मॉनसून सत्र : झामुमो के वाकआउट के बाद तीन संशोधन विधेयक को मंजूरी, मंत्री ने कहा, आर्थिक आरक्षण अभी जिलों में नहीं
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :26 Jul 2019 5:00 AM (IST)
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रांची : नगर विकास मंत्री सीपी सिंह की टिप्पणी तथा इससे उपजे विवाद और झामुमो के वाकआउट के बाद गुरुवार को सदन के दूसरे सत्र में तीन संशोधन विधेयक को मंजूरी दी गयी. इसमें गरीब तबके के सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने संबंधी झारखंड पदों एवं सेवाओं की रििक्तयों में आरक्षण (संशोधन) िवधेयक, कारखाना […]
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रांची : नगर विकास मंत्री सीपी सिंह की टिप्पणी तथा इससे उपजे विवाद और झामुमो के वाकआउट के बाद गुरुवार को सदन के दूसरे सत्र में तीन संशोधन विधेयक को मंजूरी दी गयी. इसमें गरीब तबके के सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण देने संबंधी झारखंड पदों एवं सेवाओं की रििक्तयों में आरक्षण (संशोधन) िवधेयक, कारखाना झारखंड संशोधन विधेयक तथा झारखंड राज्य विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक-2019 शामिल है.
विधेयक पास होने के बाद विधानसभा के सदस्यों ने अपने क्षेत्र से संबंधित मुद्दों से सदन को अवगत कराया. आरक्षण के मुद्दे पर मंत्री अमर बाउरी ने स्पष्ट किया कि केंद्र के प्रस्ताव पर आर्थिक रूप से कमजोर तबके के लिए आरक्षण की व्यवस्था हो रही है. झारखंड में अभी राज्य स्तरीय पद व रिक्तियों के विरुद्ध यह आरक्षण देय होगा. वहीं, जिलों में रोस्टर संशोधन होने तक यह व्यवस्था अभी लागू नहीं होगी.
सदन में इन मुद्दों पर विधायकों ने रखी बात
सुखदेव भगत : जब तीन फीसदी सवर्णों के लिए 10 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था हो रही है, तो अोबीसी को उसकी आबादी के अनुरूप आरक्षण मिले.
राधाकृष्ण किशोर : विवि स्तर की बहाली समेकित रूप से व बड़ी संख्या में एक साथ निकाली जाये. टुकड़ों में नहीं. ऐसा करने पर सभी वर्गों खास कर अनुसूचित जाति के लोगों को आरक्षण का लाभ व मौका नहीं मिल पाता.
शिवशंकर उरांव : आदिवासी शक्ति विवि का परियोजना प्रस्ताव तैयार करने के लिए एक कमेटी का गठन होना है. यह काम लंबित है. इसे जल्द पूरा किया जाये. ताकि प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा जा सके.
भानु प्रताप : गढ़वा को बिजली पलामू से मिलती है. फिर गढ़वा जिले से ही रेल को बिजली दी जाती है. मेरा सुझाव है कि सेंट्रल ग्रिड से ही रेल को बिजली मिले. इससे गढ़वा में बिजली की स्थिति सुधरेगी.
नवीन जायसवाल : रामलखन सिंह यादव, जेएन कॉलेज धुर्वा, एसएस मेमोरियल तथा महेंद्र प्रसाद महाविद्यालय की जमीन संबंधी समस्या सुलझायी जाये.
सत्येंद्रनाथ तिवारी : गढ़वा में सिर्फ एक महिला कॉलेज है. इसे दो वर्ष से अपने स्टाफ को मानदेय देने के लिए रांची विवि से अनुदान नहीं मिला रहा है. गलती कॉलेज प्रबंधन की है. पर शिक्षक व अन्य कर्मी भुगत रहे हैं. अनुदान दिलाया जाये. प्रबंधक को जो सजा मिलनी हो मिले.
बिरंची नारायण : रांची, बोकारो व दूसरे शहरों के स्कूली बसों में क्षमता से अधिक बच्चे बैठाये जाते हैं. इससे बच्चों को परेशानी होती है तथा कभी-कभी किसी दुर्घटना की सूचना भी मिलती है. स्थिति सुधारी जाये.
इरफान अंसारी : संस्कृत के लिए बाबा बैद्यनाथ संस्कृति विवि की स्थापना होना अच्छी बात है. सरकार उर्दू एकेडमी खोलने पर भी विचार करे.
जानकी यादव : हमारे क्षेत्र में डिग्री कॉलेज खोलने की सरकार ने मंजूरी दी है. पर कॉलेज निर्माण जमीन का विवाद बना कर बाधित है. जबकि संबंधित जमीन गैर मजरुआ है.
संजीव सिंह : आरएसपी कॉलेज भू-धसान के कारण अन्यत्र स्थानांतरित होना है. बलियापुर में बीसीसीएल की जमीन हस्तांतरण में हो रही बाधा दूर की जाये.
नमन विक्सल कोंगारी : मुंडारी भाषा की पढ़ाई प्राथमिक विद्यालय स्तर से हो.
रांची : विवाद के बाद सीपी ने दी सफाई मैंने बाप नहीं, पिताजी कहा था
रांची : पहली पाली में प्रतिपक्ष के नेता हेमंत सोरेन को लेकर की गयी टिप्पणी पर मंत्री सीपी सिंह ने सदन के बाहर सफाई दी़ दूसरी पाली में सदन में प्रवेश करते ही सीपी सिंह ने हेमंत की अोर देखा अौर मुस्कराये.
फिर वह उनकी सीट तक गये अौर कुछ बोलने लगे. बदले में हेमंत ने हाथ जोड़ लिया. तब तक अध्यक्ष ने अासन ग्रहण नहीं किया था. लगा कि मामला ठंडा हो जायेगा. पर सदन की कार्यवाही शुरू होते ही स्टीफन मरांडी ने यह मुद्दा फिर से उठाया.
उन्होंने कहा कि भोजन अवकाश के पूर्व जो घटना सदन में हुई, वह दुर्भाग्यपूर्ण थी. इस तरह की असंसदीय बात व व्यक्तिगत आक्षेप से बचना चाहिए. हमलोगों को इससे आघात लगा है. संबंधित मंत्री को क्षमा मांगनी चाहिए. इसी बीच निर्भय शाहाबादी खड़े हो गये. वह झामुमो विधायकों की अोर देख कर कहने लगे कि अध्यक्ष की अनुमति के बगैर आप खड़े होकर बोलने लगते हैं.
स्पीकर डॉ दिनेश उरांव ने दोनों पक्षों से शांत होने की अपील की तथा कहा कि भोजन अवकाश से पूर्व की घटना रेकॉर्ड (प्रोसिडिंग) में नहीं रखी गयी है. अब कार्यवाही चलने दी जाये. तब हेमंत ने कहा कि ऐसी बातें सत्ता पक्ष की अोर से लगातार होती रही है. स्टीफन ने फिर कहा कि यह पहली घटना नहीं है. लगता है योजनाबद्ध तरीके से यह सब किया जाता है. इसके बाद सीपी सिंह खड़े हुए. उन्होंने कहा कि मैं चुनौती देता हूं, कोई यह साबित करे कि मैंने बाप शब्द का इस्तेमाल किया था.
उन्होंने कहा कि मैंने पिताजी कहा था. उन्होंने कहा कि गुरुजी पर आपका कॉपीराइट नहीं है. उन्होंने कहा कि न्यूटन का एक लॉ है…उनका इतना कहते ही झामुमो के विधायकों ने फिर हो-हल्ला शुरू किया. हेमंत ने कहा कि मंत्री हमेशा से बड़बोलापन वाले रहे हैं. इधर, सीपी सिंह लगातार प्रोसिडिंग व रेकॉडिंग का हवाला देकर चुनौती की बात कह रहे थे. इस बीच अध्यक्ष ने कहा कि जब आपको मालूम है कि प्रोसिडिंग व रेकॉर्डिंग है ही नहीं, तो चेक क्या कीजिएगा.
व्यक्तिगत टिप्पणी गरिमा के खिलाफ: माले विधायक राजकुमार यादव ने विधानसभा में मंत्री सीपी सिंह की ओर से की गयी टिप्पणी पर आपत्ति जतायी है. उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष के खिलाफ मंत्री का यह कहना कि बेटे के नाम पर कलंक हैं, श्रवण कुमार नहीं, संसदीय लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ है. नाले में बहने से बच्ची की मौत हो जाती है और सरकार के मंत्री अनर्गल टिप्पणी कर रहे हैं. सरकार की ओर से जनता से जुड़े सवाल को आने नहीं दिया जा रहा है.
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