रांची : ....जब पानी के लिए हुई चाकूबाजी, महिला समेत छह घायल
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Jun 2019 6:37 AM (IST)
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भुइयां टोली में गुरुवार की रात पानी भरने को लेकर हुआ विवाद, घायलों को सेवा सदन अस्पताल में कराया गया भर्ती रांची : कोतवाली थाना क्षेत्र की भुइयां टोली में गुरुवार रात पानी भरने को लेकर हुए विवाद में चाकूबाजी हो गयी. घटना में एक महिला सोना देवी समेत छह लोग घायल हो गये. अन्य […]
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भुइयां टोली में गुरुवार की रात पानी भरने को लेकर हुआ विवाद, घायलों को सेवा सदन अस्पताल में कराया गया भर्ती
रांची : कोतवाली थाना क्षेत्र की भुइयां टोली में गुरुवार रात पानी भरने को लेकर हुए विवाद में चाकूबाजी हो गयी. घटना में एक महिला सोना देवी समेत छह लोग घायल हो गये.
अन्य घायलों में महिला के चार पुत्र अजय राय, सुनील राय, सोनू सिंह, ऋषभ राज और चाकूबाजी का आरोपी भरत प्रसाद साहू भी शामिल हैं. घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को सेवा सदन अस्पताल में भर्ती कराया. पुलिस के अनुसार महिला की स्थिति गंभीर बनी हुई है.
स्थानीय लोगों के मुताबिक घटना रात 9:00 बजे की है. लोगों ने बताया कि भुइयां टोली में स्थित पानी की टंकी से पानी भरने को लेकर हमेशा ही विवाद होता रहता है.
आरोप है कि कुछ लोग वहां दबंगई कर दूसरे को पानी लेने के दौरान परेशान करते हैं. गुरुवार रात पहले हम-पहले हम के कारण विवाद हुआ. उसी में अपने नानी घर गये भरत प्रसाद साहू ने सोना देवी और उसके चारों बेटों पर चाकू से हमला कर दिया. हमले में सभी को घायल हो गये. जब वह चाकू चलाने लगा, तो दूसरे पक्ष के लोगों ने उस पर भी वार कर दिया, जिससे वह भी घायल हो गया.
उसका इलाज भी सेवा सदन अस्पताल में चल रहा है. पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया है. आरोपी किशोरगंज का रहनेवाला है. घटना के बाद काफी संख्या में भुइयां टोली के लोग घायलों का हाल जानने के लिए सेवा सदन अस्पताल पहुंचे हुए थे. खबर लिखे जाने तक किसी पक्ष की ओर से इस मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं करायी गयी थी.
निगम के टैंकर लोगों को पानी देने में अक्षम
रांची : शहर में जल संकट की गंभीर किल्लत उत्पन्न हो गयी है. भूजलस्तर के नीचे जाने के कारण दो लाख से अधिक की आबादी पूरी तरह से टैंकर के पानी पर आश्रित हो गयी है. लेकिन निगम के टैंकर भी अब लाेगों को पानी देने में अक्षम साबित हो रहे हैं, क्योंकि टैंकरों को ही पानी के लिए भटकना पड़ रहा है.
टैंकर के ड्राइवरों की मानें, तो किसी भी हाइड्रेंट में चले जायें, सात से आठ टैंकर पानी भरने के लिए कतार में खड़े दिखते हैं. प्रेशर से पानी नहीं मिलने के कारण एक टैंकर पानी भरने में डेढ़ घंटे का समय लग जाता है. ऐसे में आप समझ सकते हैं कि छह टैंकर पानी भरते-भरते आठ से नौ घंटा हो जाता है. उसके बाद हमारा नंबर आता है. इस प्रकार से चाह कर भी हम दो ट्रिप से ज्यादा पानी मोहल्ले में नहीं बांट पाते हैं.
मोटर हुआ दुरुस्त, लेकिन प्रेशर से नहीं मिल रहा पानी
नगर निगम द्वारा वर्तमान में हरमू पुल के समीप, बकरी बाजार, डोरंडा, चांदनी चौक हटिया, सिरोम टोली रिजर्वायर, कांटाटोली रिजर्वायर, लटमा, पीएचइडी कॉलोनी बूटी मोड़ हाइड्रेंट से टैंकरों में पानी भर कर मोहल्ले में वितरित किया जाता है.
लेकिन हरमू पुल, बकरी बाजार, डोरंडा व हरमू नदी के समीप स्थित हाइड्रेंट से पानी पर्याप्त प्रेशर के साथ नहीं मिल रहा है. इस कारण यहां टैंकरों की कतार लग जा रही है. कभी कभार टैंकरों की संख्या अधिक होने पर पानी भरने वाले टैंकर एक हाइड्रेंट से दूसरे हाइड्रेंट में भटकते रहते हैं.
रांची : सप्लाई वाटर का एरिया बढ़े, बोरिंग पर लगे रोक
रांची : जल संकट निदान पर प्रभात खबर सभागार में आयोजित संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा घरों तक सप्लाई वाटर को पहुंचाना होगा. इससे ग्राउंड वाटर पर लोगों की निर्भरता कम होगी. भूमिगत जल के रिचार्ज की व्यवस्था भी करनी होगी. प्रत्येक घरों में वाटर रिचार्ज सिस्टम बनवाना होगा. बोरिंग या तो कम हो या इस पर पाबंदी लगे, सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी होगी, तभी लोगों को जल संकट से मुक्ति मिलेगी.
राजधानी में 1950 के आसपास तीन जलाशय बने थे. उस समय आबादी करीब एक लाख होगी. उस वक्त के हिसाब से जलाशय काफी थे. आज स्थिति बदल गयी है. जनसंख्या बढ़ गयी है, पर एक भी नया जलाशय नहीं बना.
टीबीएन सिंह, वैज्ञानिक
जल संकट बड़ी समस्या है. इसका निदान जन भागीदारी से ही संभव है. सरकार अकेले इस मामले में कुछ नहीं कर सकती है. हमें पूर्वजों ने जो दिया है, हम उसी का दोहन कर रहे हैं.
पंकज कुमार, निदेशक, जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया, झारखंड
हमें तालाब, कुआं और बारिश के पानी के रोकना होगा. इसी से समस्या का समाधान हो सकता है. इसके लिए टुकड़ों में बंट कर बहुत सफलता नहीं मिलेगी. व्यवस्था सुधारने के लिए सरकार को भी जिम्मेदारी लेनी होगी.
विकास सिंह, सिविल सोसाइटी
पिछले तीन-चार साल से राजधानी के कुछ लोग यहां के तालाबों को बचाने में लगे हैं. इसमें सहयोग के लिए कई एजेंसियों के पास जा चुके हैं, पर कोई नहीं सुनती है. हर जगह निराशा हाथ लग रही है.
आरपी शाही, सिविल सोसाइटी
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