at : 22 Oct 2019 2:35 PM (IST)
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बिहार/झारखंड का शाहबाज नदीम, जानिए उनके संघर्ष और रोचक टेस्ट डेब्यू की कहानी

रांचीः दक्षिण अफ्रीका की टीम टेस्ट मैच (Test match) सीरीज के लिए भारत में थी. सीरीज के दो मुकाबले हुए विशाखापतनम और पुणे में हुए जिसमें टीम इंडिया ने शानदार जीत दर्ज की थी. तीसरा और अंतिम मुकाबला झारखंड की राजधानी रांची (Ranchi)में खेला जाना था. यहां पिच की स्थिति को देखते हुए तीन स्पीन […]

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रांचीः दक्षिण अफ्रीका की टीम टेस्ट मैच (Test match) सीरीज के लिए भारत में थी. सीरीज के दो मुकाबले हुए विशाखापतनम और पुणे में हुए जिसमें टीम इंडिया ने शानदार जीत दर्ज की थी. तीसरा और अंतिम मुकाबला झारखंड की राजधानी रांची (Ranchi)में खेला जाना था. यहां पिच की स्थिति को देखते हुए तीन स्पीन गेंदबाजों को टीम में जगह बन रही थी. टीम में पहले से ही अश्विन और जडेजा मौजूद थे. यह तय था कि तीसरे स्पीन गेंदबाज के तौर पर कुलदीप यादव को मौका मिलेगा. मगर, मैच से एक दिन पहले यानी शुक्रवार को उनके कंधे में चोट लग गयी. तब, जिस तीसरे स्पीन गेंदबाज को टीम में जगह मिली उसका नाम सुनकर बिहार और झारखंड के लोगों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी.

ये नाम कोई नया नहीं था. बीते 10-12 सालों से लगातार घरेलू क्रिकेट और आईपीएल में अपनी छाप छोड़ रहा था. इस गेंदबाज का नाम है शाहबाज नदीम ( Shahbaz Nadeem) . उन्होंने 2004 में क्रिकेट कैरियर की शुरुआत की मगर 15 साल बाद 2019 में टीम इंडिया के लिए खेलने का मौका मिला. बिहार में जन्मे और झारखंड से रणजी खेलने वाले नदीम ने अपने शानदार प्रदर्शन से कई बार टीम इंडिया (Team India) के दरवाजे पर दस्तक दी मगर भाग्य ने साथ नहीं दिया.

उन्हें द. अफ्रीका (South Africa) के खिलाफ मौका मिला और उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया. पूरे मैच में उन्होंने भले ही तीन विकेट लिए मगर उन्होंने ऐसी छाप छोड़ी जिसकी वाहवाही भारतीय क्रिकेट (Indian Cricket) के तमाम दिग्गज कर रहे हैं. नदीम का ये सफर आसान नहीं रहा है. यहां यह बताना जरूरी है कि नदीम के क्रिकेट के लिए उनके परिवार ने जो किया वो बहुत कम होता है. तो आइए आज जानते है शाहबाज नदीम के बारे में ..उनके संघर्ष के बारे.. उनके परिवार और खेल के बारे में..

भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले 296वें क्रिकेटर बने शहबाज नदीम ने बहुत संघर्ष टीम इंडिया की जर्सी पहनने के लिए किया है. 100 से ज्यादा प्रथम श्रेणी मैच और 400 से ज्यादा विकेट लेने के बाद उनके जीवन में ये पल आया. उन्होंने रांची टेस्ट के तीसरे दिन टेम्बा बवूमा के रूप में अपना पहला टेस्ट विकेट झटका.

शाहबाज नदीम को जब भारतीय टेस्ट टीम में शामिल होने की खबर आई तब वह कोलकाता में अपने परिवार के साथ थे. शुक्रवार को फोन आया और उस समय कोलकाता से रांची के लिए कोई फ्लाइट नहीं था. नदीम ने आव देखा न ताव और कार से कोलकाता से रांची के 450 किमी लंबे सफर पर निकल पड़े. वो रात करीब 11.30 बजे रांची पहुंचे.

नदीम को तब तक ये नहीं पता था कि फाइनल इलेवन में मौका मिलेगा या नहीं. रात बेचैनी में गुजरी. टीम इंडिया के साथ ड्रेसिंग रूम में रहने के नाम से ही वो रोमांचित थे. सुबह 8.30 बजे उन्हें पता चल गया कि वो टेस्ट में डेब्यू करने जा रहे हैं. ये पल उनके लिए बेहद खास था क्योंकि उन्हें अपने ही घर में पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेलना था.

मां की आंखों से आंसू छलक आये

शनिवार की सुबह नौ बजे रांची के क्रिकेट स्टेडियम में सैकड़ों दर्शकों के बीच शाहबाज नदीम को भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली ने जब टेस्ट कैप पहनाया, तो मां हुस्न आरा की आंखों से आंसू छलक आये. शाहबाज मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं. उनके परिवार ने यहां चंदवारा के विंदेश्वरी कंपाउंड स्थित अपने आवास पर टीवी पर यह सुनहरा पल देखा.

नदीम के पिता जावेद महमूद स्पेशल ब्रांच में डीएसपी रह चुके हैं. वह भी खुशी से फूले नहीं समा रहे थे.जैसे ही सुबह टॉस के समय विराट कोहली ने टीम के फाइनल इलेवन में नदीम के शामिल होने की घोषणा की, पूरे परिवार में जश्न का माहौल बन गया. पिता ने घूम-घूम कर पूरे मुहल्ले में मिठाई बांटी. उनके ससुराल धनबाद में भी जश्न मनाया गया. अपने डेब्यू मैच में नदीम ने तीन विकेट झटके वहीं शानदार फिल्डींग का नजारा पेश किया. महान गेंदबाज विशन सिंह बेदी, सुनील गावस्कार, हरभजन सिंह, और कुंबले सहित कई अन्य दिगग्जो ने शाहबाज नदीम की तारीफ में कसीदे पढ़े.

अंडर-19 में एक साथ खेले थे विराट कोहली और शाहबाज नदीम

शाहबाज नदीम और विराट कोहली ने एक साथ अंडर 19 खेला था. विराट कोहली आज टीम इंडिया के कप्तान हैं. तब के कई औऱ खिलाड़ी भी टीम इंडिया के लिए खेले मगर शाहबाज नदीम को यह मोका इस साल मिला. नदीम के मुताबिक, मैच से पहले विराट कोहली ने उनका खूब हौसला अफजाई किया.

नदीम ने जब क्रिकेट की शुरुआत की तो वह तेज गेंदबाजी करते थे मगर विकेट लेने की लालच ने उन्हें स्पीनर बना दिया. कम उम्र में ही डेब्यू करने की वजह से उन्हें सीखने और समझने में देरी लगी. शाहबाज नदीम ने विजय हजारे ट्राफी वर्ष 2018 में राजस्थान के खिलाफ खेलते हुए 10 रन पर आठ विकेट चटकाकर लिस्ट ए क्रिकेट में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी का दो दशक पुराना विश्व रिकॉर्ड तोड़ा था. .

पापा ने हौसला बढाया, घर पर पिच बनवाई

2010-12 ने शाहबाज नदीम हताश हो गए और सोचने लगे कि अब नहीं खेल पाउंगा. उनके पापा ने हौसला बढाया. नदीम के पापा को उन पर बहुत ज्यादा विश्वास था. शाहबाज ने बताया कि उन्होंने मेरे लिए घर पर पिच बनवाई थी रात में खेलने के लिए घर पर ही फ्लड लाइट लगवाई थी ताकि मैं रात में भी अभ्यास कर सकूं.

एक बार की बात है कि धनबाद में एक बी डिवीजन क्लब में शाहबाज और उनके भाई का चयन हुआ. मगर दोनों भाई को एक भी मैच में मौका नहीं मिला. इस बात से नाराज शाहबाज के पिता ने अपना एक क्लब बनाया और कहा कि अब मेरे बेटे को कई भी टीम से नहीं निकाल सकता.

धौनी भाई ने हमेशा दिया साथ

नदीम कहते हैं कि उन्हें धौनी भाई से बहुत प्रेरणा मिलती है. घरेलू क्रिकेट या आईपीएल के दौरान धौनी उनकी मदद भी करते हैं. नदीं ने बताया कि जब भी माही भाई मिलते हैं तो वो ये नहीं बताते थे कि तुम्हें क्या सीखना चाहिए. वो ये बताते थे कि अपनी गेंदबाजी में तुम क्या एडऑन कर सकते हो. तुम्हारी गेंदबाजी की क्या स्ट्रेंथ है उस पर ध्यान दो और काम करो. ज्यादा नया मत सीखो जो है उसी में सुधार करो. नया सीखने के चक्कर में जो है वो भी चला जाएगा. मुझे लगता है उन्होंने मुझे ये सबसे अच्छी चीज मुझे बताई. नदीम दिल्ली डेयरडेविल्स और सनराइजर्स हैदराबाद के लिए आइपीएल खेल चुके हैं.

15 साल बाद रंग लाई मेहनत

30 साल से ज्यादा की उम्र में शाहबाज नदीम ने टेस्ट डेब्यू किया है. घरेलू क्रिकेट खेलते हुए उन्हें 15 साल हो गए हैं, लेकिन अब जाकर उनकी मेहनत रंग लाई है. ऑर्थोडोक्स स्पिनर शाहबाज नदीम ने साल 2004 से अब तक 110 फर्स्ट क्लास मैच खेले हैं. इनमें शाहबाज नदीम के नाम 424 विकेट हैं, जबकि लिस्ट ए क्रिकेट में नदीम ने 106 मैचों में 145 विकेट चटकाए हैं.

वहीं, साल 2011 में IPL डेब्यू करने वाले शाहबाज नदीम अब तक 64 मैच खेल चुके हैं. इन मैचों में नदीम ने कुल 42 विकेट अपने नाम किए हैं. जरूरत पड़ने पर शाहबाज नदीम बल्लेबाजी भी कर सकते हैं. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में एक शतक और सात अर्धशतक वे जड़ चुके हैं. फिल्डर तो खैर कमाल के हैं ही.

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