कोलकाता, 24 परगना और हावड़ा की 91 सीटों से तय होगा ‘नबान्न का नवाब’, क्या दीदी का किला ढाह पायेगी भाजपा?

Published by :Mithilesh Jha
Published at :29 Apr 2026 6:55 AM (IST)
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West Bengal Election 2026 Decisive Seats

West Bengal Election 2026 Decisive Seats: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में कोलकाता, हावड़ा और उत्तर एवं दक्षिण 24 परगना की 91 सीटें सबसे निर्णायक होंगी. तृणमूल कांग्रेस के गढ़ में भाजपा सेंधमारी की कोशिश कर रही है. जानें क्या कहता है पुराना चुनावी गणित.

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West Bengal Election 2026 Decisive Seats: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में सरकार किसकी बनेगी, इसका फैसला न तो उत्तर बंगाल की पहाड़ियां करेंगी, न ही जंगलमहल के घने जंगल. बंगाल की सत्ता का असली रास्ता दक्षिणी बंगाल के घनी आबादी वाले मैदानी इलाकों से होकर गुजरता है.

4 जिलों की 91 सीटों पर टीएमसी-बीजेपी ने झोंकी ताकत

उत्तर और दक्षिण 24 परगना, कोलकाता और हावड़ा. ये 4 जिले इस बार ‘किंगमेकर’ की भूमिका में हैं. कुल 294 सीटों वाली विधानसभा में इन 4 जिलों की 91 सीटें किसी भी दल की किस्मत बना या बिगाड़ सकती हैं. भाजपा ममता बनर्जी के इस अभेद्य दुर्ग में सेंध लगाकर सत्ता हासिल करना चाहती है, तो तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपने इस सबसे मजबूत गढ़ को बचाने के लिए पूरी जान झोंक रही है.

91 सीटों का महागणित, क्यों खास हैं ये 4 जिले?

बंगाल के राजनेता इन क्षेत्रों को ‘बंगाल के उत्तर प्रदेश का चुनावी नक्शा’ कहते हैं. सदन की लगभग एक तिहाई ताकत रखने वाले इन जिलों का विवरण इस प्रकार है.

  • उत्तर 24 परगना : 33 सीटें (भाजपा के लिए सत्ता का प्रवेश द्वार).
  • दक्षिण 24 परगना : 31 सीटें (TMC का सबसे मजबूत सामाजिक आधार).
  • हावड़ा : 16 सीटें.
  • कोलकाता : 11 सीटें.

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पुराना रिकॉर्ड : TMC का दबदबा और भाजपा की चुनौती

प्रेसिडेंसी प्रभाग की 111 सीटों (जिसमें नादिया भी शामिल है) पर वर्ष 2021 के चुनाव परिणाम चौंकाने वाले थे. तृणमूल कांग्रेस ने इन 111 में से 96 सीटें जीतकर विपक्ष का सूपड़ा साफ कर दिया था. भाजपा को केवल 14 और आईएसएफ को 1 सीट मिली थी.

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लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा ने बढ़ायी अपनी ताकत

2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने अपनी पकड़ मजबूत की और 21 सीटों पर बढ़त हासिल की, जबकि TMC 90 सीटों पर आगे रही. तृणमूल के एक वरिष्ठ मंत्री के मुताबिक, ये सीटें केवल चुनावी आंकड़े नहीं, ममता बनर्जी की राजनीति का सामाजिक आधार हैं.

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भाजपा का प्लान-B : मतुआ और शरणार्थी कार्ड

भाजपा के लिए सत्ता तक पहुंचने का एकमात्र रास्ता इन जिलों में पैठ बनाना है. पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि उत्तर 24 परगना में मतुआ समुदाय और शरणार्थी वोटों के कारण भाजपा इसे अपना ‘प्रवेश द्वार’ मान रही है. कोलकाता और हावड़ा के शहरी मतदाताओं को रिझाने के लिए भाजपा ने आक्रामक प्रचार किया.

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West Bengal Election 2026 Decisive Seats: ममता बनर्जी की TMC का गणित

ममता बनर्जी के लिए गणित बिल्कुल साफ है. अगर वे अपने इस गढ़ को बचाने में कामयाब रहती हैं, तो लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने का उनका रास्ता साफ हो जायेगा. पार्टी का पूरा ध्यान अपनी कल्याणकारी योजनाओं के जरिये इस सामाजिक आधार को एकजुट रखने पर है.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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