रांची : एसकेलेटर हादसे के बावजूद 33 ने ही लिया है लाइसेंस, शेष को नोटिस भेजेगा ऊर्जा विभाग

Updated at : 24 Sep 2019 9:24 AM (IST)
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रांची : एसकेलेटर हादसे के बावजूद 33 ने ही लिया है लाइसेंस, शेष को नोटिस भेजेगा ऊर्जा विभाग

सुनील चौधरी राज्य में एक लाख से ज्यादा लिफ्ट और एसकेलेटर होने का अनुमान रांची : राजधानी रांची के न्यूक्लियस मॉल में 22 जून को हुए एसकेलेटर (स्वचालित सीढ़ी) हादसे बाद सरकार सख्त हो गयी है. सरकार ने एसकेलेटर या लिफ्ट का लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया है. इसके बावजूद अब तक केवल 33 घरों […]

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सुनील चौधरी

राज्य में एक लाख से ज्यादा लिफ्ट और एसकेलेटर होने का अनुमान

रांची : राजधानी रांची के न्यूक्लियस मॉल में 22 जून को हुए एसकेलेटर (स्वचालित सीढ़ी) हादसे बाद सरकार सख्त हो गयी है. सरकार ने एसकेलेटर या लिफ्ट का लाइसेंस लेना अनिवार्य कर दिया है. इसके बावजूद अब तक केवल 33 घरों या संस्थानों ने ही लिफ्ट या एस्केलेटर का लाइसेंस हासिल किया है. बाकी के लिफ्ट या एसकेलेटर बिना लाइसेंस के ही संचालित हो रहे हैं.

ऊर्जा विभाग का अनुमान है कि राज्य भर में लगभग एक लाख लिफ्ट और एसकेलेटर होंगे जो घर, अपार्टमेंट या शॉपिंग मॉल में लगे हुए हैं. लेकिन इनमें से किसी ने भी लाइसेंस लेने में किसी की रुचि नहीं है. लाइसेंस लेनेवाले में केवल आठ संस्थान या व्यक्ति शामिल हैं जिन्होंने अलग-अलग लिफ्ट के लिए अलग-अलग लाइसेंस लिया है. अब ऊर्जा विभाग ऐसे संस्थानों को नोटिस भेज कर कार्रवाई करने की तैयारी में है.

19 जून 2018 से ही है लाइसेंस लेने का प्रावधान : गौरतलब है कि झारखंड सरकार ने द झारखंड लिफ्ट एंड एसकलेटर एक्ट 2017 के तहत द झारखंड लिफ्ट एंड एसकलेटर रूल्स 2018 की अधिसूचना 19 जून 2018 को ही लागू कर दी थी.

इसके तहत राज्य के जिन भवनों में लिफ्ट व एसकेलेटर लगा हुआ है, उन्हें निबंधन कराकर लाइसेंस लेना होगा. द झारखंड लिफ्ट एंड एसकलेटर रूल्स 2018 के तहत लिफ्ट के तमाम सुरक्षा मानकों को पूरा करना होगा. इसके बाद ऊर्जा विभाग में निबंधन कराना होगा. निबंधन शुल्क 2000 रुपये है.

सुरक्षा मानक के तहत लिफ्ट के लिए वैकल्पिक बिजली आपूर्ति प्रणाली सुनिश्चित करना है. यानी बिजली कटने पर कम से कम इतना बैकअप हो कि जिस फ्लोर पर बिजली कटी है, लिफ्ट उसके ठीक नीचे आकर रुके और उसका गेट भी खुले. भवन मालिक को लिफ्ट लगाने के दो माह की अवधि भीतर ही निबंधन के लिए आवेदन देना होगा.

जिस मॉल में हुआ हादसा, उसे अब तक नहीं मिला लाइसेंस

रांची के न्यूक्लियस मॉल में 22 जून को एसकेलेटर में उलझने की वजह से छात्र पार्थिव की मौत हो गयी थी. इसके बाद ऊर्जा विभाग की तकनीकी टीम ने इसकी जांच की थी. पाया गया था कि इसका लाइसेंस नहीं लिया गया था. एसकेलेटर लगाने में ढांचागत खामियां भी पायी गयी थीं. न्यूक्लियस मॉल को तत्काल लाइसेंस के लिए आवेदन देने का निर्देश दिया गया था. इसके साथ ही ऊर्जा विभाग द्वारा सभी संस्थानों को लिफ्ट और एसकेलेटर का लाइसेंस लेने का निर्देश दिया गया.

पर स्थिति यह है कि हादसे के 94 दिन के बाद भी न्यूक्लियस मॉल लाइसेंस हासिल नहीं कर पाया है. लाइसेंस देने व कार्रवाई का अधिकार ऊर्जा विभाग के पास है. पर ऊर्जा विभाग भी ऐसे संस्थानों पर कोई कार्रवाई तक नहीं कर पा रहा है. पूछे जाने पर इतना ही कहा जा रहा है कि नोटिस भेजेंगे.

जब नीति नहीं बनी थी, तब ही हमने अप्लाई कर दिया था

न्यूक्लियस मॉल प्रबंधन के लीगल मैनेजर संजीव जायसवाल ने कहा कि जब झारखंड सरकार में लिफ्ट और एसकेलेटर के लिए लाइसेंस के लिए कोई नीति नहीं बनी थी, तब हमने सरकार को बताया था कि इसका लाइसेंस लेना पड़ता है और नीति बननी चाहिए.

हमने छह जनवरी 2017 को ही लाइसेंस के लिए आवेदन दिया था और लिफ्ट के लिए 8904 रुपये तथा एसकेलेटर के लिए 15582 रुपये ऊर्जा विभाग में जमा कराये थे. जबकि नीति 19 जून 2019 से लागू हुई है. इसके बाद इस वर्ष 26 जून 2019 को भी लाइसेंस के लिए एक लाख 15 हजार 966 रुपये जमा कराये. हमारा आवेदन नंबर है एचटी/आर-338. पर ऊर्जा विभाग अबतक लाइसेंस नहीं दे सका है.

इसकी वजह है कि लिफ्ट एवं एसकेलेटर लाइसेंस का इंस्टालेशन कार्ड देने के लिए ऊर्जा विभाग ने केवल एक व्यक्ति को अधिकृत किया है. वह हैं धनबाद के बुद्धदेव बनर्जी. वह इंस्टालेशन कार्ड नहीं दे रहें क्या वजह है, आप समझ सकते हैं. लीगल मैनेजर ने कहा कि पूरे राज्यों में लाखों लिफ्ट लगे हैं. यदि लाइसेंस नहीं लिया है, तो विभाग इनके खिलाफ क्या कदम उठा रहा है यह पूछा जाना चाहिए.

मुझे नहीं पता कि न्यूक्लियस मॉल ने क्यों लाइसेंस के लिए आवेदन नहीं दिया है. मैं एक माह तक छुट्टी पर था. हाल ही में ड्यूटी पर आया हूं. यदि कोई लाइसेंस नहीं लिया है तो उन्हें नोटिस भेजेंगे.

प्रमोद कुमार, विद्युत निरीक्षक, ऊर्जा विभाग

अब तक जिन्होंने लाइसेंस लिया है : प्रीतम कुमार महतो खूंटी, रांची का अॉर्किड मेडिकल सेंटर, स्प्रिंग सिटी मॉल(6), सैमफोर्ड हॉस्पिटल(4), सुशील कुमार गुप्ता, द होटल रासो(3), पलामू के ग्रासिम इंडस्ट्रीज(2), धनबाद के श्रीराम मॉल(15).

जिन्होंने लाइसेंस का आवेदन दिया है : पीएंडएम हाइटेक सिटी मॉल जमशेदपुर, अडाणी पावर झारखंड लिमिटेड गोड्डा(2 लिफ्ट के लिए), सतीश कुमार किलबर्न कॉलोनी रांची, आरटीसी इंस्टीट्यूट अॉफ टेक्नोलॉजी ओरमांझी रांची, चॉकलेट होटल्स प्राइवेट लिमिटेड, मोरहाबादी रांची(तीन लिफ्ट के लिए).

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